
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 01 दिसम्बर 2026
01 जनवरी 2026 दिन गुरुवार को पौष मास के शुक्ल पक्ष कि त्रयोदशी तिथि है। आज प्रदोष व्रत का पावन अवसर है साथ ही आज रवियोग एवं यायीजययोग भी है। आज जनवरी का पहला दिन और पहली तारीख है। आज से खीष्ट्रीयनववर्ष का आरंभ होता है। सभी क्रिश्चियन समाज के लोगों को उनके नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें। और आप सभी सनातनियों को “प्रदोष व्रत के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनाएं।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
*मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥ ☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति) *गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
*गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है । *गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – गुरुवार पौष माह के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि 10:22 PM तक उपरांत चतुर्दशी
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र रोहिणी 10:48 PM तक उपरांत म्रृगशीर्षा
🪐 नक्षत्र स्वामी – रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं, जबकि इसके राशि स्वामी शुक्र हैं, इस नक्षत्र के देवता ब्रह्मा हैं।
⚜️ योग – शुभ योग 05:12 PM तक, उसके बाद शुक्ल योग
⚡ प्रथम करण कौलव 12:06 PM तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल 10:22 PM तक, बाद गर
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:52:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:18:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त 05:25 ए एम से 06:19 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या 05:52 ए एम से 07:14 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त 12:04 पी एम से 12:45 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त 02:08 पी एम से 02:50 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त 05:33 पी एम से 06:00 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या 05:35 पी एम से 06:57 पी एम
💧 अमृत काल 07:57 पी एम से 09:23 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त 11:58 पी एम से 12:52 ए एम, जनवरी 02
❄️ रवि योग 10:48 पी एम से 07:14 ए एम, जनवरी 02
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शमी पूजन करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ प्रदोष व्रत/ ख्रिस्ताब्द 2026 प्रारम्भ/ अंग्रेजी नव वर्ष दिवस/ विश्व शांति दिवस, बाघ दिवस, धूम्रपान विरोधी दिवस, प्रसिद्ध नेता मनीराम बागड़ी जन्म दिवस, भारतीय राजनीतिज्ञ तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री ओमप्रकाश चौटाला जयन्ती, राजनीतिज्ञ राबड़ी देवी जन्म दिवस, अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे जन्म दिवस, महारानी विक्टोरिया भारत की साम्राज्ञी दिवस, आदान-प्रदान के लिए डाक मनीआर्डर सेवा दिवस, राष्ट्रीय हैंगओवर दिवस, महर्षि गौतम जयन्ती, सिखों के गुरु श्री अंगद देव जी जयन्ती, प्रसिद्ध गणितज्ञ सत्येन्द्र नाथ बोस जन्म दिवस, योजना आयोग स्थापना दिवस, राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस स्थापना दिवस, भारतीय आर्मी मेडिकल कोर स्थापना दिवस, भारतीय दंड संहिता (IPC) लागू दिवस, वैश्विक परिवार दिवस (Global Family Day)
✍🏼 तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🗼 Vastu tips 🗽
आर्थिक संकटों से बचने के लिए हाथी के पांव के नीचे की मिट्टी को कुएं में डालना शुभ होता है। वहीं, अगर आपके घर में पढ़ने-लिखने वाले बच्चों की या घर के किसी अन्य सदस्य की याददाश्त कमजोर हैं, तो इसे बढ़ाने के लिए उस मिट्टी को घी और पानी से सानकर 6 गोलियां बनाएं। इन गोलियों पर सिंदूर लगाएं और एक डिब्बी में रखकर कमरे की दक्षिण-पश्चिम दिशा में छिपाकर रख दें।
*आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार शयनकक्ष में हाथी की मूर्ति रखने से पति-पत्नी के बीच प्यार और सम्मान बढ़ता है। हाथी का जोड़ा वैवाहिक जीवन में स्थिरता, विश्वास और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। *आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, इन छोटे-छोटे उपायों को अपनाकर व्यक्ति जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त कर सकता है। अगर आप भी यहां बताई गई किसी समस्या से परेशान हैं, तो इम टिप्स को अपनाकर देख सकते हैं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
उपयोग – कटने-जलने , चोट या घाव होने पर बिच्छू बूटी का इस्तेमाल किया जाता हैं। इसके रस में मौजूद हाइड्रोएल्कोहलिक एक्सट्रैक्ट घाव को जल्दी भरने में मदद करता है। प्राकृतिक तौर पर इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण भी मौजूद होते हैं, जिससे घाव और चोट जल्दी सूख जाते हैं।
*यह उच्च रक्तचाप , मौसमी बुखार ,सर्दी जुखाम , खांसी और सांस फूलने में सहायक उपचार के तौर पर उपयोगी है *इसमें पाया जाने वाला अल्कलॉइ इथेनॉलिक एक्सट्रैक्ट ह्रदय और लिवर को स्वस्थ रखने और रक्त वाहिनियों में वसा के जमावट को कम करने में मदद करता है , बिच्छू बूटी से बनी चाय का नियमित रूप से प्रयोग करने पर ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद मिल सकती है
इसका सेवन मूत्र की मात्रा में वृद्धि कर के शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर कर के डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करती है और मूत्र संक्रमण कम होता है ।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
पाचन संबंधी लाभ: इलायची का सेवन पाचन तंत्र को सही बनाए रखता है। यह गैस, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याओं को कम करता है, जिससे रात को बेहतर नींद आती है।
*स्वस्थ त्वचा: इलायची में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो त्वचा को ताजगी और चमक प्रदान करते हैं। यह रक्त परिसंचरण को भी बेहतर करता है, जिससे चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है। तनाव और चिंता में कमी: इलायची के एंटी-एंग्जाइटी गुण तनाव और चिंता को कम करने में मदद करते हैं। रात को सोने से पहले इलायची खाने से मानसिक शांति मिलती है, जिससे गहरी और आरामदायक नींद आती है। *सांसों की दुर्गंध को दूर करना: इलायची के सेवन से मुंह से आने वाली बदबू को दूर किया जा सकता है। यह सांसों को ताजगी प्रदान करता है और पेट की गड़बड़ी से राहत दिलाता है।
*हार्ट हेल्थ: इलायची दिल के लिए भी लाभकारी है, क्योंकि इसमें पोटेशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे मिनरल्स होते हैं, जो हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। 📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ महाभारत का युद्ध समाप्ति की ओर था। कुरुक्षेत्र की रणभूमि में भीष्म पितामह शरशैया पर पड़े थे। उनके शरीर में असंख्य बाण धँसे हुए थे। तनिक-सा भी हिलना असहनीय वेदना को जन्म देता और बाणों के छेदों से रक्त की धार बह निकलती। मृत्यु उनके समीप थी, पर इच्छामृत्यु का वरदान उन्हें जीवित रखे हुए था। *ऐसी अवस्था में उनसे मिलने अनेक ऋषि-मुनि, योद्धा और राजा आते-जाते थे। एक दिन स्वयं भगवान श्रीकृष्ण उनके दर्शन के लिए पधारे। श्रीकृष्ण को देखते ही भीष्म पितामह मंद स्वर में हँसे और बोले—
*“आइए जगन्नाथ! सर्वज्ञ होते हुए भी क्या आप मेरे इस दारुण कष्ट का कारण बताएँगे? मैंने ऐसा कौन-सा भयंकर पाप किया है, जिसका दंड आज इस रूप में भोग रहा हूँ?” श्रीकृष्ण शांत भाव से बोले— “पितामह! आपके पास दिव्य शक्ति है। आप अपने पूर्व जन्मों को देख सकते हैं। स्वयं ही उत्तर खोजिए।” भीष्म ने कहा—
“देवकीनंदन! अब इस शरशैया पर पड़े-पड़े करने को और है ही क्या?”
उन्होंने नेत्र मूँद लिए और ध्यान में लीन हो गए।
उन्होंने एक-एक कर अपने पूर्व जन्म देखे—दस… बीस… पचास… यहाँ तक कि सौ जन्म। परंतु किसी भी जन्म में उन्हें ऐसा कोई कर्म दिखाई नहीं दिया, जो इस भयानक पीड़ा का कारण बन सके।
आश्चर्य से भरकर भीष्म ने नेत्र खोले और बोले—
“माधव! मैंने सौ जन्म देख लिए। कहीं भी ऐसा पाप नहीं दिखा, जिसका फल यह हो।”
श्रीकृष्ण ने गंभीर स्वर में कहा— “पितामह! एक जन्म और पीछे जाइए। उत्तर वहीं मिलेगा।”
भीष्म पुनः ध्यानस्थ हुए। इस बार उन्होंने देखा कि 101वें जन्म में वे एक राज्य के राजा थे। एक दिन वे अपनी सेना के साथ यात्रा पर निकले थे। तभी एक सैनिक दौड़ता हुआ आया और बोला—
“राजन! मार्ग में एक सर्प पड़ा है। यदि सेना आगे बढ़ी तो वह मारा जाएगा।”
राजा ने तुरंत कहा “उसे मारना उचित नहीं। किसी लकड़ी में लपेटकर झाड़ियों में फेंक दो।”
सैनिक ने वैसा ही किया, परंतु असावधानीवश उसने सर्प को बाण की नोक पर उठाया और पास की झाड़ियों में फेंक दिया। दुर्भाग्यवश वह झाड़ी अत्यंत कंटीली थी। सर्प उसमें उलझ गया। जितना वह निकलने का प्रयास करता, उतना ही अधिक काँटों में फँसता चला गया।
काँटे उसके शरीर में धँस गए। रक्त बहने लगा। रक्त की गंध से चींटियाँ आ गईं और उसे जीवित ही नोचने लगीं। पाँच-छह दिनों तक असहनीय पीड़ा सहने के बाद अंततः उस सर्प ने तड़प-तड़पकर प्राण त्याग दिए।
भीष्म का हृदय काँप उठा। वे श्रीकृष्ण से बोले—
“हे त्रिलोकीनाथ! मेरा उद्देश्य उस सर्प की रक्षा करना था, न कि उसे कष्ट देना। फिर भी यह दंड क्यों?”
श्रीकृष्ण ने करुण दृष्टि से कहा—
“तात श्री! कर्म जानबूझकर किया जाए या अनजाने में—फल से कोई नहीं बच सकता। क्रिया हुई, परिणाम सुनिश्चित हुआ। उस जीव के प्राण गए और उसे अत्यधिक पीड़ा मिली—बस यही कारण है।”
उन्होंने आगे कहा—
“आपका पुण्य इतना प्रबल था कि उस कर्म का फल 101 जन्मों तक दबा रहा। परंतु जब समय आया, तो फल भोगना ही पड़ा।”
*“जो जीव किसी को पीड़ा देता है, चाहे अनजाने में ही क्यों न हो, उसे वही पीड़ा इस जन्म या अगले किसी जन्म में अवश्य सहनी पड़ती है। आज जो पशु योनि में जन्म लेकर कष्ट भोग रहे हैं, वे भी पूर्व जन्मों के ऐसे ही कर्मों का फल भोग रहे हैं।”
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⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।

