मध्य प्रदेश

रैली निकालकर वन कर्मचारियों ने दी चेतावनी : कलेक्ट्रेट पहुंच अपनी 20 सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन जमकर नारेबाजी की

रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन । शहर के सांची मार्ग पर स्थित जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय भवन पहुंचकर मध्यप्रदेश वन कर्मचारी संघ ने 20 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम संबोधित ज्ञापन एसएलआर मंशाराम खत्री को दिया।
रेंजर एसोसिएशन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार सिंह व रायसेन वन कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष प्रभात यादव डिप्टी रेंजर नरेश कुशवाहा राकेश कैलोदिया एमएल तिलचोरिया ने बताया कि कर्मचारियों को 13 माह का वेतन का बहुत दिन से लंबित मामला जो पूरा नहीं हो पा रहा है। दूसरी बात हमारा वन कर्मचारी शासकीय सेवा करते समय शहीद हो जाता है, वीरगति को प्राप्त कर लेता उसको शहीद का दर्जा देने में शासन समय लगाते हैं और कई बार दे नहीं रहे यह हमारी मांगे और एक हमें जो राजनीतिक रूप से हमारे कार्यों में दखल दिया जाता।
उससे संरक्षण प्रदान करने संबंधी इस प्रकार की हमारी 20 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन दिया है और चरणबद्ध रूप से हम यह आंदोलन करने जा रहे हैं आज हमने कलेक्टर को ज्ञापन दिया मुख्यमंत्री के नाम से. उसके बाद में हम एक महीने बाद में विधायकों सांसदों को अपना ज्ञापन देंगे ।इसके बाद हम अपने बस्ते जमा कर देंगे और 5 मई 2023 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंग। वन कर्मचारियों की लंबित समस्याएं: अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
मध्यप्रदेश वन कर्मचारी संघ जिला ईकाई रायसेन के द्वारा वन कर्मचारियों की लम्बित समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर अरविंद दुबे वको ज्ञापन सौंपा। जिसमें मांग की गई कि रामस्वरूप वेतन आयोग, अग्रवाल वेतन आयोग, बोहरा मुसरान समिति की सिफारिश एवं अपर प्रधान मुख्य सचिव वन द्वारा संघ के साथ 2008 में किया या लिखित समझौता के पालन केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा छठे वेतन आयोग की सिफारिश का पत्र की आई आर. एफ.आई एस. के पत्र के पालन में तत्कालीन माननीय वनमंत्री डॉ गौरीशंकर शेजवार के द्वारा लिखित में दिया गया।यह आश्वासन पत्र दिनांक 04 मई .2018 के के तहत म.प्र. के विभिन्न वनांचल में पदस्य कार्यपालिक वन कर्मचारी जो कि समाज के अंतिम बिन्दू पर रहकर 24 घंटे वन एवं वन्यप्राणियों की सुरक्षा में तपती दोपहर, कडक़ड़ाती ठंड एवं घनघोर वर्षा में समाज एवं परिवार से दूर रहकर दबंगता के साथ वनों की सुरक्षा में लगे हुए हैं। इनकी मेहनत, त्याग समर्पण से ही पूरे भारत वर्ष में सर्वाधिक वन म.प्र. में पाये जाते है इतनी कठिन सेवा करने वाले वन कर्मचारियों के समान अन्य विभागों के कर्मचारियों से भारत वर्ष में कार्यरत वन विभाग के कर्मचारियों का वेतनमान न्यूनतम है जो चिंता का विषय होकर मनोबल गिराने वाला है।
म.प्र. के वनांचल में पदस्य कर्मचारियों की वेतन विसंगति वर्षों पुरानी है। जिसके संबंध में अपर मुख्य सचिव वन रंजना चौधरी के द्वारा वर्ष 2008 में लिखित समझौता शासन द्वारा सघं से किया गया था, जो पूरा नहीं किया गया है। वन मंत्री की अध्यक्षता में वन सचिव एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख l केप्टन अनिल खरे द्वारा भी संघ के साथ लिखित आश्वासन दिये जाने के पश्चात भी वेतन विसंगति को दूर नही किया गया। म.प्र को टाईगर स्टेट का दर्जा दिलाना यह उपलब्धि वन कर्मचारियों की ही है। वन कर्मचारी सबसे ज्यादा प्रताडि़त है।साथ ही चैतावनी भी दी है कि यदि समय रहते वन कर्मचारियों की समस्याओं का निराकरण नही किया जाता है तो अनिश्चित कालीन हड़ताल की जावेगी।

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