अवैध खनन किसके संरक्षण में ? प्रशासन मौन पर उठे सवाल

सिलवानी। तहसील कार्यालय के सामने से रोजाना दर्जनों ट्रालियों का अवैध मुरम व मिट्टी लेकर बेरोकटोक गुजरना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि तहसील कार्यालय से महज एक किलोमीटर दूर सिलवानी शासकीय कॉलेज के पीछे दिन-रात खुलेआम मिट्टी और मुरम का उत्खनन किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार तहसील कार्यालय के ठीक सामने से अवैध मिट्टी, मुरम से भरी ट्रालियां दिनदहाड़े निकलती हैं। इसके बावजूद खनन विभाग, राजस्व, पुलिस और तहसील प्रशासन की चुप्पी समझ से परे है। लोगों का कहना है कि यह कोई छिपा हुआ खेल नहीं, बल्कि खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि बिना किसी प्रशासनिक संरक्षण के इस स्तर पर अवैध मिट्टी उत्खनन संभव नहीं है। जब रोजाना ट्रालियां तहसील कार्यालय के सामने से गुजर रही हैं, तो अधिकारियों को इसकी जानकारी न होना अविश्वसनीय प्रतीत होता है। इससे प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।
स्थानीय रहवासियों ने सवाल उठाया है कि क्या अवैध खनन माफिया को किसी तरह का संरक्षण प्राप्त है, या फिर शासन के नियम-कायदे केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। उनका कहना है कि इस अवैध गतिविधि से न केवल शासन के राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंच रही है।
नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि कानून का भय स्थापित हो सके।
इनका कहना है
उत्खनन और परिवहन पर कार्यवाही लगातार जारी है, आपके माध्यम से जो जानकारी मिली है उसको भी चेक करा लिया जायेगा।
महेन्द्र पटेल, माइनिंग अधिकारी



