विलुप्त होती कौओं की प्रजाति के संरक्षण के प्रयास जारी
रायसेन। जिला मुख्यालय पर शनिवार से पितृपक्ष शुरू हो चुके हैं। ऐसा माना जाता है कि इन 15 दिनों के पितृपक्ष काल में किए गए दान पुण्य और उनके सेवा कार्य सीधे उनके पितरों तक पहुंचते हैं और उन्हीं के आशीर्वाद से परिवार में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है।पण्डित रमेश गोपाल चतुर्वेदी, पंडित राजेन्द्र दुबे ने बताया कि इसमें एक कार्य है पितरों के प्रतीक कौओं को आहार कराने का क्योंकि सनातनी धर्म में और परंपराओं में यह माना गया है कि कौओं को भोजन कराने से सीधे हमारे पितरों तक भोजन आहार पहुंचता है।
इसके लिए नगर विकास संघर्ष समिति द्वारा मिश्र तालाब घाट स्थित एक काग उद्यान का निर्माण किया जा रहा है। जहां प्रतिदिन कौओं को प्रतिदिन भोजन कराया जाता है। गौरतलब है कि पितृ पक्ष काल में तो यहां मिष्ठान और मीठे चावल तैयार करने का भी कार्य किया जाता है।
रायसेन ने बताया कि देश का पहला ऐसा उद्यान है जहां विलुप्त होती कौओं की प्रजाति को बचाने एवं उनके संरक्षण का कार्य किया जाता है बल्कि प्रतिदिन उनके लिए भोजन भी तैयार किया जाता है।
कौओं को बचाना बहुत जरूरी-दुबे
समिति के सचिव अखिलेन्द्र दुबे, समाजसेवी महेश चच्चा श्रीवास्तव बाबा वीरेंद्र राजपूत के मुताबिक विलुप्त होती इस प्रजाति को न केवल बचाने का कार्य यहां किया जाता है ।बल्कि धार्मिक एवं वैज्ञानिक रूप से भी कौवों का संरक्षण आवश्यक है। जहां धार्मिक रूप से यह हमारे पितरों के प्रतीक के रूप में स्थान प्राप्त है।
कहा जाता है पितृ पक्ष में किया गया कौओं का आहार सीधे हमारे पितरों तक पहुंचता है तो दूसरी ओर वैज्ञानिक दृष्टि से भी इनका का बड़ा महत्व है । कौवे कीट भक्षी होते हैं और मानव शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों का यह भक्षण करते हैं।



