सालाना उर्स बड़ी शानों शौक़त से मनाया : ख्वाजा हजरत पीर फतेह उल्लाह साहब के शिष्य पहुंचे दरगाह शरीफ

मजार के दरबार टेका मत्था कुल की दुआ के साथ उर्स का समापन
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। सोमवार को शहंशाहे मालवा हजरत पीर फतेह उल्लाह साहब की भोपाल रोड़ स्थित दरगाह शरीफ मजार पर सोमवार को सुबह कुल की दुआ के साथ ही समापन हुआ। रंग की मेहफिल भी सजी। जिसमें देश प्रदेश के कई जायरीनों ने शिरकत की। इस मौके पर शहर काजी जहीर उद्दीन, जमील खाना भूरा भाई आरा मशीन हुजैफा उजेफ विशेष रूप से मौजूद रहे।
दरगाह शरीफ स्थित मजार पर ख़्वाजा हजरत पीर फतेह उल्लाह साहब चिश्ती का सालाना उर्स पाक बड़ी शानों शौक़त से मनाया गया। यहां उर्स की कव्वालियों की महफ़िल आयोजित की गई। जिसमें सैकड़ों की तादाद में ख़्वाजा साहब के शिष्य मजार शरीफ पहुंचे। ख्वाजा साहब के दरबार में हाजरी दी और अक़ीदत शिद्दत के फूल और चादर पेश किए। उर्स के आखिरी दिन महफिले रंग व कुल की फ़ातिहा हुई। जिसमें ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी के सदर हाजी शाह मीरी खुर्रम शहर काजी जहीर उद्दीन ने कुल की दुआ पढ़ी।
इस अवसर पर रंग की महफ़िल में शायर मशहूर कव्वाल अशरफ वारसी, असलम वारसी ने कलाम दिल के शीशे में उतर आई है सूरत तेरी करता रहता हूं सबो रोज़ ज़्यारत तेरीकलाम पर लोग झूम उठे। महफ़िल के आखिर में कुल शरीफ़ की फ़ातिहा पढ़ी गई। उर्स का समापन पर मजार शरीफ को 10 क्विंटल फूलों से सजाया…..
उर्स के दूसरे दिन बाबा पीर फतह उल्लाह साहब की दरगाह को फूलों से सजाया गया।
शहर के शहंशाहे मालवा ख्वाजा हजरत पीर फतेह उल्लाह साहब की दरगाह पर तीन दिवसीय 801 वां सालाना उर्स चल रहा था। शनिवार- रविवार की रात में छह घंटे में 10 क्विंटल फूलों से बाबा साहब की दरगाह को सजाया गया। दरगाह को सजाने के लिए इंदौर, रतलाम और भोपाल से फूल मंगाया गया था । 50 मजदूरों ने दरगाह शरीफ मजार को फूलों से सजाया। फूलों का डेकोरेशन राकेश सैनी के नेतृत्व में किया गया।



