शरद पूर्णिमा पर खीर चांदनी में रखने की प्रथा
व्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । 9 अक्टूबर रविवार को है शरद पूर्णिमा का त्योहार। इस दिन खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की प्रथा है । इसके बारे में ज्योतिषाचार्य हरिकेश शास्त्री तिंसुआ वालो ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर महिलाएं व्रत रखकर भगवान विष्णु को मावा के लड्डूओं का भोग लगाती है इस दिन भगवान कृष्ण ने गोपियों संग रासलीला रचाई थी। इसलिए इस दिन भगवान कृष्ण के पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन सवा पाव शकर और शकर पाव मावे के छह लड्डू बनाए जाते हैं। जिसमें एक लड्डू गर्भवती महिलाओं को, एक पति को एक बालक को, एक सखी को, एक भगवान को एक लड्डू स्वयं प्रसाद रूप में ग्रहण करना चाहिए। कहते हैं इस रात में अमृत बरसता है। इसलिए अरोग्यता प्राप्ति के लिए इस दिन रात घर के आंगन या छत पर भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करके उन्हें खीर का भोग लगाया जाता हैं।
चंद्रमा की किरणाें में इस दिन होता है अमृतत्व का वास:- इस दिन से शरद ऋतु का प्रारंभ होता है। शरद पूर्णिमा की रात्रि को चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होकर अमृत बरसाता है शरद पूर्णिमा की रात सनातन धर्म में महत्वपूर्ण मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार इस रात्रि को चंद्रमा की रोशनी में चावल व केसर युक्त खीर रखने से वह अमृत्तुल्य हो जाती है। लगभग चार घंटे तक चंद्रमा की रोशनी में चांदी के पात्र में खीर रखें तथा उसको श्वेत मलमल के कपड़े से ढक दें। इस खीर के सेवन व प्रसाद रूप में वितरण करने से अशांत मन को शांति की अनुभूति होती है।शारीरिक लाभ के लिए महत्वपूर्ण शरद पूर्णिमा व्यक्ति का चंद्रमा शुद्ध होता है। अवसाद के रोगियों के लिए यह खीर मानसिक ऊर्जा प्रदान करती है। सर्दी जुखाम, गुप्त रोग, अस्थमा के रोगियों को इस खीर के सेवन से चमत्कारिक लाभ मिलता है। जो बच्चे प्रायः पढ़ाई में कमज़ोर होते हैं,उनके लिए यह खीर मानसिक शक्ति प्रदान करती है।
विवाह की बाधाएं हो जाती हैं दूर:- कुंवारी लड़कियों के लिए यह दिन बहुत ही शुभ फलदायक है। सुबह स्नान आदि करके व्रत व चंद्रमा को अर्घ देकर व्रत की पारणा करने से उचित लाभ मिलता है मनभावन वर की प्राप्ति होती है। यह उपाय हर महीने की पूर्णिमा पर पुनः दौहराए उचित लाभ मिलता है धन संपत्ति पाने के लिए भी यह दिन अति शुभ मानते हैं। शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी का अवतरण दिवस माना जाता है। समुद्र मंथन की पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन से इसी दिन ही मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसलिए इस दिन मां लक्ष्मी का पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन रात्रि काल में मां लक्ष्मी भूमि पर भ्रमण के लिए निकलती हैं। वे देखती हैं जहां साफ सफाई हो और उनके मंत्रों, स्तोत्रों का जाप हो रहा हो, उस घर में वो प्रवेश करती हैं। मां लक्ष्मी के प्रवेश का अर्थ आपके घर से दुख-दारिद्रय का नाश और सुख-समृद्धि क आगमन होता है। इस पूर्णिमा पर रात्रि जागरण का विशेष महत्व है ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि कर मां लक्ष्मी नारायण की उपासना करे लक्ष्मी प्रसन्न होकर अपने भक्तों को इच्छित फल देती है।

