मध्य प्रदेश

सर्पदंश पीड़ित मासूम बालिका की झाड़ फूंक छोड़ इलाज अपनाने से बची जान

ग्राम जरुआ तेंदूखेड़ा का मामला
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
तेंदूखेड़ा। जनपद पंचायत के वनांचल क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जरूआ में अंधविश्वास के बीच जागरूकता की एक मिसाल सामने आई है, जहां झाड़-फूंक के बजाय समय पर चिकित्सा उपचार मिलने से 12 वर्षीय बालिका की जान बच गई।
जानकारी के अनुसार ग्राम जरूआ निवासी रवीना यादव पिता हल्ले यादव, उम्र 12 साल, गुरुवार शाम करीब 7:30 बजे अपने घर के आंगन में बैठी थी, तभी एक जहरीले सांप ने उसके हाथ में डस लिया। घटना के बाद बालिका चीख पड़ी, जिस पर परिजन मौके पर पहुंचे और सांप को भागते हुए देखा। प्रारंभ में परिवार झाड़-फूंक कराने की तैयारी कर रहा था।
इसी बीच बालिका के पिता ने ग्रामीण विकास समिति के कार्यकर्ता धर्मदास पाल को सूचना दी। उन्होंने तुरंत चिकित्सकीय उपचार कराने की सलाह दी। समझाइश के बाद परिजन बालिका को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तेंदूखेड़ा लेकर पहुंचे, जहां ड्यूटी पर मौजूद डॉ. प्रियांशु साहू ने तुरंत एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन देकर उपचार शुरू किया।
बालिका की गंभीर स्थिति को देखते हुए 108 एम्बुलेंस के माध्यम से उसे जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। रात करीब 10 बजे मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद उपचार शुरू हुआ और लगभग दो घंटे में उसकी हालत में सुधार आने लगा। चिकित्सकों ने एहतियातन 72 घंटे निगरानी में रखने की सलाह दी है। फिलहाल बालिका खतरे से बाहर बताई जा रही है।
क्षेत्र में अब भी कायम है अंधविश्वास
तेंदूखेड़ा क्षेत्र के इमलीडोल, जरूआ सहित आसपास के वनांचल गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। पक्की सड़क, पानी, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार समय पर इलाज न मिलने और झाड़-फूंक पर भरोसा करने से जानलेवा स्थिति बन जाती है।
पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
ग्रामीणों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में ग्राम जरूआ में सर्पदंश की लगभग पांच घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें से दो लोगों की मौत केवल झाड़-फूंक पर निर्भर रहने के कारण हो गई थी।
जागरूकता से बची जान
ग्रामीण विकास समिति द्वारा लगातार क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, टीकाकरण, स्वच्छता और बाल विवाह जैसे मुद्दों पर जागरूक किया जाता है। इसी प्रयास का परिणाम है कि इस बार समय पर सही निर्णय लिया गया और एक मासूम की जान बच सकी।
समिति के कार्यकर्ता धर्मदास पाल ने अपील की है कि किसी भी आपात स्थिति में अंधविश्वासों के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें, ताकि अनमोल जीवन की रक्षा की जा सके।

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