ज्योतिषधार्मिक

शारदीय नवरात्रि 2022 पर जानिए पूजा, घट स्थापना और कलश स्थापना के सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501

🌸 *_शादीय नवरात्रि आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानी कि 26 सितंबर 2022 सोमवार से प्रारंभ हो रही है। नवरात्रि का समापन 5 अक्टूबर 2022 को होगा। इस बार मातारानी हाथी पर सवार होकर आ रही है और बन रहे हैं बहुत ही शुभ संयोग और दुर्लभ योग। आओ जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से पूजा, कलश स्थापना और घटस्थापना के शुभ मुहूर्त।_*

⚱️ *_नवरात्रि में घटस्थापना, कलश स्थापना और पूजा के शुभ मुहूर्त जानें |_*

📆 *_प्रतिपदा तिथि प्रारंभ : 26 सितंबर 2022 को सुबह 03:23 से।_*
📝 *_प्रतिपदा तिथि समापन : 27 सितंबर 2022 को सुबह 03:08 पर।_*
🕉️ *_शुभ मुहूर्त : सुबह 6 बजकर 11 मिनट से लेकर 7 बजकर 51 मिनट तक रहेगा।_*
❄️ *_विजय मुहूर्त : दोपहर : 02:29 से 03:17 तक।_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : दोपहर 12:06 से 12:54 तक रहेगा।_*
✡️ *_विजय मुहूर्त : दोपहर : 02:30 से 03:18 तक।_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:19 से 06:43 तक।_*
🏙️ *_सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:31 से 07:43 तक।_*
💮 *_शुक्ल योग सुबह 08:05 तक, उसके बाद ब्रह्म योग।_*

🙏🏻 *_पूजा विधि_*

*_सबसे पहले मां शैलपुत्री की तस्वीर स्थापित करें और उसके नीचे लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं।_*
*_इसके ऊपर केशर से ‘शं’ लिखें और उसके ऊपर मनोकामना पूर्ति गुटिका रखें।_*
*_तत्पश्चात् हाथ में लाल पुष्प लेकर शैलपुत्री देवी का ध्यान करें।_*

♦️ *_1. मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नम:।_*

*_मंत्र के साथ ही हाथ के पुष्प मनोकामना गुटिका एवं मां के तस्वीर के ऊपर छोड़ दें।_*
*_इसके बाद प्रसाद अर्पित करें तथा मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप करें। इस मंत्र का जप कम से कम 108 करें।_*

♦️ *_2. मंत्र- ॐ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:।_*

*_मंत्र संख्या पूर्ण होने के बाद मां दुर्गा के चरणों में अपनी मनोकामना व्यक्त करके मां से प्रार्थना करें तथा आरती एवं कीर्तन करें।_*
*_मंत्र के साथ ही हाथ के पुष्प मनोकामना गुटिका एवं मां के तस्वीर के ऊपर छोड़ दें।_*
*_इसके बाद भोग अर्पित करें तथा मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप करें।_*
*_यह जप कम से कम 108 होना चाहिए।_*

🧘🏻‍♀️ *_ध्यान मंत्र_*
*_वन्दे वांच्छित लाभाय_* *_चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ ।_*
*_वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥_*

🤷🏻‍♀️ *_अर्थात- देवी वृषभ पर विराजित हैं। शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल है और बाएं हाथ में कमल पुष्प सुशोभित है। यही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा है।_*

👸🏻 *_नवरात्रि के प्रथम दिन देवी उपासना के अंतर्गत शैलपुत्री का पूजन करना चाहिए।_*

📖 *_स्तोत्र पाठ_*
*_प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्।_*
*_धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥_*
*_त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्।_*
*_सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥_*

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