शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी का व्रत, उपासना करने से आपकी सभी मनोकामना पूरी होंगी,
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी का व्रत किया जाता है। इस दिन मां दुर्गा की उपासना की जाती है। जिस प्रकार चतुर्थी तिथि का अधिष्ठाता भगवान गणेश को माना जाता है, उसी प्रकार प्रत्येक महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को देवी दुर्गा की उपासना की जाती है। लिहाजा 24 अगस्त को देवी दुर्गा की उपासना का दिन है। कहा जाता है कि इस दिन देवी दुर्गा की उपासना करने से आपकी सभी मनोकामना पूरी होंगी, साथ ही आपकी हर समस्या का हल निकलेगा। जानिए आचार्य श्री गोपी राम से मासिक दुर्गाष्टमी का शुभ मुहूर्त पूजा विधि और मंत्र।
💮 मासिक दुर्गाष्टमी का शुभ मुहूर्त
➡️ मासिक दुर्गाष्टमी तिथि प्रारम्भ – 24 अगस्त सुबह 03 बजकर 31 मिनट पर
➡️ मासिक दुर्गाष्टमी का समापन – 25 अगस्त सुबह 03 बजकर 10 मिनट पर
🧾 पूजा सामग्री की लिस्ट
लाल चुनरी, लाल कपड़ा, मौली, श्रृंगार का सामान, दीपक, घी/ तेल, धूप, नारियल, चावल, कुमकुम, फूल, देवी की प्रतिमा या फोटो, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, बताशे या मिसरी, कपूर फल-मिठाई, कलावा
⚛️ मासिक दुर्गाष्टमी पूजा विधि
👉🏽 मासिक दुर्गाष्टमी के दिन सुबह उठकर स्नान आदि करके साफ कपड़े धारण कर लें।
👉🏽 इसके बाद पूजा घर को गंगाजल छिड़क उसकी शुद्धि कर लें।
👉🏽 उसके बाद एक चौकी में लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या फोटो स्थापित करें।
👉🏽 अब देवी मां को जल अर्पित करें।
👉🏽 इसके बाद मां दुर्गा को लाल चुनरी और सोलह श्रृंगार चढ़ाएं फिर लाल रंग का पुष्प,पुष्पमाला और अक्षत अर्पित करने के बाद मां दुर्गा को सिंदूर से टीका लगा दें।
👉🏽 मां दुर्गा को एक पान के पत्ते में लौंग, सुपारी, इलायची, बताशा रख कर चढ़ा दें।
👉🏽 भोग के रूप में कोई मिठाई चढ़ाएं और फिर जल अर्पित करें।
👉🏽 इसके बाद घी का दीपक और अगरबत्ती जलाकर मां दुर्गा चालीसा का पाठ करके विधि-विधान के साथ मां की आरती करें
👉🏽 अंत में आपके द्वारा की गई गलतियों के लिए क्षमा मांग लें।
🗣️ मासिक दुर्गाष्टमी का मंत्र
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके।
शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥
या देवी सर्वभूतेषु मां दुर्गा-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥



