संतान की रक्षा के लिए माताओं ने रखा व्रत, की पूजा अर्चना
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमारियापान । संतान सप्तमी व्रत का और एक नाम मुक्ता भरण है । इसे भाद्रपद की सप्तमी तिथि को किया जाता है यह व्रत पुत्र प्राप्ति पुत्र रक्षा के लिए महिलाएं रहती हैं। इस दिन महिलाएं चौक रंगोली बनाकर चंदन अक्षत धूप, दीप, सुपारी, नारियल आदि से शिव पार्वती की पूजा करती हैं इस दिन नए नैवेद्य भोग के लिए खीर पुरी और गुड़ के पूए बनाकर भगवान को अर्पित किए जाते हैं। इस दिन जाम्बवती के साथ श्याम सुंदर तथा उसे उनके बच्चे साम्ब की पूजा भी की जाती है। माताएं पार्वती का पूजन करके पुत्र प्राप्ति और उसके अच्छे भविष्य के लिए प्रार्थना करती हैं । पंडित श्री केसरी प्रसाद गर्ग ने बताया कि एक बार श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया कि मेरे जन्म से पहले किसी समय मथुरा से लोमस ऋषि आए थे मेरे माता-पिता देवकी और वासुदेव ने भक्ति पूर्वक उनकी पूजा की तो ऋषि ने कहा कि है देवकी कंस ने तुम्हारी कई संतान को मार दिया है इस दुख से मुक्त होने के लिए तुम संतान सप्तमी का व्रत करो ।


