समिति प्रबंधक कर रहे नेतागिरी, सोसायटी बंद, देवरी मंगेला सोसायटी का मामला
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । मूंग-उड़द खरीदी मामले में चर्चा में आये देवरी मंगेला समिति प्रबंधक सोसायटी बंद करके नेताजी में उतर आये है। हम यह ऐसा ही नहीं कह रहे बल्कि देवरी मंगेला क्षेत्र अंतर्गत स्थित किसानों के द्वारा ऐसा कहा जा रहा है।
ढीमरखेड़ा तहसील के अंतर्गत आने वाली प्राथमिक साख सहकारी समिति देवरी मंगेला पंजीयन क्रमांक 100 हमेशा बंद ही रहती है लेकिन यहां पर मजेदार बात यह है कि सोसायटी की बिल्डिंग में स्पष्ट लिखा हुआ है कि खुलने के दिन, सोमवार, मंगलवार, बुधवार। इस बात की तहकीकात करने के लिये जब क्षेत्र में जाकर किसानों से चर्चा की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि सोसायटी कभी नहंी खुलती है। लेकिन जो बात किसान कह रहे थे उसमें विश्वास नहीं हुआ तब इसकी और तहकीकात की गई तब मामले में एक नया मोड़ आ गया और क्षेत्रीय किसानों ने बताया कि उक्त सोसायटी में पदस्थ समिति प्रबंधक वीरेन्द्र गर्ग समिति प्रबंधक होने के साथ-साथ एक राजनीतिक पार्टी से भी जुड़े हुये है। इस कारण से उनका मन सोसायटी में नहीं लग रहा है। शायद इसी कारण से सोसायटी बंद रहती है।
बद्हाली पर आंशु बहा रहा भवन
उपरोक्त समाचार में प्रकाशित सोसायटी के भवन को देखकर यह कहां जा सकता है कि काफी लम्बे अरसे से उक्त भवन का रंग रोगन नहीं किया गया है जिस कारण से उक्त भवन जर्जर अवस्था में पहुंच रहा है। यहां पर यह उल्लेखनीय है कि हर वर्ष विभिन्न समितियों द्वारा तरह-तरह के बिल लगाये जाते है जिसमें भवन का रंग रोगन भी शामिल होता है और यदि देवरी मंगेला भवन में कई वर्षों से रंग रोगन नहीं किया गया है तो उसका जिम्मेदार कौन है।
जिम्मेदारों को नहीं मतलब
जिस तरह की भर्रासाही सहकारिता विभाग में होती है शायद ही इस तरह भर्रासाही किसी विभाग में हो। विभाग के उच्च पदों पर पदासीन तथाकथित मठाधीन (अधिकारी) इस तरह से आंख बंद करके बैठे है कि उन्हें अच्छा या बुरा नहीं दिखता है और उनका उद़्देश्य सिर्फ एक ही होता है पैसा कमाना अर्थात हर माह उनका कमीशन दो, खरीदी में कमीशन दो इसके बाद संबंधित कर्मचारी को जो कुछ भी करना है तो करें अधिकारियों को कुछ मतलब नहीं है। लिहाजा अपने आकाओं से मिले बरदान के कारण स्थानीय स्तर पर पदस्थ कर्मचारी जमकर चांदी काटते है और नियमों को ताक पर रखकर जनता के हिस्से का निवाला तक खा लेते है।



