घायल गायों के उपचार के बाद देखभाल कर रही श्री राम गौ सेवा समिति
रिपोर्टर : आशीष रजक
रायसेन, उदयपुरा। गौ सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं इसे चरितार्थ कर रही है उदयपुरा शहर की श्रीराम गौ सेवा समिति। गौ सेवकों के प्रयास से अभी तक अनेक गायों को बचाया गया। अधिकांश केस कुत्ते काटने वाले और एक्सीडेंटल है।
वाहन दुर्घटना या अन्य कारण से अक्सर सड़कों, गलियों में गाय, बछड़े आदि घायल हो जाते हैं। कई बार उपचार के अभाव में कई गायों की मौत भी हो जाती है लेकिन शहर की गौसेवा समिति ने ऐसे ही घायल गाैवंश की सेवा का बीड़ा उठाया है।समिति के कार्यों से प्रभावित होकर अनेक प्रतिष्ठित लोग भी संस्था से जुड़ रहे हैं। समिति के लोग कहीं भी गौवंश घायल होने की सूचना मिलने पर तुरंत पहुंचते हैं।
एक छोटी गौ माता जिसकी आंखों की रोशनी नहीं है उसे कुत्तों ने काट कर घायल कर दिया था। अस्पताल में पदस्थ संजय सोनी मुन्ना लाल रजक धनराज लोधी एवं अन्य सदस्यों सहित पत्रकार आशीष रजक, अनिल रघुवंशी सहित समिति सदस्यों द्वारा घायल गौमाता को स्थानीय गौशाला मैं ले जाकर डॉक्टर से इलाज करवाया। डॉक्टर ने उपचार के उपरांत बताया कि प्राथमिक उपचार से गौ माता की आंखों की रोशनी आ भी सकती है पर यदि नहीं आई तो भोपाल में गौ माता की आंखों का ट्रांसप्लांटेशन होगा। गौ माता की आंखों का ट्रांसप्लांटेशन का पूरा खर्च उदयपुरा निवासी आशीष रजक ने जिम्मा उठाया है ताकि गौ माता की आंखों में रोशनी आ सके। साथ ही शनिवार को गौशाला में एक ट्राली भूसा भी स्थानीय आशीष रजक के द्वारा दान किया गया।
पूर्व में भी जगह जगह से घायल अवस्था में गाय पड़े हाेने की सूचना मिली। गाय के पेट के नीचे लगभग डेढ़ फीट हिस्से में जख्म था। बचने की उम्मीद नहीं थीं। पशु चिकित्सालय में बेहतर उपचार के बाद गाय स्वस्थ है। यही नहीं, इस गाय ने एक बछड़े को भी जन्म दिया है। यह समिति की स्पेशल गाय है, जिसे भगवती का नाम दिया गया। उसके बछड़े का नाम नंदी रखा गया है।
एक फोन पर पहुंचते हैं सेवक घायल गायों को लेने।
घायल गायों को लाने-ले जाने के लिए पिकअप वाहन की किराए से करी गई है व्यवस्था। एक फोन पर तत्काल समिति के सदस्य मौके पर पहुंचते हैं। उपचार के बाद गायों को नगर के गौशाला में रखा जाता है।
गाय को मां का दर्जा प्राप्त है। सदियों से गाय की पूजा हो रही है। गौ माता की सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है।



