मध्य प्रदेश

हजारों लोगों का पलायन रोकने में विफल प्रशासन, दूसरे प्रदेशों में काम की तलाश में भटक रहे हैं युवक

रिपोर्टर : कुंदन लाल चौरसिया
गौरझामर । मध्यप्रदेश शासन ने बेरोजगार युवकों के लिए कोई भी ऐसी रोजगारोन्मुखी योजना क्रियान्वित नहीं की है जिससे उनका रोजगार मध्यप्रदेश में ही चल सके परिणाम स्वरूप गौरझामर एवं आसपास के गांव के हजारों बेरोजगारों को रोजगार की तलाश में दूसरे प्रदेशों में पलायन करने को मजबूर होना पड़ रहा है आज स्थिति यह है कि गांव के गांव बेरोजगारों से खाली हो गए हैं मध्यप्रदेश में रोजगार की तमाम संभावनाएं होते हुए मध्यप्रदेश शासन इस दिशा में कोई भी कारगर कदम नहीं उठा रहा है बेरोजगारों को स्वयं के रोजगार हेतु कम ब्याज अथवा बिना ब्याज के ऋण देकर छोटे मोटे रोजगार यही खुलवा सकता है इससे बड़ी संख्या में बेरोजगारी को समाप्त किया जा सकता है आज देखा जा रहा है कि बेरोजगारी एक बहुत बड़ी और विकराल समस्या बन गई है इस विस्फोटक और चिंताजनक स्थिति को किसी ने गंभीरता पूर्वक नहीं लिया है आज गांव गांव में रोजगार स्वरोजगार की बहुत जरूरत है और इसके लिए स्कोप भी बहुत अच्छे हैं निरंतर पलायन से गांव गांव में रोजगार स्वरोजगार नहीं खुलने से लोग स्वयं परेशान हो रहे हैं परिणाम स्वरूप दूसरे स्थानों से आकर लोग अपना व्यवसाय उस गांव में करते देखे जा रहे हैं विडंबना और सोचनीय बात तो यह है कि हम चीन के चीनी माल को यहां बेच तो सकते हैं लेकिन उसका उत्पादन हम यहां नहीं कर पा रहे हैं यदि वही माल का उत्पादन हम भारत में भारत के हर क्षेत्र में गांव गांव में कर सके तो हमारी बेरोजगारी क्षण भर में दूर हो जाएगी और हम स्वाबलंबी बन जाएंगे तात्कालिक रूप से तात्कालिक व्यवस्था के अंतर्गत निजी क्षेत्र में यदि शासन खिलौना उद्योग को बढ़ावा देता है तो क्षेत्र में हजारों बेरोजगार युवक इस उद्योग से जुड़ जाएंगे और पूरे देश प्रदेश के बाजार में यहां उत्पादित लकड़ी के सस्ते आकर्षित और टिकाऊ खिलौने लोगों को उपलब्ध होना शुरू हो जाएंगे इनके निर्माण से लेकर विक्रय तक ना जाने कितने हजारों हजार बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा कहना मुश्किल है बस जरूरत इस बात की है कि शासन इस ओर गंभीरता से सोच कर निर्णय लें और खिलौना कारखाने के लिए लाइसेंस वित्तीय सहायता प्रशिक्षण कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करें बता दें कि यहां कुछ वर्षों पूर्व हथकरघा उद्योग व्यापक स्तर पर संचालित हो रहा था लेकिन प्रशिक्षकों की अनियमितताओं लापरवाही मनमानी के कारण यह सफल संचालित गृह उद्योग एन केन प्रकारेण रूप से बंद हो गया आज यदि इसी बंद हथकरघा उद्योग को पुनः चालू किया जाता है तो इसमें सैकड़ों महिलाओं पुरुषों को फिर से रोजगार मिल सकता है विदित हो कि समीपस्थ ग्राम महका विकासखंड केसली जिला सागर मध्य प्रदेश में शासन द्वारा रेशम उद्योग हेतु रेशम केंद्र स्थापित किया था जिसमें रेशम बनाने का कार्य शुरू हो गया था लेकिन तब पता नहीं यह उद्योग सफल अचानक कैसे बंद हो गया यह ऐसा उद्योग हैं जो सहजता से खोला जा सकता हैं और रेशम उद्योग में क्रांति ला सकता हैं स्थानीय स्तर पर रेशम उद्योग में भी सैकड़ों बेरोजगार लोगों को रोजगार मुहैया कराया जा सकता है, पूर्व में यहां धड़ल्ले से एवं बड़े व्यापक रूप से संचालित होने वाला बीडी उद्योग जिसमें गौरझामर सहित पूरे क्षेत्र की हजारों महिलाओं पुरुषों को घर बैठे कुटीर उद्योग का रोजगार मिला हुआ था जिसमें वहअच्छी कमाई कर अपनी रोजी-रोटी सुगमता से चला रही थी बीडी उद्योगपतियों की मनमानी स्वार्थपरतता के चलते यहां स्थापित यह बीड़ी उद्योग बंद होता चला गया आज स्थिति यहां नगण्य है बीड़ी कारखाने बंद होने से यहां चलने वाली गरीबों की आजीविका को बहुत बड़ा झटका लगा है यदि शासन चाहे तो यह बीड़ी उद्योग पुनः फलीभूत हो सकता है क्योंकि यहां बीडी में प्रयोग होने वाला तेंदूपत्ता यहां के जंगलों में बहुतायत में होता है जंगल से तेंदूपत्ता तोड़कर गरीब हरिजन आदिवासी मजदूर पिछडावर्ग के लोग भीषण गर्मी होने के बावजूद जंगल से लाते हैंऔर तेंदूपत्ता वनोपज संग्रह केंद्रपर विक्रय कर अपनी आजीविका चलाते हैं वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक श्री कुंदन लाल चौरसिया निर्मोही ने यहां पत्रकारों को बताते हुए कहा है कि क्षेत्र में रोजगार के बहुत अवसर व संभावनाएं हैं जिसे शासन शीघ्र चाहे तो बड़े पैमाने पर अच्छी सोच के साथ शुरू कर सकता है शासन इस शीघ्र ध्यान दें।

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