माता पिता की सेवा भगवान भजन ही मानव का धर्म है : शैलेंद्र कृष्ण शास्त्री
रिपोर्टर : राजकुमार रघुवंशी
सिलवानी। अंचल के ग्राम पठा पौड़ी में प्रहलाद सिंह रघुवंशी पटेल परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के विश्राम दिवस के अवसर पर कथा व्यास वाल संत राष्ट्रीय प्रवक्ता पंडित शैलेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि माता पिता की सेवा से बड़ा कोई कर्तव्य नहीं है।उन्होंने कहा व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने से बड़े जो भी व्यक्ति हैं उनका भी सम्मान करें। माता पिता की कृपा से ही हमारा जीवन संभव हो पाता है। बाल्यावस्था से लेकर युवावस्था तक आशीष और मार्गदर्शन प्राप्त करके हम अपने जीवन को संभाल पाते हैं। माता पिता अपनी इच्छाओं को नष्ट करके, अपनी संतान की इच्छा को पूरा करते हैं और वह चाहते हैं कि हमसे ज्यादा श्रेष्ठ, उसका जीवन बने उसके जीवन में सभी प्रकार की सुख शांति समृद्धि बनी रहे। सदैव माता-पिता की कामना रहती है कि संतान की उत्तरोत्तर उन्नति होती रहे। इसी बात को ध्यान में रखकर और वही बालक बालिका जब बड़ा हो जाते हैं तो अपने माता-पिता को उचित सम्मान नहीं देते हैं, तब माता-पिता के हृदय पर क्या व्यतीत होगी। इस बात का ध्यान सर्वथा रखना चाहिए।सदैव माता पिता, गुरु का सम्मान करना हमारा परम कर्तव्य है, इस बात को ध्यान में रखकर ,अपने जीवन को जीना चाहिए। यही संस्कार आने वाली पीढ़ियों को हस्तांतरित होते रहें। इस बात का विद्वानों को और वरिष्ठ जनों को चिंतन करना चाहिए सुनिश्चित करना चाहिए। आगे पंडित शैलेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नरकासुर की कथा बताते हुए कहा कि नरकासुर दैत्य ने एक जघन्य पाप किया था कि 16100 राजकुमारियों को, अपने बंदी गृह में बंदी बनाकर रखा था, जोकि भगवान श्री कृष्ण के अनुग्रह से नरकासुर के कारागार से मुक्त हुई और भगवान श्री कृष्ण को उन्होंने अपना सर्वस्व मानकर उन्हें स्वीकार किया। इसी क्रम में भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की मैत्री का वर्णन करते हुए शैलेंद्र कृष्ण ने कहा कि व्यक्ति को वर्तमान समय में मित्रता का धर्म बड़ी पवित्रता के साथ निभाना चाहिए। अपने मित्र के दुख में हमको भी दुखी हो जाना चाहिए, सदैव मित्र की प्रगति के विषय में उसका सहयोग करना चाहिए और मित्रता में परस्पर विश्वास इतना मजबूत हो कि कोई उसे डिगा ना पाए। कभी भी मित्र के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए। मित्र के साथ विश्वासघात करने वाले व्यक्ति से बड़ा पापी कोई हो नहीं सकता। उन्होंने कहा कि इस विकट कलयुग में मित्रता का पवित्रता से संबंध निभाने वाले व्यक्ति बहुत आदरणीय हैं और उनके ऊपर भगवान की परम कृपा है। वह सदाचारी हैं। ऐसे सदाचारी व्यक्तियों पर, भगवान कृपा करते हैं। वह सच्चे कर्मयोगी के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त करके अपने जीवन को धन्य करते हैं। कथा समापन के अवसर पर कथा के आयोजक प्रहलाद सिंह पटेल ने सभी श्रोता सज्जनों का आभार व्यक्त किया। कथा का समापन आरती पुष्पांजलि और प्रसाद वितरण के बाद हुआ।
नगर भंडारे का आयोजन हुआ। सभी भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।



