39 दिनों में वसूले 97.46 करोड़, किसानों को पास की सहकारी समितियों से मिल सकेगा खाद-बीज

रिपोर्टेट : शिवलाल यादव
रायसेन । बकायादार किसानों से लिंकिंग से बैंक में जमा हो जाती है कर्ज की राशि। जिले में चल रही गेहूं और चने की सरकारी खरीदी।जिला सहकारी बैंक के लिए वरदान साबित हो रही है। ऐसा इसलिए की जो ऋण मेहनत करने के बावजूद वसूल नहीं हो पा रहा था।वहीं ऋण अब अपने आप स्वचलित मोड में वसूल हो रहा है। इससे होगा ये कि अब किसानों को खाद, बीज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।उन्हें अपने घरों आसपास की सहकारी समितियों से खाद बीज आसानी से उपलब्ध हो पाएगा । जिले में गेहूं की खरीदी 1 अप्रैल से शुरु हुई है। इस तरह से 9 मई तक 39 दिन पूरे हुए हैं। इस अवधि में कुल 29 हजार किसानों से 97.46 करोड़ रुपए की राशि वसूल हो चुकी है। हालांकि इनमें से 7100 किसान ऐसे भी हैं, जिन्होंने गेहूं की उपज बेचने के बाद खुद ही आगे आकर 21 करोड़ रुपए की ऋण राशि बैंक में जमा कराई है। इनके अलावा 22 हजार 594 किसानों से लिंकिंग के माध्यम से 76.45 करोड़ रुपए की ऋण राशि बैंक में जमा हो गई।
उपार्जन शुरु होने के पहले वसूल हुए महज 33 करोड़ रुपए….
उपार्जन शुरु होने के पहले महज 14 हजार 900 किसानों द्वारा 33 करोड़ रुपए की राशि जमा किसानों द्वारा जमा कराई गई थी। जबकि इसके लिए बैंक कर्मचारियों को किसानों से संपर्क कर ऋण वसूली के लिए काफी मशक्कत करना पड़ी थी। किसानों द्वारा, खाद, बीज सहित दूसरी कृषि कार्यों के लिए बैंक से ऋण लिया जाता है। यही ऋण फसल के बाद उन्हें जमा कराना होता है ।
इस संबंध में आकाश दीप चौहान, प्रभारी सीईओ, जिला सहकारी बैंक, रायसेन का कहना है कि 14900 किसानों से ऋण वसूली हुई है। उपार्जन केंद्रों पर खरीदी शुरु होने के बाद से 97.46 करोड़ की ऋण वसूली हुई है। ये वसूली लिंकिंग के माध्यम से हुई है। जबकि इससे पहले 14 हजार 900 किसानों से 33 करोड़ की ऋण वसूली ही हो पाई थी।



