क्राइम

पासपोर्ट में फर्जी दस्तावेज उपयोग करने पर बॉर्डर पर पकड़े गए युवक को 7 वर्ष का सश्रम कारावास

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह । पासपोर्ट में फर्जी दस्तावेज उपयोग करने पर बॉर्डर पर पकड़ा गए आरोप विश्वजीत विश्वास को हुई 7 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा न्यायालय द्वारा सुनाई गई।
मामले की पैरवी अपर लोक अभियोजक सूरज ताम्रकार द्वारा करते हुए आरोपी-विश्वजीत विश्वास पिता गोलोक विश्वास का मूल नाम विश्वजीत दाम पिता गोलोक दाम जिसकी जन्म 1 मार्च 1993 भओया खाली जिला नडायल बांग्लादेश में हुआ था, जो अपनी 6वीं से 8वीं तक की शिक्षा त्रिमोहनी माध्यमिक विद्यालय ग्राम नयनपुर जिला नडायल बांग्लादेश से की थी, फिर 9वी से 12 तक की शिक्षा टेक्नीकल स्कूल एंड कालेज नडायल बांग्लादेश से की. फिर वर्ष 2012 में मजदूरी करने हेतु पश्चिम बंगाल आ गया, कुछ दिन पश्चिम बंगाल में रहने के बाद वर्ष 2012 में ही ग्राम झलौन जिला दमोह में रहने लगा, वहीं पर डाक्टर रंजन विश्वास के यहां रहने लगा. वहीं से इसने अपना नाम विश्वजीत विश्वास पिता गोलोक विश्वास रख लिया, वर्ष 2018 में मां की तबियत खराब होने से बांग्लादेश जाने हेतु पासपोर्ट की आवश्यकता होने से इसने सर्वप्रथम स्थाई निवासी हेतु स्वप्रमाणित घोषणा पत्र लोक सेवा केन्द्र में एप्लाई किया। जिससे इसका स्थाई निवास प्रमाण पत्र बन गया, जिसके आधार पर विश्वजीत विश्वास ने अन्य दस्तावेज (आधार कार्ड, पेन कार्ड, वोटर आई-डी) तैयार करवा लिये. विश्वजीत विश्वास ने पासपोर्ट के लिये एप्लाई किया, सभी दस्तावेज होने से थाना स्तर पर अनुशंषा कर पासपोर्ट कार्यालय भेज दिया गया. जहां से विश्वजीत विश्वास का पासपोर्ट तैयार हो गया और उसी पासपोर्ट की मदद से बांग्लादेश जा रहा था, बांग्लादेश बार्डर पर इमीग्रेशन विभाग द्वारा शक होने पर विश्वजीत विश्वास से पूंछतांछ की गई. वहां से वापिस भेजकर पासपोर्ट को रिवेरीफाईड हेतु मिनिस्ट्री आफ एक्सटर्नल अफेयर्स रीजनल पासपोर्ट आफिस से जिसके आधार पर जांच कर वर्ष 2021 में थाना तेजगढ़ में अप. क्र. 346/21 धारा 199, 467, 471 विदेशी विष्यक अधि. 1946 की धारा 14 व पासपोर्ट अधि. 1967 की धारा 12 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना मे लिया गया. दौरान विवेचना के आरोपी विश्वजीत विश्वास को गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया गया. मामले में विवेचना पूर्ण होने उपरांत आरोपी के विरूद्ध अभियोग पत्र तैयार कर माननीय न्यायालय पेश किया गया। अभियुक्त के विरूद्ध उसके द्वारा घटना दिनांक 1 जनवरी 12 से दिनांक 16 अक्टूबर 2021 के मध्य लोकसेवा केन्द्र तेन्दूखेड़ा में बांग्लादेशी नागरिक होते हुये भारत में रहकर स्वयं का झूठा घोषणा पत्र स्थानीय निवास प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु प्रस्तुत किया जाना तथा उक्त झूठा घोषणा पत्र देकर स्वयं का स्थानीय निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड व पेनकार्ड बनवाकर कूटरचना करने व उक्त दस्तावेज जो कि फर्जी अथवा कूटरचित है का असल के रूप में उपयोग किये जाने का अपराध प्रमाणित पाया गया है. ऐसी स्थिति में अभियुक्त के कृत्य, अपराध से संबंधित समस्त तथ्यों व परिस्थितियों को व अपराध की गंभीरता को देखते हुये अभियुक्त विश्वजीत विश्वास को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 199,467 व 471 के तहत दण्डनीय अपराध के आरोपों में माननीय न्यायालय सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश दमोह द्वारा 6 सितंबर 24 को 7 वर्ष के सश्रम कारावास से दण्डित किया गया है।
विशेष भूमिका व सराहनीय कार्य- उनि बृजेश पाण्डेय, उनि अभिषेक पटैल, आर. नन्हेभाई, चैनसींग की भूमिका रही थी।

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