धार्मिक

ममता के साथ -साथ समता को सम्भालना बड़ा कठिन है : कमलेश कृष्ण शास्त्री


रिपोर्टर : शिवकुमार साहू
सिलवानी । ग्राम सियरमऊ  में चल रही श्री गणेश पुराण कथा के पंचम दिवस में पंडित कमलेश कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने कहा समता और ममता को सम्भालना थोड़ा कठिन है जो सरल स्वभाव से जान सकते हैं। ये तीन चीज एक साथ जमाना कठिन है समता, नमता और नम्रता। जिसमें समता होगी उसमे ममता कैसे होगी?
ममता तो किसी एक में हो सकती है, ममता कुछ में हो सकती है, अपनों में हो सकती है, अपने शिष्यों में हो सकती है, अपने पुत्र में हो सकती है, अपने वर्ग में हो सकती है, अपने समाज में हो सकती है, अपने देश में हो सकती है। ममता के साथ -साथ समता को सम्भालना बड़ा कठिन है। और फिर जब समता आ गयी (समता मतलब समान) तो फिर नमता को भी पाना बड़ा कठिन है। अब जब समान है तो झुकना क्या?
ये तीन अगोचर वस्तुओं को बड़ी सहजता से जो अभ्यास कर ले वो साधु है। साधु ममता भी सम्भाल लेता है, समता भी सम्भाल लेता है और नमता भी सम्भाल लेता है। सारा अभ्यास इन तीन को ही सम्भालने का है। ममता बढ़ने से जड़भरत जी की समता अंतर्ध्यान् होने लगी। ममता से नमता को पाना आसान है पर समता से नमता को पाना बड़ा कठिन है।

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