आज का पंचाग मंगलवार 13 सितम्बर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
.. ✦••• जय श्री हरि •••✦ …
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 13 सितम्बर 2022
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🐁 13 सितम्बर 2022 दिन मंगलवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि होता है। आज चतुर्थी का श्राद्ध किया जायेगा। आज द्वितीया एवं तृतीया का तर्पण तथा आज से अगले 13 दिन पर्यन्त प्रतिदिन पितरों का तर्पण एवं श्राद्ध करने से वर्षभर सुख बना रहता है। सायंकाल में ललिता देवी यात्रा है। आज अंगारक संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत है। आप सभी सनातनियों को अंगारक संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत एवं श्राद्धपक्ष के द्वितीया एवं तृतीया के श्राद्ध की हार्दिक शुभकामनायें।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए । मंगलवार को बजरंगबली की पूजा का विशेष महत्व है।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
मंगलवार के व्रत से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – आश्र्विन माह
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथिः- तृतीया तिथि 10:38:57 तक तदोपरान्त चतुर्थी तिथि
✏️ तिथि स्वामीः-तृतीया तिथि के स्वामी पार्वती शिव जी हैं तथा चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं।
💫 नक्षत्रः-अश्विनि नक्षत्र 25:39:02 तक तदोपरान्त भरणी नक्षत्र
🪐 नक्षत्र स्वामीः-अश्विनि नक्षत्र के स्वामी केतु हैं तथा भरणी नक्षत्र के स्वामी शुक्र है।
🔊 योगः-ध्रुव 07:40:00 तक तदोपरान्त व्यतिपात
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 10:37 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 10:25 पी एम तक बालव
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 12:16:00 से 01:50:00 बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से गुड़ खाकर जायें
🤖 राहुकालः- आज का राहुकाल 03:23:00 बजे से 04:56:00 तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:27:16
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:41:51
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:32 ए एम से 05:19 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:55 ए एम से 06:05 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:52 ए एम से 12:42 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:21 पी एम से 03:10 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:16 पी एम से 06:40 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:29 पी एम से 07:38 पी एम
💧 अमृत काल : 11:39 पी एम से 01:16 ए एम, सितम्बर 14
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:54 पी एम से 12:40 ए एम, सितम्बर 14
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:36 ए एम से 06:05 ए एम, सितम्बर 14
💦 अमृत सिद्धि योग : 06:36 ए एम से 06:05 ए एम, सितम्बर 14
☄️ ध्रुव योग – अगले दिन सुबह 6 बजकर 18 मिनट तक।
💥 अश्विनी नक्षत्र – अगले दिन सुबह 6 बजकर 58 मिनट तक।
🚓 यात्रा शकुन- दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-हनुमान मंदिर में मसूर की दाल चढाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – तृतीया का श्राद्ध, चतुर्थी का श्राद्ध, संकष्टी, अंगारकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत, श्री ब्रह्मानंद लोधी स्मृति दिवस, मेजर रामास्वामी परमेश्वरन जन्म दिवस, विश्व भाईचारा एवं क्षमादान दिवस, मूल संज्ञक नक्षत्र जारी , पंचक 06:36 तक
✍🏽 विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।
🛕 Vastu tips 🏚️
वास्तुशास्त्र के अनुसार घर के किसी भी कोने में सीलन नहीं होनी चाहिए. वास्तु के मुताबिक, घर में सीलन होने से नकारत्मक ऊर्जा बढ़ती है. इससे स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है इसलिए सीलन की जल्द से जल्द मरम्मत करवानी चाहिए।
ऐसी मान्यता है कि घर के ईशान कोण में अगर गंदगी है और उसे समय रहते साफ न किया जाए, तो इससे घर की ग्रहणी और मुखिया को अक्सर सिर में दर्द की प्रॉब्लम हो सकती है. लोगों को सिर में दर्द रहता है और इसे वे हेल्थ इशू समझकर इलाज करवाते हैं. हो सकता है कि इसके पीछे स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो, लेकिन वास्तु की नजरअंदाजी भी इस स्वास्थ्य संबंधी समस्या का कारण बन सकती है।
यदि घर के किसी भी कमरे का दरवाजा सीढ़ियों की तरफ खुलता हो तो ऐसे कमरे में नहीं सोना चाहिए. वास्तुशास्त्र के अनुसार इससे नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव होता है
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
कम नींद लोगों को बीमार बना रही है, फिजिकली भी और मेंटली भी। सबसे पहले बात अगर इम्यून सिस्टम की करें तो नींद कम लेने से 70% नेचुरल किलर सेल्स घट जाते हैं। एंटीबॉडी का प्रोडक्शन कम होने से इंफेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, अगर आप पांच रात प्रॉपर नींद नहीं ले पाते हैं तो नींद की कमी से इंसुलिन रेजिस्टेंस, स्ट्रेस हॉर्मोन और इंफ्लेमेशन बढ़ता है। नतीजा बॉडी में शुगर का लेवल बिगड़ने लगता है।
कम नींद बना सकती है दिल का मरीज
शिकागो यूनिवर्सिटी की स्टडी के मुताबिक रोजाना सिर्फ दो घंटे की कम नींद, एक हेल्दी इंसान को प्री-डायबिटिक और फिर डायबिटिक स्टेज में पहुंचा सकती है। फिर नींद में ये कमी आर्टरीज को ब्लॉक कर सकती है। जिससे बीपी बढ़ता है, हार्ट पर प्रेशर बढ़ता है, ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले ब्लड वेसेल्स डैमेज होते हैं और फिर 45 की उम्र आते-आते हार्ट अटैक के चांसेज पूरे 200 परसेंट बढ़ जाते हैं।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
त्वचा को बेहतर बनाने के लिए करें तुलसी का इस्तेमाल
स्किन प्रोब्लम्स
स्किन इंफेक्शन को दूर करने में भी तुलसी काफी लाभकारी है।
तुलसी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट स्किन से जुड़ी गंभीर समस्या को दूर करते हैं।
ग्लोइंग स्किन
तुलसी के अंदर प्यूरिफाइंग तत्व पाए जाते हैं। जिसके सेवन से खून की सफाई होती है।
ब्लड प्यूरिफाई होने से स्किन साफ और चेहरे पर ग्लो आता है।
आप तुलसी का सेवन भी कर सकते हैं और इसका फेस पैक बनाकर भी लगा सकते हैं।
स्किन टोनर
तुलसी में हल्दी मिलाकर चेहरे पर पैक के रूप में इस्तेमाल करें।
यह बिल्कुल स्किन टोनर का काम करेगी।
📖 गुरु भक्ति योग 🪔
अर्जुन ने पूछा इस प्रकार जो भक्त सदैव योग युक्त होकर आपकी उपासना विधिपूर्वक करते है और जो वे अव्यक्त पर ब्रह्मा को भजते है, इन दोनों में कौन से योगी श्रेष्ठ है| श्री भगवान बोले जो मेरे विषय मन लगा कर परम श्रद्धापूर्वक मुझको भजते है वे उत्तम योगी है मैं यह मनाता हूँ|
परन्तु जो इन्दिर्यों को सयम करके सर्वत्र समदृष्टि रखने वाले सब प्राणियों के हित में लगे हुए अकथनीय, अव्यक्त, सर्वव्यापी, अचिंतनीय, निर्विकार, अचल ध्रव अक्षर का भजन करते है वे भी मुझे ही प्राप्त होते है, अव्यक्त में जिन का चित आसक्त है, वह कष्ट अधिक पाते है| हे पार्थ! जो प्राणी अपने सब कर्मों को मेरे अर्पण करके मेरी शरण आकर अनन्य भक्ति से मेरा ध्यान करते और पूजते है उन शरण में आय हुए भक्तों का मैं थोड़े ही समय में मृत्यु युक्त संसार सागर से उद्धार कर देता हूँ| मुझमें ही मन रखी मुझमें ही बुद्धि रखो, तब मुझमे ही निवस करोगे इसमें कुछ संदेह नहीं |
हे धनञ्जय यदि इस प्रकार तुम मुझमे अपने चित को करने में समर्थ न हो तो अभ्यास योग द्वारा हमारे पाने के लिए बारम्बार यत्न करो| यदि अभ्यास भी न कर सको तो मेरे उदेश्य से व्रत आदि ही करो, यदि मेरे लिए तुम कर्म करोगो तो भी तुम्हें मुक्ति प्राप्त होगी और यदि ऐसा भी न कर सको तो मन को रोक कर अनन्यभाव से मेरे शरण आओ, और फल की आशा छोड़कर कर्म करो|
क्योँकि अभ्यास से ज्ञान उत्तम है, ज्ञान से ध्यान श्रेष्ठ है, और ध्यान के कर्मों के फल का त्यागना श्रेष्ठ है, त्याग से शांति प्राप्त होती है| जो किसी से द्वेष नहीं करता, सब का मित्र है, दयाधरी है, ममता और अहंकार जिसमे नहीं, सुख दुःख को जो जानता है क्षमावान, संतोषी है सिथर चित इन्द्रियों को वश में रखता है दृंढ निश्चयवन है मुझमे अपना मन और बुद्धि लगाए हुए है ऐसा मेरा भक्त मुझको प्रिय है|
जिसमे न लोगों को भय है न लोगों से जो डरता है ऐसा हर्ष दुष्टों से भय और विषद से रहित है वह मेरा प्रिय है| जो कुछ मिले उसी में संतुष्ट, पवित्र, पक्ष, निष्पक्ष दुःख रहित फल की आशा त्याग कर कर्म करने वाला ऐसा जो मेरा भक्त है वह मुझे प्रिय है| जो लाभ से प्रसन्न न हो, किसी से द्वेष न करे, इष्ट पदार्थ के नष्ट होने से दुखी न हो, किसी वस्तु की इच्छा न करे, शुभ और अशुभ दोनों का त्यागी वह भक्त मेरा प्रिय है|
जिसको शत्रु और मित्र, मान और अपमान, सर्दी और गर्मी, दुःख और सुख, समान है जो वासना से रहित है जो निन्दा और स्तुति को समान जनता है मौनी हो, जो मिले उसी में संतुष्ट जो यह नहीं समझता की यह मेरा है, जो भक्तिमान है वह मेरा प्रिय है| पर जो मुझमे श्रद्धा करके मुझे मानकर इस अमृत के समान कल्याण कारक धर्म का आचरण मेरे उपदेशानुसार करते है वे मुझको अत्यंत प्रिय है |
श्रीमद भगवत गीता के श्लोक में मनुष्य जीवन यापन का सार है | यह ग्रन्थ अन्धकार से लौ की तरफ ले जाता है | हर मुश्किल समय में मार्गदर्शक बनकर मुश्किल परिस्तिथि से बाहर निकाल सकता है |
📗 गीता के 18 अध्याय और 700 गीता श्लोक में कर्म, धर्म, कर्मफल, जन्म, मृत्यु, सत्य, असत्य आदि जीवन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर मौजूद हैं|
✹•⁘••⁘•✹•••⁘•✹•⁘•⁘•✹
⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।

