आज का पंचाग मंगलवार 25 अक्टूबर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
…. ✦••• जय श्री हरि •••✦ …..
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 25 अक्टूबर 2022
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌚 25 अक्टूबर 2022 दिन मंगलवार को भौमवती अमावस्या है। इस अमावस्या को स्नान-दान एवं श्राद्ध हेतु पुण्योदय करवाने वाला माना जाता है। परन्तु मंगलवार पापवार भी माना जाता है इसलिए दुर्भिक्ष एवं अनेकों भय का योग बनता है। भौमवारी अमावस्या में गंगास्नान करने से सहस्रों गायों के दान का फल प्राप्त हो जाता है। आज खण्डसूर्यग्रहण भी लग रहा है। इस ग्रहण का दू:ष्प्रभाव यह है, कि इसके प्रारम्भ के पहले ही इसका दूषित काल आरम्भ हो जाता है। जिसमें प्रत्येक प्रकार के शुभकार्यों एवं भोजनादि का निषेध होता है। ग्रस्तास्त सूर्यग्रहण में सूर्यास्तकाल (गणितपक्ष) को ही ग्रहण का मोक्ष मानकर शुद्धिस्नान के बाद देवकार्य आदि करना चाहिये। परन्तु अगले दिन सूर्योदय के उपरान्त सूर्यदर्शन के उपरान्त भोजन ग्रहण करें। अर्थात सूर्योदय के उपरान्त संक्रान्ति का पूर्ण पुण्यकाल माना जायेगा।।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए । मंगलवार को बजरंगबली की पूजा का विशेष महत्व है।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
मंगलवार के व्रत से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌤️ मास – कार्तिक माह
🌚 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि :- अमावस्या 16.18 तक तत्पश्चात प्रतिपदा
✏️ तिथि के स्वामी :- अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव जी और प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी है।
💫 नक्षत्र – चित्रा 2.17 PM तक तत्पश्चात स्वाति
🪐 नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- चित्रा नक्षत्र के देवता विश्वकर्मा जी एवं चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल देव जी है ।
📣 योग :- विष्कंभ 12.32 PM तक तत्पश्चात प्रीति
👉🏼 योग के स्वामी :- विष्कम्भ योग के स्वामी यम एवं स्वभाव हानिकारक है।
⚡ प्रथम करण : नाग – 04:18 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : किंस्तुघ्न – 03:33 ए एम, अक्टूबर 26 तक बव
🔥 गुलिक काल : – दोपहर 12:00 से 01:30 तक है ।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है। यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 3:00 से 4:30 तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदय – प्रातः 05:56:29
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:15:20
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:46 ए एम से 05:37 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:11 ए एम से 06:28 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:42 ए एम से 12:27 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:57 पी एम से 02:42 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:31 पी एम से 05:55 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:42 पी एम से 06:59 पी एम
💧 अमृत काल : 07:59 ए एम से 09:34 ए एम 04:55 ए एम, अक्टूबर 26 से 06:28 ए एम, अक्टूबर 26
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:40 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 26
⭐ वैधृति योग – आज दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक
☄️ हस्त नक्षत्र – आज दोपहर 2 बजकर 42 मिनट तक
🚕 यात्रा शकुन- दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को लाल वस्त्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भौमवती अमावस, देवपितृकार्य अमावस, खण्डग्रास सूर्यग्रहण अमावस्या (सूर्यग्रहण के कारण सुबह 04:23 से सूतक लगेगा इसलिए या तो 04:23 से पहले मनाएँ या बाद में मनाएँ तो सूखा सिद्धा निकालकर )।
✍🏽 विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
. आज यानी 25 तारीख मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा के दिन वर्ष 2022 का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा मनाई जाती है लेकिन इस बार सूर्य ग्रहण के कारण गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन नहीं वरन 26 अक्टूबर 2022 को मनाई जाएगी।
इसी कारण भाई दूज का पर्व अब 27 अक्टूबर को मनाया जायेगा ।
साल का पहला सूर्य ग्रहण 30 अप्रैल को लगा था। आज लगने वाला सूर्य ग्रहण आंशिक सूर्यग्रहण होगा और यह आंशिक सूर्यग्रहण भारत के बहुत से हिस्सों में दिखाई देगा।
भारत में सूर्यग्रहण दिखाई देने से इसका सूतक काल मान्य होगा। जिसके कारण मदिरों के कपाट बंद रहेंगे और कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जायेगा ।
यह सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार आइसलैंड से दोपहर 2 बजकर 29 मिनट पर शुरू होगा, और सांयकाल 6 बजकर 20 मिनट पर अरब सागर में समाप्त हो जायेगा ।
यह सूर्य ग्रहण भारत में सांय लगभग 4 बजकर 29 मिनट से प्रारम्भ होगा और सांय 5 बजकर 59 मिनट पर समाप्त होगा ।
सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले से शुरू हो जाता है, ऐसे में दिवाली की रात से ही सूतक शुरू हो जा रहा है अर्थात आज 25 अक्टूबर को सूर्योदय के समय से ही सूतक मान्य होगा ।
सूर्य ग्रहण के दौरान खाना खाने की, काटने, छीलने, सिलाई करने, जमीन खोदने का काम करने की मनाई होती है, शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
तंबाकू स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। लेकिन, यह चूहों को घर से भगाने के लिए आपके काम आ सकता है, क्योंकि इसमें नशीले पदार्थ मौजूद होते हैं जिसे खाने से चूहे बेहोशी की हालत में आ जाते हैं। इसके लिए एक कटोरी में चुटकी भर तम्बाकू लें। इसमें 2 छोटी चम्मच देसी घी मिलाएं। इसे अच्छी तरह से मिला लें। फिर बेसन या आटा डालकर गोलियां तैयार कर लें। इसे उस जगह रखें जहां से चूहों का आना-जाना होता है। ऐसा करने से चूहे इसे खाएंगे और बेहोशी की हालत में आते ही घर से बाहर निकल जाएंगे।
पुदीना चूहों को पुदीने की महक बर्दाश्त नहीं होती है। अगर आप बिल के बाहर अगर पुदीने की पत्तियां रख देंगे तो चूहे बिल के बाहर आ जाएंगे और दोबारा आपके घर नहीं आएंगे।
🩺 आरोग्य संजीवनी 🍶
☝🏼 दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण
मौसम का बदलाव और आतिशबाजी दोनों के मिले जुले प्रभाव से दिवाली के आस-पास के समय में दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ना आम बात है। वहीं देश के अन्य हिस्सों में भी बारूद जलने से हवा में प्रदूषण बढ़ जाता है।
🫵🏼 बढ़ सकती है सांस लेने में परेशानी
इस मौसम में बाकी लोग तो सामान्य तरीके से रह लेते हैं लेकिन अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जिसमें सांस नलिकाओं पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए अस्थमा के मरीज खांसी, नाक बंद या बहना, छाती का कड़ा होना, रात और सुबह के समय सांस लेने में तकलीफ की समस्याओं के जल्दी शिकार हो जाते हैं। लेकिन कुछ सावधानियां बरती जाएं तो इन परेशानियों से बचा जा सकता है।
🪔 गुरु भक्ति योग 🕯️
आचार्य श्री गोपी राम ने अपनी नीति में कई ऐसी बातें बताई हैं जिन्हें यदि जीवन में उतार लिया जाए तो आप कभी धोखा नहीं खा सकते हैं और न ही आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है। हमनें अपनी नीति में मानव समाज के लगभग हर पहलू के बारे में बताया है। उन्होंने अपने नीतिशास्त्र में यह भी बताया है कि घर को स्वर्ग कैसे बनाया जा सकता है और कौन से घर श्मशान के समान होते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम के इन विचारों के बारे में।
🗣️ श्लोक (बारहवां अध्याय)
न विप्रपादोदककर्दमानि, न वेदशास्त्रध्वनिगर्जितानि।
स्वाहा-स्नधास्वस्ति-विवर्जितानि, श्मशानतुल्यानि गृहाणि तानि।।
इस बारहवां अध्याय श्लोक के अनुसार, वह घर जहां ब्राह्मणों के चरण कमल को धोया नहीं जाता, जहा वैदिक मंत्रो का जोर से उच्चारण नहीं होता और जहां भगवान को और पितरो को भोग नहीं लगाया जाता वह घर एक श्मशान है।
दरअसल, आचार्य श्री गोपी राम नीति इस श्लोक के जरिए कहते हैं कि जिन घरों में ब्राह्मणों का आदर-सम्मान नहीं होता, जहां वेद पुराणों की ध्वनि नहीं गूंजती, जिस घर में अग्निहोत्र अर्थात हवन आदि शुभकर्म नहीं होते, वैसे घरों में नकारात्मक शक्तियों का वास होता है। उनका जीवन हमेशा दुख और तकलीफों से घिरा रहता है। ऐसे घरों को श्मशान के समान समझना चाहिए।
वहीं जिस घर में नियमित तौर पर यज्ञ, कर्म हवन आदि किया जाता है और ब्राम्हणों का आदर सत्कार किया जाता है, वहां पर सकारात्मक शक्तियों का संचार होता है। ऐसे घर को स्वर्ग माना जाता है और यहां देवी-देवाताओं का भी वास होता है।
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।

