मध्य प्रदेश

अंगद की तरह पैर जमाकर बैठा बशरोल हक मंसूरी अन्तर्वेद -मुरवारी सचिव की कार्यप्रणाली विवादित, फिर भी थमा दी दो पंचायतों की जिम्मेदारी

जिम्मेदारों ने मूंद ली आंखे
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । अपनी कार्यप्रणाली को लेकर काफी समय तक अखबारों की सुर्खियों बने रहे अन्तर्वेद-मुरवारी सचिव बशरोल हक मंसूरी एक बार फिर जनपद सहित क्षेत्र में चर्चा का केन्द्र बने हुये है और चर्चाएं इस बात की चल रही है कि उक्त सचिव अन्तर्वेद में काफी लंबे समय से पदस्थ है और अन्तर्वेद में इनके द्वारा जो काम किये गये वह समस्त ग्रामवासी जानते है और कई बार इस मामले में सचिव के विरुद्ध शिकायत भी की गई। इसके बाद भी इसका स्थानांतरण अन्यंत्र नहीं किया गया। वहीं निर्वाचन आयोग द्वारा संबंधित अधिकारियों से इस बावद् जानकारी मांगी गई थी और यह स्पष्ट निर्देश दिये गये थे कि जो भी सचिव तीन वर्ष से एक ही पंचायत में पदस्थ है उनकी अन्यंत्र पदस्थाना की जाये और इस संबंध में संबंधित विभाग को सूचित किया जाये लेकिन भ्रष्टाचार की नाव में सवार तथाकथित अधिकारियों ने न तो उक्त भ्रष्टाचार सचिव का स्थानांतरण ही किया और न ही उसे किसी अन्यंत्र पंचायत में स्थानांतरण किया गया। निर्वाचन आयोग की आंख में धूल झोंकते हुये तथाकथित अधिकारियों ने अन्तर्वेद.मुरवारी सचिव बशरोल हक मंसूरी को उपकृत करते हुये एक और पंचायत की जिम्मेदारी दे दी गई है जहां पर सचिव की मनमौजी चरम सीमा पर है और इसके द्वारा शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं में जमकर पलीता लगाया जा रहा है।
सोख पिट और वाटर हार्वेस्टिंग पर जमकर खेला
सूत्रों ने बताया कि उक्त भ्रष्टाचार सचिव के द्वारा दोनों पंचायत में जमकर आर्थिक अनियमित्ताएं की गई और सोख पिट और वाटर हार्वेस्टिंग के नाम पर जमकर शासकीय पैसों की होली खेली गई। जानकारी यह भी मिली है कि सोख पिट और वाटर हार्वेस्टिंग के नाम पर राशि आहरित कर ली गई जबकि मौके पर वे काम हुये ही नहीं है। लिहाजा इस मामले में मय प्रमाणों के साथ ग्रामीणों द्वारा जल्द ही शिकायत किये जाने की तैयारी की गई है।
राज्य निर्वाचन कार्यालय भेजी गई शिकायत
त्रि-स्तरीय पंचायत निर्वाचन की घोषणा के बाद राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा के द्वारा सभी कलेक्टरों को इस बावद् पत्र जारी किया गया था कि जो भी कर्मचारी एक ही स्थान पर तीन वर्ष एक ही स्थान पर पदस्थ है उसकी पद स्थापना अन्यंत्र की जाये लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी पत्र को धत्ता बताते हुये अधिकारियों द्वारा न तो उक्त भ्रष्टाचार सचिव की जानकारी दी गई और न ही उसका स्थानांतरण अन्य पंचायत में किया गया। लिहाजा इस संबंध में एक शिकायत राज्य निर्वाचन आयोग, अरेरा हिल्स भोपाल के समक्ष प्रेषित की गई है। वहीं मामला सामने आने के बाद जल्द ही सचिव बशरोल हक मंसूरी पर कार्यवाही होना तय माना जा रहा है। चूंकि इस मामले में जहां राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश की अवहेलना की गई है वहीं दूसरी ओर कई वर्षों से एक ही पंचायत में होने के बाद भी स्थानीय अधिकारियों द्वारा यह बात छिपाई गई और उसे अभयदान प्रदान करते हुये दूसरी पंचायत मुरवारी की भी जिम्मेेदारी दे दी गई जहां पर नियमों को तार-तार करते हुये सचिव द्वारा शासकीय पैसों की जमकर होली खेली जा रही है।

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