धान कटाई, मिसाई से लेकर अन्य कृषि कार्यों में किसानों को परेशानी नहीं दे पाते महंगी मशीन का किराया
पारंपरिक कृषि को दे रहे महत्व, मजदूरों की कमी के चलते सक्षम किसान मशीन से करा रहे मिसाई व सफाई कार्य
अधिक लागत व तुरंत करना होता मशीन कार्य का भुगतान
सिलवानी । मशीनों से कृषि कार्य में भले ही समय कम लगता हो, लेकिन लागत अधिक आती है। छोटे व मध्यमवर्गीय किसान इसे वहन करने में सक्षम नहीं होते हैं। आलम यह है कि छोटे व मध्यम वर्गीय किसान पुश्तैनी कृषि कार्य को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। धान कटाई से लेकर मिसाई सहित अन्य सभी कृषि कार्य पारंपरिक रूप से ही कर रहे हैं।
मौजूदा समय में तहसील में धान मिसाई का कार्य जारी है। साधन संपन्न किसानों को छोड़कर शेष कृषक पारंपरिक रूप से धान की मिसाई का कार्य कर रहे हैं। दरअसल, पारंपरिक रूप से धान की मिसाई करने से किसानों को लागत कम आती है। पालतु मवेशियों के लिए चारा भी मिल जाता है। धान की साफ-सफाई भी बेहतर ढंग से हो जाती है, जबकि मशीनों से मिसाई के कार्य में नुकसान होता है। थ्रेसर में धान कम मात्रा में खराब होता है तो हार्वेस्टर से धान का अधिक नुकसान होता है।.
मशीनों से कार्य करने पर तुरंत देना होता है भुगतान
किसानों के अनुसार मजदूरों की समस्या के चलते यदि मशीनों से कृषि कार्य करवाया भी गया तो उन्हें त्वरित भुगतान देना होता है। जो कि छोटे किसानों के लिए संभव नहीं होता है। मौजूदा समय में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम में वृद्धि हो चुकी है। ऐसे में मशीनों से कृषि कार्य काफी महंगा हो चुका है। आर्थिक रूप से सक्षम और साधन संपन्न किसान ही मशीनों से कृषि कार्य ज्यादा करवाते हैं।




