ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 02 फरवरी 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 02 फरवरी 2023

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
आप सभी पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा की वर्षा होती रहे।।
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति) गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए । गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं । इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन – उत्तरायण
🌦️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – माघ माह
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि-द्वादशी 04:26 PM तक उसके बाद त्रयोदशी
✏️ तिथि स्वामी – त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव हैं। त्रयोदशी के देवता हैं शिव है।
💫 नक्षत्र : आर्द्रा – 06:18 ए एम, फरवरी 03 तक
🪐 नक्षत्र स्वामी – आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी राहु है। तथा आर्द्रा नक्षत्र के देवता – शिव है।
प्रथम करण : बालव – 04:26 पी एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 05:41 ए एम, फरवरी 03 तक
⚜️ दिशाशूल – गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है।
🔥 गुलिक काल : गुरुवार का शुभ गुलिक काल 09:52 ए एम से 11:13 ए एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 13:30 बजे से 15:00 बजे तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:34:38
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:26:32
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:24 ए एम से 06:16 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:50 ए एम से 07:09 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:13 पी एम से 12:57 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:24 पी एम से 03:07 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:58 पी एम से 06:25 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:01 पी एम से 07:20 पी एम
💧 अमृत काल : 07:05 पी एम से 08:53 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:08 ए एम, फरवरी 03 से 01:01 ए एम, फरवरी 03
सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:18 ए एम, फरवरी 03 से 07:08 ए एम, फरवरी 03
❄️ रवि योग : 06:18 ए एम, फरवरी 03 से 07:08 ए एम, फरवरी 03
☄️ वैधृति योग- आज दोपहर 12 बजकर 13 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏻 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शिवलिंग का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/प्रदोष व्रत (पंचांग भेद), भीष्म द्वादशी, राजनेता दशरथ देब जन्म दिवस, राजस्थान के मुख्यमंत्री मोहन लाल सुखाड़िया पुण्य तिथि, गांधीवादी, स्वतंत्रता सेनानी राजकुमारी अमृत कौर जन्म दिवस, भारतीय न्यूज एजेंसी प्रेस ईस्ट ऑफ इंडिया स्थापना दिवस, ग्राउंडहॉग दिन – अमेरिका, अंतर्राष्ट्रीय आर्द्रभूमि दिवस, श्रीलंका राष्ट्रीय दिवस, नेशनल टेटर टोट डे, विश्व आर्द्रभूमि दिवस, वर्ल्ड रीड लाउड डे, विश्व विसर्जन दिवस, नेशनल ग्राउंडहॉग डे, वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह), विश्व वेटलैण्ड डे ( world wetland day)
🗺️ Vastu Tips 🗽
कई बार हम कड़ी मेहनत करते हैं लेकिन इसके बाद भी मन मुताबिक कामयाबी नहीं मिल पाती है। दरअसल, हमारी जीवन में वास्तु शास्त्र का काफी महत्व है। वास्तु हमारी हर चीजों को प्रभावित करती है। ऐसे में वास्तु शास्त्र के हिसाब से चलने से हमारी जिंदगी की कई चीजों में बड़ा सुधार हो सकता है। तो चलिए आज वास्तु शास्त्र में आचार्य श्री गोपी राम से जानते हैं कि सोते समय किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए।
सोते समय कभी भी बिस्तर पर पर्स नहीं रखें आपको बता दें कि सोते समय कुछ चीजों को अपने पास रखने से व्यक्ति कई तरह की आर्थिक और मानसिक परेशानियों से घिरा रहता है। वास्तु के अनुसार, सोते समय अपने पास कभी भी पर्स या बटुआ नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से हर समय पैसों से संबंधित चिंता बनी रहती है और मानसिक तनाव पैदा होता है। आप सोते समय पैसों को किसी अलमारी या अन्य किसी सेफ जगह पर रख सकते हैं।
तकिए के नीचे भूलकर भी न रखें ये चीजें वास्तु शास्त्र के मुताबिक, किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, जैसे मोबाईल फोन, या घड़ी भी अपने पास रखकर नहीं सोना चाहिए। अपनी पढ़ाई- लिखाई से संबंधित कोई चीज, अखबार या किताब को अपने तकिए के नीचे नहीं रखना चाहिए। इससे विद्या का अपमान होता है। वास्तु की माने तो अपने सिरहाने के पास या बेड के नीचे कभी भी जूते-चप्पल नहीं रखने चाहिए। इससे सेहत पर नेगेटिव इफेक्ट पड़ता ।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
डायबिटीज में पपीता खाने के फायदे पपीता का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 60 है। यानी कि यह आपका शुगर तेजी से नहीं बढ़ाएगा। इसके अलावा डायबिटीज में पपीता खाने के पीछे एक कारण और यह है कि इसमें कुछ ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स हैं जो कि इंसुलिन सेल्स को तेजी से बढ़ावा देते हैं और शुगर मेटाबोलिज्म को तेज करते है। यानी की पपीता की मदद से आपके शरीर का इंसुलिन प्रोडक्शन बढ़ सकता है जिससे शरीर को भोजन से अतिरिक्त चीनी और फैट अवशोषित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही ये डायबिटीज के मरीजों में कब्ज की समस्या को दूर करता है और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
डायबिटीज में पपीता खाने का सही तरीका डायबिटीज में पपीता खाने का आपको एक सही तरीका अपनाना होगा नहीं तो आपका शुगर तेजी से बढ़ भी सकता है। जी हैं, जैसे कि की मानें तो, डायबिटीज के रोगियों को प्रति दिन एक कप से ज्यादा पपीता नहीं खाना चाहिए। इससे शरीर में शुगर की मात्रा तेजी से बढ़ सकती है। साथ ही अगर ये पपीता आप नाश्ते के बाद और दिन में 10 बजे के करीब खाएं तो आपके लिए और फायदेमंद हो।
🩻 आरोग्य संजीवनी 🩸
क्या है कारण यह संक्रामक रोग संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति अगर खुली हवा में खांसता है, तो बैक्टीरिया आसपास की हवा में तरल पदार्थ की सूक्ष्म बूंदों के रूप में फैल जाता है और आसपास मौजूद व्यक्ति को संक्रमित करता है। यह संक्रमण इस बात पर भी निर्भर करता है कि सामने मौजूद व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कितनी मजबूत है। यानी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति को यह जल्दी संक्रमित करता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह संक्रमित व्यक्ति से हाथ मिलाने या उससे गले मिलने से नहीं फैलता है। न ही यह कुष्ठ रोग से संक्रमित गर्भवती मां से उसके होने वाले बच्चे में फैलता है।
दो प्रकार हैं प्रमुख यह रोग मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। पहला ट्यूबरक्युलॉइड और दूसरा लेप्रोमेटस। कुष्ठ रोग के ज्यादातर प्रकार इन्हीं दोनों के मिश्रण होते हैं। इन दोनों ही प्रकारों में त्वचा पर घाव उभरता है। लेप्रोमेटस को अधिक गंभीर माना जाता है, जिसमें शरीर के प्रभावित हिस्से का मांस बढ़ने लगता है। यानी वहां गांठ बनने लगती है।
क्या हैं लक्षण? कुष्ठ रोग के शुरुआती लक्षणों में प्रभावित हिस्से में सुन्नपन महसूस होना, स्पर्श महसूस न होना, सुई या पिन के चुभने जैसा महसूस होना, तापमान में बदलाव महसूस न होना, त्वचा पर दबाव डालने पर भी कुछ महसूस न होना, त्वचा के रंग में बदलाव आना, त्वचा पर फोड़े या चकत्ते बनना, त्वचा पर दर्द रहित फफोले बनना आदि लक्षण उभरते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
महाभारत में द्रौपदी एक अहम् किरदार है। द्रौपदी के जीवन और चरित्र को समझना बहुत ही कठिन है। उन्हें तो सिर्फ कृष्ण ही समझ सकते थे। द्रौपदी श्रीकृष्ण की मित्र थी। मित्र ही मित्र को समझ सकता है। आज हम आपको द्रौपदी की वे पांच गलतियां बताना चाहते हैं जिसके कारण महाभारत की संपूर्ण कहानी बदल गई। यदि द्रौपदी ये गलतियां नहीं करती तो आज इतिहास कुछ और होता।
स्वयंवर में कर्ण का अपमान करना : द्रौपदी कर्ण को चाहती थी, लेकिन जब उसे पता चला कि कर्ण तो सूत पुत्र है तो उसने अपना इरादा बदल दिया। उसने पहली बात तो यह कि कर्ण को स्वयंवर की प्रतियोगिता में भाग नहीं लेने दिया और दूसरा यह कि उसने कर्ण को बुरी तरह अपमानित किया। यदि वह ऐसा नहीं करती तो परिणाम कुछ ओर होता। हालांकि द्रौपदी के पिता ने द्रोणाचार्य की मृत्यु की प्रतिज्ञा ली थी और उनका वध अर्जुन के अलावा और कोई नहीं कर सकता था इसलिए वे चाहते थे कि उनकी पुत्री का विवाह अर्जुन से ही हो।
पांडवों की पत्नी बनना स्वीकार करना : अर्जुन ने स्वयंवर की प्रतियोगिता को जीत लिया था लेकिन किन्हीं भी परिस्थितियों में द्रौपदी यदि पांचों पांडवों की पत्नी बनना स्वीकार नहीं करती तो आज इतिहास कुछ ओर होता। द्रौपदी कुंति के कहने या स्वयंवर के बाद युधिष्ठिर और वेद व्यासजी के कहने पर पांचों से विवाह करना स्वीकार किया था।
दुर्योधन का अपमान : द्रौपदी ने ही इंद्रप्रस्थ में युधिष्ठिर के राज्याभिषेक के समय दुर्योधन को कहा था, ‘अंधे का पुत्र भी अंधा।’ बस यही बात दुर्योधन के दिल में तीर की तरह धंस गई थी। यही कारण था कि द्यूतकीड़ा में उनसे शकुनी के साथ मिलकर पांडवों को द्रौपदी को दांव पर लगाने के लिए राजी कर लिया था। द्यूतकीड़ा या जुए के इस खेल ने ही महाभारत के युद्ध की भूमिका लिख दी थी जहां द्रौपदी का चिरहरण हुआ था।
युद्ध के लिए प्रेरित करना : अपनी चिरहरण के बाद द्रौपदी ने पांडवों से कहा कि यदि तुम दुर्योधन और उनके भाइयों से मेरे अपमान का बदला नहीं लेते हो तो धिक्कार है तुम्हें। द्रौपदी ने पांडवों से कहा कि मेरे केश अब तब तक खुले रहेंगे जब तक कि दुर्योधन के खून से इन्हें धो नहीं लेती। उस समय द्रौपदी ने ऋतु स्नान नहीं था। ऐसे में भीम ने कसम खाई कि मैं दुर्योधन की जांघ को गदा से तोड़ दूंगा और दु:शासन की छाती को चीरकर उसका रतक्तपान करूंगा। चीरहरण के दौरान कर्ण ने द्रौपदी को बचाने की जगह कहा, ‘जो स्त्री पांच पतियों के साथ रह सकती है, उसका क्या सम्मान।’ यह बात द्रौपदी को ठेस पहुंचा गई और वह हर समय अर्जुन को कर्ण से युद्ध करने के लिए उकसाती रही।
जयद्रथ की बुरी नजर : जुए में अपना सब कुछ गंवा देने के बाद जब पांडव वनवास की सजा काट रहे थे, तब दुर्योधन के जीजा जयद्रथ की बुरी नजर द्रौपदी पर पड़ी। उसने द्रौपदी के साथ जबरदस्ती की और उसे रथ पर ले जाने का दुस्साहस भी किया। लेकिन एन वक्त पर पांडव आ गए और उसे बचा लिया। पांडव वहीं पर जयद्रथ का वध करना चाहते थे लेकिन द्रौपदी ने पांडवों को ऐसा करने से तो रोक दिया जोकि उसकी बड़ी गलती थी। द्रौपदी ने जयद्रथ के सिर के बाल मुंडवाकर पांच चोटियां रखने की सजा दी और सभी जनता के सामने उसका घोर अपमान करवाया। जयद्रथ किसी को अपना चेहरा दिखाने के लायक नहीं रहा और हर पल अपमान को सहता रहा। इस अपमान का बदला जयद्रथ ने चक्रव्यूह में फंसे अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु को मौत के घाट उतारकर लिया।
तो यह थे द्रौपदी की महाभरत को रचने में खास भूमिका। हालांकि द्रौपदी का उपरोक्त के अलावा और भी बहुत कुछ योगदान रहा है। इनमें से ऐसे कई कार्य है जिसके लिए उनकी प्रशंसा की जानी चाहिए।
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।
त्रयोदशी तिथि शास्त्रों में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति महापुरूष होता है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है और अनेक विषयों की अच्छी जानकारी रखने वाला होता है। यह व्यक्ति काफी विद्वान होता है तथा अन्यों के प्रति दया भाव रखने वाला एवं किसी की भी भलाई करने हेतु सदैव तत्पर रहने वाला होता है । इस तिथि के जातक समाज में काफी प्रसिद्धि हासिल करते ही हैं।

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