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गणगौर व्रत कब है? जानें महत्व, पूजा विधि और लाभ

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦•••  *_जय श्री हरि_*  •••✦
🧿 गणगौर व्रत कब है? जानें महत्व, पूजा विधि और लाभ
🥏 *_HIGHLIGHTS_*
♦️ जानें कब है गणगौर पूजा
♦️ क्या है इस पूजा का महत्व
♦️ इस विधि से करें गौरी-शिव की पूजा
🌸 चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी कि नवरात्रि के तीसरे दिन गणगौर का त्योहार मनाने की परंपरा है. इसे गणगौर तृतीया भी कहा जाता है. यह पर्व खासकर राजस्थान में मनाया जाता है. इसके साथ मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में ये पर्व मनाया जाता है. बता दें, इस बार गणगौर पर्व दिनांक 24 मार्च यानी कि कल मनाया जाएगा. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं,इस व्रत का खास बात यह है कि इस व्रत को पति से गुप्त रखा जाता है. कई जगहों पर इसे सौभाग्य तीज के नाम से भी जानते हैं. यह पर्व मां पार्वती को समर्पित है.
🪶 जानें गणगौर पूजा का शुभ मुहूर्त
गणगौर पूजा दिनांक 23 मार्च को शाम 06 बजकर 20 मिनट से लेकर अगले दिन दिनांक 24 मार्च को शाम 04 बजकर 59 मिनट तक रहेगा.
🍱 जानें क्या है गणगौर पूजा सामग्री
एक लकड़ी का साफ पट्टा, कलश, काली मिट्टी, होलिका की राख, गोबर ,इत्र, रंग, घी, फूल, आम के पत्ते, नारियल, सुपारी, गणगौर के वस्त्र, पानी से भरा कलश, दीपक, कुमकुम, अक्षत, मेंहदी, बिंदी, काजल, गेहूं, बांस की टोकरी, चुनरी, सिक्के, घेवर, हलवा, चांदी की अंगुठी, चुड़ी आदि
🤴🏻 पति से छिपाकर करती हैं पूजा
गणगौर के पर्व में महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी की मूर्तियां बनाती हैं और उनकी दूर्वा और फूलों से पूजा करती हैं। चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का दिन सबसे खास होता है। इस पूजा की सबसे खास बात ये है कि महिलाएं इस पूजा को अपने पति से छिपाकर करती हैं और न ही उन्हें पूजा का प्रसाद खाने को देती हैं। दरअसल इस पर्व की कथा के अनुसार ये व्रत छिपाकर ही रखा जाता है।
👉🏻 इस तरह मनाएं गणगौर पूजा
गणगौर पूजा में सबसे ज्यादा महत्व आखिरी दिन का माना जाता है. इस दिन व्रत रखी जाती है और गणगौर पूजा से एक दिन पहले महिलाएं तालाब, सरोवर में जाकर अपनी पुजी हुईं गणगौर को पानी पिलाती हैं. उसके बाद उनका विसर्जन कर दिया जाता है.
❄️ इस विधि से करें गणगौर पूजा
👉🏻 1. इस दिन गौरीजी जको सरोवर पर ले जाकर स्नान कराएं.
👉🏻 2. इस दिन गौरी-शिव को स्नान कराकर उन्हें वस्त्र और आभूषण पहनाएं.
👉🏻 3. पूरे विधि-विधान के साथ गौरी और शिव की पूजा करें.
👉🏻 4. गौरी जी को सुहाग की चीजें अर्पित करें.
👉🏻 5. गणगौर व्रत की कथा सुनें.
👉🏻 6. गौरी पर चढ़ाए सिंदूर को अपनी मांग में भरें.
👉🏻 7. जो अविवाहित कन्याएं व्रत रख रही हैं, वह गौरी जी को प्रणाम कर आशीर्वाद लें.
👉🏻 8. इस दिन गौरी और शिव को सजाकर पालने में  बिठाएं और उनकी शोभायात्रा निकालें और उनका विसर्जन करें.
👉🏻 9. उसके बाद आप व्रत खोल सकते हैं.
✍🏼 जानें क्या है इस पूजा का महत्व
गणगौर शब्द गण और गौर दो शब्दों से मिलकर बना है। जहां ‘गण’ का अर्थ शिव और ‘गौर’ का अर्थ माता पार्वती से है। दरअसल, गणगौर पूजा शिव-पार्वती को समर्पित है। इसलिए इस दिन महिलाओं द्वारा भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी की मूर्तियां बनाकर उनकी पूजा की जाती है। इसे गौरी तृतीया के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से महिलाओं को अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भगवान शिव जैसा पति प्राप्त करने के लिए अविवाहित कन्याएं भी यह व्रत करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव के साथ सुहागन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देने के लिए भ्रमण करती हैं। महिलाएं परिवार में सुख-समृद्धि और सुहाग की रक्षा की कामना करते हुए पूजा करती हैं।

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