कृषिमध्य प्रदेश

जिले में 11 हजार के करीब निराश्रित गोवंश, जिले में 90 गोशालाओं का काम शुरू, 46 पूर्ण, संचालन सिर्फ 17 का

सड़कों पर आवारा घूम रहा गोवंश तेजी से जिले के हाईवों पर हो रहे सड़क हादसे
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन । रायसेन जिले में ग्यारह हजार से ज्यादा गौवंश निराश्रित होकर सड़कों पर घूम रहा है।जिससे जिले से गुजरे तीनों नेशनल हाइवे पर आए दिन सड़क हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है।
आरईएस विभाग द्वारा वर्तमान में 90 गोशालाओं का निर्माण कराया जा रहा है ।इनमें से 46 गोशालाएं बनकर तैयार हो चुकी हैं ।17 गोशालाओं का ही संचालन हो पा रहा है सरकारी स्तर पर। 9 निजी संस्थाएं भी संचालन कर रही हैं गोशालाओं का। 2717 निराश्रित गोवंश पल रहा है संचालित गोशालाओं में।
54 हजार 280 रुपए अनुदान मिलता है……
जिले में 17 सरकारी और नौ निजी गोशालाओं में कुल दो हजार 714 निराश्रित गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। सरकारी गोशालाओं में एक हजार 762 और निजी में 952 गोवंश रखा जा रहा है। इन सभी गोवंश के लिए हर माह औसतन 16.28 लाख रुपए अनुदान दिया जाता है। लेकिन यह राशि गोवंश के संरक्षण के लिए पर्याप्त नहीं है। एक दिन का अनुदान भी 54 हजार रुपए से अधिक होता है।
जिले में 90 गोशालाओं का निर्माण किया जा रहा है, 46 तो बनकर तैयार हैं, लेकिन गोवंश का रख-रखाव 17 में ही हो पा रहा है। एनजीओ स्तर से संचालन के प्रयासों में ज्यादा सफलता नहीं मिली है। पंचायतें भी रुचि नहीं लेती हैं। शासन का अनुदान कम होने से लोग आगे नहीं आते हैं। गो-अभयारण्य बेहतर विकल्प हो सकता है। डॉ. पीके अग्रवाल, उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, रायसेन
इन दिनों तो गर्मी है इससे दोपहर में थोड़ी राहत है। बरसात और सर्दियों में दिन भर सडक़ों पर निराश्रित गोवंश से चलना मुश्किल हो जाता है।
धर्मेंद्र राठौर, राहगीर
एक सप्ताह पहले हमने हरे चने खरीदे और थैला टांगकर टमटम पर बैठने लगे, पीछे से गाय ने थैला छीन लिया, पूरी सब्जी सडक़ पर बिखर गई। आने-जाने में भी परेशानी होती है।
सुषमा देवी पटेल नागरिक
चारे-पानी का कोई बजट नहीं, कर्मचारी भी नहीं….
निर्मित गोशालाओं का संचालन करने के लिए आवश्यक चारे पानी और दाने का प्रबंध स्थानीय स्तर पर हो नहीं पाता है। शासन से प्रति गोवंश प्रतिदिन के हिसाब से 20 रुपए का अनुदान मिलता है। इसमें 15 रुपए चारे के लिए और पांच रुपए दाने के लिए होते हैं। वर्तमान समय में भी 15 रुपए में दो किलो भूसा आ रहा है। जबकि एक गोवंश को औसतन पांच से छह किलो भूसे की आवश्यकता एक बार में होती है। इसलिए पंचायत एवं समाजसेवियों के स्तर पर गोशालाओं के संचालन की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
निराश्रित गोवंश के बेहतर प्रबंधन के नाम पर जिले में मौजूदा समय में 90 गोशालाओं का निर्माण कराया जा रहा है। इनमें से 46 का निर्माण कार्य पूर्ण भी हो चुका है।लेकिन संचालन महज 17 का हो पा रहा है। ऐसे में अधिकांश निराश्रित गोवंश शहर, हाइवे पर डेरा डाले रहता है या खेतों मेें फसलें उजाड़ता रहता है। कई बार सडक़ों पर दुर्घटनाओं का कारण भी बनता है।
एक गोशाला पर 35 लाख खर्च….
जिले में 11 हजार से अधिक निराश्रित गोवंश है। व्यापक पैमाने पर फसलें उजाडऩे की शिकायतों के बीच कांग्रेस सरकार में इनके लिए व्यवस्थित गोशालाओं के निर्माण का कार्य शुरू कराया गया था। मनरेगा के तहत बनने वाली एक गोशाला पर औसतन 35 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसमें पेयजल और छाया के इंतजाम सहित भूसा और दाना रखने का प्रबंधन भी शामिल होता है। लेकिन जिस उम्मीद के साथ गोशालाओं का निर्माण कराया गया था, वह पूरा नहीं हो पा रहा है।तहसील रायसेन की मेहगांव में घटिया गौशाला का निर्माण हुआ है।ग्रामीणों ने घटिया गौशाला निर्माण की जांच कराए जाने की अपील कलेक्टर अरविंद दुबे ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के ईई रायसेन से की है।
गोशाला निर्माण की कार्ययोजना अमल में लाने से पहले उनके संचालन की पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई। इसलिए 16.10 करोड़ रुपए की लागत से 46 गोशालाओं का करीब एक साल पूर्व निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने के बावजूद उनका संचालन नहीं हो पा रहा है। इनमें से महज 17 गोशालाओं का ही संचालन हो पा रहा है।
गो अभयारण्य ज्यादा कारगर उपाय हो सकता है…..
अधिकारियों का मानना है कि पर्याप्त जंगल क्षेत्र होने से जिले में निराश्रित गोवंश के व्यवस्थापन के लिए गो-अभयारण्य कारगर विकल्प हो सकता है। चारों तरफ नदियां हैं और जंगल पहाड़ भी पर्याप्त हैं, यहां चारा भी मिल सकता है और पानी का भी इंतजाम होता रहेगा। इससे सभी को लाभ हो सकता है।

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