प्रायवेट स्कूल और दुकानदार की साठगांठ से बाजार में मिल रही मंहगी किताबे

रिपोर्टर : बृजेन्द्र कुशवाहा
साईखेडा । मप्र सरकर द्रारा सरकारी और प्रायवेट स्कूलो में बच्चो की अच्छी शिक्षा और बौधिक शिक्षा के लिऐ विषय विशेषज्ञ की राय से एनसीआरटी पैटर्न राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की पुस्तके बच्चो को लाई है लेकिन प्रायवेट संस्थानो द्वारा निजी संस्करण दिल्ली, आगरा, मेरठ, अलीगढ की महंगी पुस्तके स्कूल की नर्सरी से बारहवी तक लगाई जिससे पालक अभिभावक खासे परेशान है । महंगाई के इस दौर में मजदूर अभिभावक बच्चो को अपने जेवर गिरवी रखकर पढा रहे है ।बडे दुकानदार और स्कूल संचालक कमीशन खोरी के चक्कर में प्रायवेट संस्करण की महंगी किताब लगा रहै है जिससे पालक परेशान है । स्कूल संचालक और कमचारी और निजी दुकान के नाम की परची और जाने की बोल रहै है । जिससे बाकी दुकानदार हालाकान है। बडे व्यापारियो द्वारा नगर में चंद व्यापारियो को पुस्तक देकर छोटे व्यापारियो को ठेंगा दिखा रहे है जिससे छोटे व्यापारी महगी किताब होने और कम लागत में काम नही कर पा रहे है । निजी संस्थान नियमो को ताक पर रखकर अनुभहीन शिक्षको से अध्यापन कार्य करा रहे है स्कूल में न खैल मैदान ,न स्वचछता का ध्यान है न संस्कार है । शासन के निर्देश है कि स्कुल में डीएड, बीएड की डिग्री वाले ही शिक्षक हो लेकिन ऐसा कुछ नही है बारहवी पास या कालेज से वापिस आये बेरोजगारो से कम वेतन में काम चला रहे है। नागरिकों ने प्रशासन से जांच कर निजी संस्करण की किताब बंद कराकर एनसीआरटी की किताबे लगवाये जिससे पालक अभिभावक, छोटे दुकानदारो को राहत मिल सके ।



