उमरियापान स्थित क्यूली तालाब में शिवलिंग की प्रतिमा बनी आस्था का केंद्र
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । उमरियापान स्थित क्यूली तालाब भगवान भोले नाथ की शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई हैं। बुजुर्गों ने बताया कि यह शिवलिंग कब से विद्यमान हैं इसके बारे में कोई नहीं बता सकता जब भी देखा गया हैं तो शिवलिंग पहले से यहाँ स्थापित हैं । वही सावन महीने में महिलाओं एवं पुरूषों द्वारा प्राचीन काल में स्थापित शिवलिंग में दूध, दही, शहद से जल अभिषेक श्रद्धालुओं द्वारा किया जाता है । उमरियापान निवासी राधेश्याम चौरसिया एवं मनोज चौरसिया ने बताया कि हम भोलेनाथ के दरबार में प्रतिदिन सुबह शाम दरबार की साफ सफाई के साथ साथ बेलपत्र, शमी, आंवला आदि फलदार के वृक्षारोपण कर रहे हैं । सनातन धर्म के अनुसार सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की पूजा- अर्चना और साधना के लिए समर्पित है। सावन के महीने में पूरे विधि-विधान के साथ भगवान शिव की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि सावन के महीने में जो भी शिव भक्त भगवान भोलेनाथ की पूजा करता है उसके जीवन में हमेशा सुख और समृद्धि आती है। सावन के महीने में शिवलिंग के जलाभिषेक का विशेष महत्व होता है। इस माह भगवान शिव को बेलपत्र, शमी, दूध, दही, शहद शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है । संक्रांति के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि जो भी भक्त सावन मास में भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा अर्चना करता है. भगवान भोले नाथ उनकी सभी मनोकामना पूर्ण होती है। सावन का महीना भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय है । सोमवार का व्रत करने वाले भक्तों की सारी मनोकामनाएं भोलेनाथ पूरी करते है ।



