धार्मिकमध्य प्रदेश

जमीन मंदिर की, सरबराहकार ने किया 1 करोड़ का गबन, मंदिर के नाम कमा रहे लाखों, खर्च धेला भर नहीं

ग्राम पंचायत परसेल में बने राधा-कृष्ण मंदिर का मामला
सरपंच ने खुद को घोषित किया है सरबराहकार
मंदिर की 20 एकड़ जमीन पर अघोषित रूप से कब्जा

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । ढीमरखेड़ा तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम परसेल में काफी प्राचीन मंदिर राधाकृष्ण और महादेव मंदिर है जो की ग्रामीणों की आस्था का केन्द्र है लेकिन उक्त मंदिर देखरेख के अभाव में जीर्णक्षीर्ण हो रहा है। और जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। चूंकि जो व्यक्ति सरबराहकार की भूमिका में है उसको मंदिर से किसी तरह का कोई मतलब नहीं है मात्र अपना लाभ ही दिखाई देता है।
उल्लेखनीय है कि मौजा- परसेल, रा.नि.मं- उमरियापान, प.ह.नं. 20 तहसील-ढीमरखेडा, जिला कटनी स्थित खसरा नं. क्रमश:- 232, 532 एवं 555 है जिसका रकवा क्रमश:- 6.07 हे, 0.95 हे. एवं 0.59 हे है। इस प्रकार मंदिर की कुल 8 हे. भूमि जो श्री शंकर जी एवं राधाकृष्ण मंदिर ठाकुर जी मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज है। जिसके अध्यक्ष कलेक्टर कटनी है। ग्रामीणों ने बताया कि उक्त मंदिर की जमीन बटाईदार सिकमी में दी जाती है जिससे प्रतिवर्ष चार लाख रूपये प्राप्त होते है। उक्त राशि कहा जाती, उसका क्या उपयोग, उपभोग होता है ग्रामीणों को इस तरह की जानकारी नहीं दी जाती है और जानकारी मांगने पर परसेल सरंपच के द्वारा कहा जाता है कि सरबराहकार है और मैं स्वतंत्र हूं, किसी को हिसाब नहीं दूंगा।
स्मरण रहे कि उक्त मंदिर की जमीन की देखरेख पहले रामनारायण खरे के द्वारा की जाती है और उनके द्वारा मंदिर की देखरेख तथा समय-समय पर जो भी धार्मिक कार्य होते है उनका आयोजन भी किया जाता है लेकिन उनके निधन के बाद जालसाजी कर वर्तमान सरपंच राजेन्द्र खरे पिता स्व. ब्रजबिहारी खरे सरबराहकार के रूप में अपना नाम दर्ज करा लिया। यही नहीं सरबराहकार के द्वारा वर्ष 1996 से 2023 तक लगभग एक करोड़ की राशि का गबन भी किया गया है। इस संबंध में सिकमी के रूप में प्राप्त हुई राशि धार्मिक कार्य में खर्च न होकर व्यक्तिगत रूप से खर्च की गई है और मंदिर की जमीन से अपने एशो-अराम किये जा रहे है।
धार्मिक कार्यक्रमों से कोई सरोकार नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि उक्त मंदिर मढिया है जहां पर गांव सहित आसपास के ग्रामीणों की आस्था का केन्द्र है। चूंकि उक्त मंदिर काफी प्राचीन है लेकिन सरबराहकार के द्वारा लोक न्यास अधिनियम को तार-तार किया जा रहा है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यदि जमीन मंदिर की है और उससे आय हो रही है तो सबसे पहला काम मंदिर में उक्त राशि का उपयोग- उपभोग करना होता है। ग्रामीणों ने बताया कि सरबराहकार के द्वारा किसी तरह के धार्मिक कार्य नही किये जाते साथ ही उसके द्वारा गुण्डागर्दी करते हुये गांव वालों को मंदिर में किसी भी तरह के धार्मिक आयोजन भी नहीं करने दिये जाते है। सरबराहकार के उपरोक्त कृृत्यों से ग्रामीणों की आस्था को कुठाराघात पहुंच रहा है।
ग्रामीणों को मंदिर में जाने से करता है मना
ग्रामीणों ने बताया कि सरबराहकार के द्वारा प्राचीन मंदिर में आने जाने से रोका जाता है। साथ ही साथ ही वहां पर किसी भी तरह के धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं दी जाती है जिससे एक ओर तो लोक न्याय अधिनियम 1951 के मूलभूत सिद्धांत तार-तार हो रहे है तो वहीं दूसरी ग्रामवासियों की आस्था के साथ खिलवाड़ भी किया जा रहा है।
मंदिर के पुजारी को मात्र 400 रूपये वेतन
सरबराहकार के द्वारा उक्त मंदिर की 20 एकड़ जमीन से प्रतिवर्ष 4 लाख रूपये की आय अर्जित की जाती है जिसके एवज में मंदिर के पुजारी को मात्र 400 रूपये प्रतिमाह की दिये जाते है जो कि वर्तमान में मंहगाई के दौर में न्यूनतम है और यह राशि किस मापदंड के आधार पर दी जाती है यह समझ से परे है। चूंकि उक्त मंदिर की संपत्ति शासकीय है जिसके अध्यक्ष स्वयं कलेक्टर है बावजूद इसके मंदिर के पुजारी को 400 रूपये वेतन देना उसका मजाक उड़ाने जैसा है। ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर पुराजी की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वे भीख मांगकर और बीड़ी बनाकर अपना भरण पोषण करते है। सरबराहकार के द्वारा उक्त जमीन से जो भी आय हो रही है वह अपने स्वयं व्यक्तिगत कार्य में उपयोग किया जा रहा है मंदिर में किसी तरह की कोई राशि नहीं लगाई जा रही है।
अब तक 1 करोड़ का गबन
ग्रमाीणों ने बताया कि वर्ष 1996 से लेकर वर्तमान तक राजेन्द्र प्रसाद खरे सरबराहकार की भूमिका में रहकर कार्य करता आ रहा है और मंदिर के नाम से 20 एकड़ भूमि दर्ज है जिससे प्रतिवर्ष 4 से 5 लाख रूपये की आमदानी हो रही है। इस प्रकार मंदिर की कुल 08 हे. भूमि जो श्री शंकर जी एवं राधाकृष्ण मंदिर ठाकुर जी मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज है। जिसके अध्यक्ष कलेक्टर कटनी है। लेकिन उक्त मंदिर में किसी भी तरह का ट्रस्ट गठन नहीं होने के कारण मात्र एक व्यक्ति विशेष राजेन्द्र खरे के द्वारा ही संपूर्ण राशि का उपयोग-उपभोग किया जा रहा है। चूंकि मंदिर के नाम पर जो भूमि है वह कृषि और सिंचित भूमि है। लिहाजा प्रतिवर्ष उसकी सिकमी राशि बढ़ जाती है लेकिन इस संबंध में न तो प्रशासन को किसी तरह की कोई जानकारी दी जाती है और न ही उसका हिसाब-किताब दिया जाता है। इस संबंध में ग्रामीणो ने कई बार राजेन्द्र खरे से जानकारी चाही लेकिन उसके द्वारा हिसाब देने से स्पष्ट मना कर दिया जाता है और यह कहा जाता है कि मैं सरबराहकार हूं और मैं किसी को भी मंदिर की जमीन से जो भी आय होती है उसकी जानकारी नहीं दूृंगा।
प्रशासन जानबूझकर बना बेपरवाह
मौजा- परसेल, रा.नि.मं- उमरियापान, प.ह.नं.-20 तहसील- ढीमरखेडा, जिला कटनी स्थित खसरा नं. क्रमश:- 232, 532 एवं 555 है जिसका रकवा क्रमश:- 6.07 हे, 0.95 हे. एवं 0.59 हे है। इस प्रकार मंदिर की कुल 08 हे. भूमि जो श्री शंकर जी एवं राधाकृष्ण मंदिर ठाकुर जी मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज है, जिसके अध्यक्ष कलेक्टर कटनी है साथ ही उक्त मंदिर की जमीन से प्रतिवर्ष 4 से 5 लाख रूपये की आय हो रही है। बावजूद इसके प्रशासन जानबूझकर बेपरवाह बना हुआ है और मंदिर के नाम पर 20 एकड़ जमीन होने के बाद भी ट्रस्ट का गठन नहीं किया जा रहा है और एक व्यक्ति को ही सरबराहकार के भूमिका में कार्य करने दिया जा रहा है जिससे म.प्र.लोक न्याय अधिनियम 1951 के मूलभूत सिद्धांत ही तार-तार हो रहे है। साथ ही साथ मंदिर की जमीन से जो आय हो रही है उसका उपयोग-उपभोग धार्मिक कार्य में नहीं किया जा राह है।
कई बार हुई शिकायत लेकिन कारवाई नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में पूर्व में भी कलेक्टर, मंत्री, विधायक, ढीमरखेड़ा अनुविभागीय अधिकारी सहित अनेक नेताओं और अधिकारियों से शिकायत की गई बावजूद इसके कोई हमारी शिकायत पर कार्यवाही नहीं की जा रही है। ग्रामीणों के द्वारा इस संबंध में शिकायत सौंपकर यह मांग की गई कि उक्त भूमि मंदिर के नाम पर है जिसके अध्यक्ष कटनी कलेक्टर है उसमें एक ट्रस्ट का गठन कर दिया जावे जिससे मंदिर की जमीन से जो भी आय होती है उसका सही उपयोग-उपभोग हो सके। विभिन्न शिकायतें होने के बाद भी आज दिनांक तक प्रशासन के द्वारा इस संबंध में किसी तरह का कोई निर्णय नहीं लेना प्रशासन की घोर लापरवाही को दर्शित करता है।
शासन अपने अधिपत्य में ले मंदिर
मौजा-परसेल स्थित श्री शंकर जी एवं राधाकृष्ण मंदिर ठाकुर जी मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज है साथ ही साथ मंदिर के नाम पर 20 एकड़ कृषि भूमि है जिसके अध्यक्ष कलेक्टर कटनी है बावजूद इसके एक व्यक्ति के द्वारा उपयोग-उपभोग किया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस संबंध में कई शिकायतें प्रेषित कर मांग की है कि उक्त मंदिर की जमीन को शासन अपने अधिपत्य में लेकर अपने हिसाब से मंदिर का संचालन करें।

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