ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग बुधवार, 04 अक्टूबर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 04 अक्टूबर 2023

04 अक्टूबर 2023 दिन बुधवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है। आज छठवें दिन का श्राद्ध किया जाएगा। आज चन्द्रषष्ठी व्रत (चंद्रोदय व्यपिनी) है। चंद्रोदय रात्री 09:20 बजे होगी। आज सर्वार्थसिद्धि योग एवं रवियोग भी है। आज सूर्यदेवता हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में रात्री 05:00 बजे चले जाएंगे। आप सभी सनातनियों को “छठवें दिन के श्राद्ध” की हार्दिक शुभकामनायेँ।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – आश्विन मास कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि 05:41 AM तक उपरांत सप्तमी
✏️ तिथि स्वामी – षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र स्कन्द कुमार है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र रोहिणी 06:29 PM तक उपरांत म्रृगशीर्षा
🪐 नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। तथा रोहिणी नक्षत्र स्वामी ग्रह चंद्र है।
📢 योग : सिद्धि योग 06:43 AM तक, उसके बाद व्यातीपात योग 05:45 AM तक, उसके बाद वरीयान योग
प्रथम करण : गर – 05:31 पी एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 05:41 ए एम, अक्टूबर 05 तक
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:30:53 AM
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:22:28 PM
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:38 ए एम से 05:27 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:02 ए एम से 06:15 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 02:08 पी एम से 02:55 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:04 पी एम से 06:28 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:04 पी एम से 07:17 पी एम
💧 अमृत काल : 03:14 पी एम से 04:51 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:46 पी एम से 12:34 ए एम, अक्टूबर 05
सर्वार्थ सिद्धि योग : पूरे दिन
❄️ रवि योग : 06:29 पी एम से 06:16 ए एम, अक्टूबर 05
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को कांस्य पात्र में हरे फल रखकर भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/षष्ठी श्राद्ध, विश्व पशु कल्याण दिवस, विश्व पशु दिवस, लेसोथो स्वतंत्रता दिवस, आचार्य रामचंद्र शुक्ला जयंती, भूतपूर्व राज्यपाल सरला ग्रेवाल जयन्ती, विश्व पशु दिवस, स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा जन्म दिवस, राष्ट्रीय अखंडता दिवस, भारतीय सेना का एक सैनिक बाबा हरभजन सिंह शहीद दिवस, विश्व अंतरिक्ष सप्ताह, 4-10 अक्टूबर
✍🏼 विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय हैं तथा नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
उत्तर दिशा में खिड़की बनवाने से क्या होता है?
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, उत्तर दिशा को भी सकारात्मक ऊर्जा वाली दिशा माना जाता है। उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा कहा जाता है। इस दिशा की तरफ खिड़की का निर्माण करवाने से आपके घर, ऑफिस, बिल्डिंग पर कुबेर भगवान की कृपा दृष्टि बनी रहती है और आपके घर में कभी पैसों की कमी नहीं होती है।
वास्तु के अनुसार,उत्तर दिशा में खिड़कियां बनवाना अच्छा रहता है और इन खिड़कियों को प्रतिदिन थोड़ी देर के लिए अवश्य खोल देना चाहिए। इससे घर और ऑफिस में सकरात्मक ऊर्जा का वास रहता है और नकरात्मक शक्तियां दूर रहती है। दरअसल, घर में सूरज की रौशनी और हवा-पानी का आना बेहद जरूरी होता है। तो वास्तु शास्त्र में ये थी चर्चा उत्तर दिशा में खिड़की बनवाने के बारे में। उम्मीद है आप इस वास्तु टिप्स को अपनाकर जरूर लाभ उठाएंगे।
▶️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
बुखार में कौन सी दवाई खानी चाहिए?
बुखार में कभी भूलकर भी दवाई नहीं खानी चाहिए बुखार क्यों आता है इसको पहले समझना पड़ेगा बुखार क्यों आ रहा है हमारा शरीर गर्म क्यों हो रहा है यह परमात्मा की कृपा है बुखार आना ।
बुखार आना मतलब हम स्वास्थ्य की तरफ बढ़ रहे हैं यह पहचान है सृष्टि का सिद्धांत है शरीर को हिट करके शरीर की बीमारियां खत्म करना शरीर के कचरा साफ करना शरीर के कचरो को भस्म करना जालना यह शरीर स्वयं कर रहा है आपकी मदद कर रहा है ।
और आप इसमें रुकावट अगर डालेंगे तो आप बहुत बड़ा गलती कर रहे हैं बीमारी खुशखबरी है आप शरीर की मदद करिए आप नारियल पानी पीजिए आप हरी पत्तियों के जूस कीजिए मौसमी का जूस दीजिए सब्जियों का जूस दीजिए सिर्फ जूस दीजिए आपकी बॉडी स्वस्थ हो जाएगी ।
और आप तुरंत अगर बुखार उतारना चाहते हैं ढाई मीटर का सूती कपड़ा ले लीजिए और उसे चार फोल्ड कर लीजिए ठंडे पानी में गिला करके और पेट पर चारों तरफ लपेट लीजिए आधा घंटा के लिए बुखार उतर जाएगा।
या उसे 1 इंच का करके पेट पर दो-दो मिनट पर रखिए पानी निचोड करके बदल लीजिए फिर रखिए फिर बदल दीजिए फिर रखिए इतना करके 20-25 मिनट में बुखार उतर जाएगा हो सके तो गले पर माथे पर भी कपड़े गिला करके निचोड़ कर रखें।
🩻 आरोग्य संजीवनी 💊
क्या कम पानी पीने से कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है कम पानी पीना आपके कोलेस्ट्रोल लेवल को प्रभावित कर सकता है। दरअसल, पानी डिटॉक्सीफाइंग एजेंट भी है जो कि एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को बढ़ा सकता है। डिहाइड्रेशन लिवर को खून में अधिक कोलेस्ट्रॉल जारी करने के लिए प्रेरित करता है और खून से कोलेस्ट्रॉल को खत्म करने की शरीर की क्षमता में बाधा डालता है। इससे कोलेस्ट्रोल बढ़ता है और ये हार्ट अटैक के खतरे को पैदा करता है।
दिल को हेल्दी रखने के लिए पानी पीना क्यों जरूरी है दिल को हेल्दी रखने के लिए पानी पीना बेहद जरूरी है। दरअसल, पानी दिल के काम काज को बढ़ावा देता है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसके अलावा ये ऑक्सीजन के सर्कुलेशन को तेज करने के साथ दिल के तमाम चैंबर्स को हेल्दी रखने में मदद करता है। इसके अलावा ये खून के फिल्ट्रेशन में बाकी अंगों को मदद करता है जिससे हाई बीपी से बचाव होता है और दिल की सेहत सही रहती है।
🏈 गुरु भक्ति योग 🏈
कल का शेष
भगवान शिव तथा उनके अवतारों को मानने वालों को शैव कहते हैं. शैव में शाक्त, नाथ, दसनामी, नाग आदि उप संप्रदाय हैं. महाभारत में माहेश्वरों (शैव) के चार सम्प्रदाय बतलाए गए हैं: (i) शैव (ii) पाशुपत (iii) कालदमन (iv) कापालिक. शैवमत का मूलरूप ॠग्वेद में रुद्र की आराधना में हैं.
राजपूतकाल (700-1200 ई०) में शैव धर्म साहित्य तथा अभिलेख, दोनों इसकी पुष्टि करते हैं। कई राजपूत शासक शिव के अनन्य उपासक थे तथा उन्होंने विशाल तथा भव्य मन्दिरों का निर्माण करवाया था। चन्देल युग में खजुराहों का सुप्रसिद्ध कंदारिया महादेव मन्दिर निर्मित हुआ।
शैव मत का मूल रूप ॠग्वेद में रुद्र की आराधना में है। 12 रुद्रों में प्रमुख रुद्र ही आगे चलकर शिव, शंकर, भोलेनाथ और महादेव कहलाए। इनकी पत्नी का नाम है पार्वती जिन्हें दुर्गा भी कहा जाता है। शिव का निवास कैलाश पर्वत पर माना गया है।
शिव के अवतार : शिव पुराण में शिव के भी दशावतारों के अलावा अन्य का वर्णन मिलता है जो निम्नलिखित हैं- 1.महाकाल, 2.तारा, 3.भुवनेश, 4. षोडश, 5.भैरव, 6.छिन्नमस्तक गिरिजा, 7.धूम्रवान, 8.बगलामुखी, 9.मातंग और 10. कमल नामक अवतार हैं। ये दसों अवतार तंत्रशास्त्र से संबंधित हैं।
शिव के अन्य ग्यारह अवतार : 1.कपाली, 2.पिंगल, 3.भीम, 4.विरुपाक्ष, 4. विलोहित, 6.शास्ता, 7.अजपाद, 8.आपिर्बुध्य, 9.शम्भु, 10.चण्ड तथा 11.भव का उल्लेख मिलता है।
इन अवतारों के अलावा शिव के दुर्वासा, हनुमान, महेश, वृषभ, पिप्पलाद, वैश्यानाथ, द्विजेश्वर, हंसरूप, अवधूतेश्वर, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, ब्रह्मचारी, सुनटनतर्क, द्विज, अश्वत्थामा, किरात और नतेश्वर आदि अवतारों का उल्लेख भी ‘शिव पुराण’ में हुआ है, जिन्हें अंशावतार माना जाता है।
शैव ग्रंथ : वेद का श्‍वेताश्वतरा उपनिषद, शिव पुराण (, आगम ग्रंथ, और तिरुमुराई
शैव तीर्थ : बारह ज्योतिर्लिंगों में खास काशी, बनारस, केदारनाथ, सोमनाथ, रामेश्वरम, चिदम्बरम, अमरनाथ) और कैलाश मानसरोवर
शैव संस्कार : 1.शैव संप्रदाय के लोग एकेश्वरवादी होते हैं। 2. इसके संन्यासी जटा रखते हैं। 3. इसमें सिर तो मुंडाते हैं, लेकिन चोटी नहीं रखते। 4. इनके अनुष्ठान रात्रि में होते हैं। 5. इनके अपने तांत्रिक मंत्र होते हैं। 6.यह निर्वस्त्र भी रहते हैं, भगवा वस्त्र भी पहनते हैं और हाथ में कमंडल, चिमटा रखकर धूनी भी रमाते हैं। 7. शैव चंद्र पर आधारित व्रत उपवास करते हैं। 8.शैव संप्रदाय में समाधि देने की परंपरा है। 9.शैव मंदिर को शिवालय कहते हैं जहाँ सिर्फ शिवलिंग होता है। 10.यह भमूति तीलक आड़ा लगाते हैं।
शैव साधु-संत : शैव साधुओं को नाथ, अघोरी, अवधूत, बाबा, ओघड़, योगी, सिद्ध आदि कहा जाता है।
इति समाप्ति
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⚜️ आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो भगवान कार्तिकेय का पूजनकरें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी कार्य में सफलता प्राप्ति केलिये षष्ठी तिथि के सायंकाल में शिवमन्दिर में छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा परबाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं एवं सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।
जिस व्यक्ति का जन्म षष्ठी तिथि को होता है, वह व्यक्ति सैर-सपाटा पसंद करने वाला होता है। इन्हें देश-विदेश घुमनेका कुछ ज्यादा ही शौक होता है अत: ये काफी यात्राएं करते रहते हैं। इनकी यात्रायेंमनोरंजन और व्यवसाय दोनों से ही प्रेरित होती हैं। इनका स्वभाव कुछ रूखा जैसा होताहै और छोटी छोटी बातों पर भी लड़ने को तैयार हो जाता हैं।

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