Aaj ka Panchang आज का पंचांग सोमवार, 09 अक्टूबर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 09 अक्टूबर 2023
09 अक्टूबर 2023 दिन सोमवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष कि दशमी तिथि है। आज दशवें दिन का श्राद्ध किया जाएगा। जिनके भी पिता-दादा-परदादा अर्थात पितर लोग अब इस संसार में नहीं हैं, और जिनकी वर्ष भर के किसी भी मास, किसी भी पक्ष के दशमी तिथि में मृत्यु हुई हो उन सभी का आज ही श्राद्ध किया जाएगा। आप सभी सनातनियों को “दशवें दिन के श्राद्ध” की हार्दिक शुभकामनायें।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – आश्विन मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – आश्विन माह के कृष्ण पक्ष दशमी तिथि 12:37 PM तक उपरांत एकादशी
✏️ तिथि स्वामी – दशमी तिथि के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र आश्लेषा 05:45 AM तक उपरांत मघा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्लेषा नक्षत्र का स्वामी बुध है। तथा नक्षत्र के देवता नागों के राजा शेषनाग को माना गया है।
🔔 योग – सिद्ध योग 06:50 AM तक, उसके बाद साध्य योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 12:36 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 01:52 ए एम, अक्टूबर 10 तक
🔥 गुलिक काल : – सोमवार का शुभ (गुलिक काल) दोपहर 1:30 से 3 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दर्पण देखकर, दूध पीकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह -7:30 से 9:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:11:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:49:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:40 ए एम से 05:29 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:04 ए एम से 06:18 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:45 ए एम से 12:32 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:05 पी एम से 02:52 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:58 पी एम से 06:23 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:58 पी एम से 07:12 पी एम
💧 अमृत काल : 03:57 ए एम, अक्टूबर 10 से 05:45 ए एम, अक्टूबर 10
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:44 पी एम से 12:33 ए एम, अक्टूबर 10
🌍 पृथ्वी लोक की भद्रा- 09 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 37 मिनट तक
🚕 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को श्वेत वस्त्र भेंट करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – एकादशी श्राद्ध, भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) दिवस, भारतीय प्रादेशिक सेना दिवस, गायक रवीन्द्र जैन स्मृति दिवस, सामाजिक कार्यकर्ता गोपबंधु दास जयन्ती, साहित्यकार राजा लक्ष्मण सिंह जन्म दिवस, (नूरजहाँ) का पुत्र मुराद बख़्श जन्म दिवस, युगांडा स्वतंत्रता दिवस, विश्व डाक दिवस
✍🏼 विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात धनदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
⛺ Vastu tips 🌋
साफ-सफाई में संपूर्ण ध्यान दिया जाता है लेकिन घर के पीछे बनी गली व छत पर नहीं। जबकि यह भी साफ-सफाई में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
यदि आप ड्राइंग रूम में कुछ परिवर्तन कर रहे हैं तो भारी सामान उत्तर या पूर्व दिशा में नहीं रखें। उसे दक्षिण या फिर पश्चिम की दीवार से लगा कर रखना शुभ होता है।
यदि आप टीवी लाए हों या पुराने टीवी को ही सही जगह रखना है तो इसे उत्तर की ओर ही लगाएं। दरअसल टीवी देखते समय आप का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
बुक सेल्फ, अलमारी अथवा अन्य वजनी सामान दक्षिण दिशा या फिर पश्चिम की दीवार से लगा कर रखना शुभ होता है। इससे घर में समृद्धी आएगी।5. ड्राइंग रूम में व बच्चों के कमरे में हल्के रंग के पर्दे लगाना शुभ है। वहीं दीवार पर चटकदार लाल, नीला अथवा अन्य कोई गहरा कलर लगाएं।
➡️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
नारियल तेल और कपूर डैंड्रफ को गायब कर सकता है। दोनों एंटीबैक्टीरियल और एंटी फंगल गुणों से भरपूर है। तो, नारियल तेल लें और इसे हल्का सा गर्म करें। इसमें कपूर को कूटकर और इसका पाउडर बनाकर मिला लें। अब इस तेल को अपने स्कैल्प पर लगाएं, हल्के हाथों से मसाज करें और फिर 1 घंटा इसे ऐसे ही छोड़ दें। इसके बाद अपने बालों को शैंपू कर लें।
नीम और नींबू का रस आपके स्कैल्प को साफ करने में मददगार है। आपको करना ये है कि नीम को पीस लें और फिर इसमें नींबू का रस मिला लें। अब इन दोनों को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। फिर इस पेस्ट को स्कैल्प पर लगाएं और 1 घंटा इसे ऐसे ही छोड़ दें। इसके बाद बालों को व़श कर लें। आप पाएंगे कि सिर से डैंड्रफ का सफाया हो चुका होगा और खुजली और इंफेक्शन भी कम होगी।
🩺 आरोग्य संजीवनी 🩻
खर्राटों से मिलेगी राहत, घरेलू नुस्खे
रात में हल्दी दूध पीएं
गुनगुने पानी से
दालचीनी पाउडर लें
इलायची वाला
गुनगुना पानी पीएं
गर्म पानी में शहद-ऑलिव ऑयल पीएं
सोने से पहले स्टीम लें।
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📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
एकादशी श्राद्ध में इन चीजों का करें दान, जानें आचार्य श्री गोपी राम से इसका महत्व व कैसे करें यह अनुष्ठान
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष में पड़ने वाले एकादशी श्राद्ध का विशेष महत्व है। यह श्राद्ध उन पूर्वजों को याद करने के लिए किया जाता है जिनका निधन एकादशी तिथि को हुआ था। खास बात तो यह है कि इसमें शुक्ल और कृष्ण पक्ष दोनों ही एकादशियां शामिल हैं। ग्यारस श्राद्ध इसी संस्कार का दूसरा नाम है। इस साल पितृ पक्ष एकादशी श्राद्ध 9 अक्टूबर दिन सोमवार को मनायी जाएगी। पितृ पक्ष एकादशी तिथि 9 अक्टूबर को 12:36 अपराह्न शुरू होगी और 10 अक्टूबर को 03:08 अपराह्न समाप्त होगी।
एकादशी श्राद्ध का महत्व एकादशी श्राद्ध अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने और उन्हें याद करने का एक सार्थक तरीका है। मान्यता है कि इसको करने से दिवंगत लोगों की आत्मा को शांति मिलती है। इसके अलावा बाद के जीवन में उनका निरंतर अस्तित्व सुरक्षित रहता है। कहते हैं कि एकादशी श्राद्ध जीवित और मृत लोगों के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करता है।
एकादशी श्राद्ध का तरीका एकादशी श्राद्ध पर पितरों के लिए तर्पण करने के साथ ही ब्राह्मणों को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। इस दिन पर गाय, कौवे, कुत्ते और चींटियों को भी भोजन खिलाना चाहिए। तिल, अन्न, चावल और दूध का दान महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि कोई चाहे तो किसी पुरोहित की सहायता से पिंडदान संस्कार करा सकता है।
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⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।


