ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 19 अक्टूबर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 19 अक्टूबर 2023

19 अक्टूबर 2023 दिन गुरुवार को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि पंचमी तिथि है। आज माता स्कंदमाता की उपासना का दिन है। इनके लिए लिखा है – “पंचम्याम् अंगरागन्च एवं शक्त्यालंकरणानि च” अर्थात आज माता के भक्तों को चाहिए कि वो आज माता को अंगराग एवं अपने सामर्थ्य के अनुसार माता का अलंकार से शृंगार करें। आज उपांग ललिता व्रत भी है। आज रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “माता स्कंदमाता के उपासना” की हार्दिक शुभकामनायेँ।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ अयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – आश्विन मास शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि 12:31 AM तक उपरांत षष्ठी
✏️ तिथि के स्वामी :- पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी और षष्टी तिथि के स्वामी भगवान कार्तिकेय जी है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र ज्येष्ठा 09:03 PM तक उपरांत मूल
🪐 नक्षत्र स्वामी : ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है। ज्येष्ठा नक्षत्र के देवता देवराज इंद्र हैं ।
🔕 योग : सौभाग्य योग 06:54 AM तक, उसके बाद शोभन योग 05:08 AM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग
प्रथम करण : बव – 12:55 पी एम तक
द्वितीय करण : बालव – 12:31 ए एम, अक्टूबर 20 तक
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:18:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:42:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:43 ए एम से 05:34 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:08 ए एम से 06:24 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:29 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:00 पी एम से 02:45 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:48 पी एम से 06:13 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:48 पी एम से 07:04 पी एम
💧 अमृत काल : 12:14 पी एम से 01:51 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:41 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 20
❄️ रवि योग : 09:04 पी एम से 06:25 ए एम, अक्टूबर 20
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को गुड़ दान करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – उपांग ललिता व्रत/सौर कार्तिक मास प्रारंभ/ नत पंचमी (उड़िया)/ अभिनेता सनी देओल जन्मोत्सव, कॉमेडियन जेमी लीवर जन्म दिवस, कोरियोग्राफर श्यामक डावर जन्म दिवस, विश्व बाल चिकित्सा हड्डी और जोड़ दिवस, प्रसिद्ध संगीतकार आर. सी. बोराल जयंती, भौतिक शास्त्री सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर जयन्ती, प्रसिद्ध महिला क्रांतिकारी मातंगिनी हज़ारा जयन्ती, रामअवध द्विवेदी पुण्य तिथि
✍🏼 विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🗺️ Vastu Tips 🗽
सामान्य तौर पर तो उत्तर या पूर्व दिशा में ही मुख करके पूजा-पाठ या जप किया जाता है, लेकिन कभी-कभी किसी फल की प्राप्ति के लिए अन्य दिशाओं में भी जप किया जाता है। पश्चिम दिशा की ओर मुख करके जप करने से धन, वैभव व ऐश्वर्य कामना की पूर्ति होती है। दक्षिण दिशा में मुख करके जप करने से षट्कर्मों की प्राप्ति होती है। उत्तर-पश्चिम, यानि वायव्य कोण की ओर मुख करके जप करने से शत्रु व विरोधियों पर विजय प्राप्त होती है। दक्षिण-पूर्व, यानि आग्नेय कोण में मुख करके जप करने से आकर्षण व सौंदर्य कामना की पूर्ति होती है तथा दक्षिण- पश्चिम, यानि नैऋत्य कोण में मुख करके जप करने से किसी के दर्शन की कामना पूरी करता है।
वास्तु शास्त्र में आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार पूजा के दौरान पूर्व दिशा में मुख करके पूजा-अर्चना करना श्रेष्ठ रहता है, क्योंकि पूर्व दिशा शक्ति व शौर्य का प्रतीक है। वास्तु शास्त्र में पूजा के लिए पश्चिम की तरफ पीठ करके यानि पूर्वाभिमुख होकर बैठना ज्ञान प्राप्ति के लिए अच्छा माना जाता है। इस दिशा में उपासना करने से हमारे भीतर क्षमता और सामर्थ्य का संचार होता है, जिससे हमें अपने लक्ष्य को हासिल करने में आसानी होती है। इस दिशा में पूजा स्थल होने से घर में रहने वालों को शांति, सुकून, धन, प्रसन्नता और स्वास्थ लाभ मिलता है।
➡️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
शाम के समय बिलकुल भी न खाएं ये चीजें- दही मौसम बदल गया है लेकिन हम में से बहुत से लोग अब भी शाम को दही खा रहे हैं। रायता या फिर दही वाली सब्जी खा रहे हैं। जबकि, ये सेहत के लिए सही नहीं है। क्योंकि ये कफ को प्रभावित करता है जिससे सर्दी-जुकाम की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा जिन लोगों को फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं बनी रहती हैं उन्हें तो पूरी तरह से दोपहर के बाद दही का सेवन बंद कर देना चाहिए।
खीरा खाना इस मौसम में सर्दी-जुकाम का कारण बनता है। खीरा पेट को ठंडा करता है और सर्दी-जुकाम का कारण बनता है। गर्मियों से अब तक हम लोग सलाद खाते रहे हैं लेकिन अब शाम के समय इसे खाना खांसी-जुकाम का कारण बनता है। तो, शाम के समय इन चीजों के सेवन से बचें। इसकी जगह शाम को गर्म फूड्स का सेवन करें। जैसे गुड़ और प्रोटीन से भरपूर सब्जियां।
🥤 आरोग्य संजीवनी 🍶
फटे होंठों का इलाज है नारियल तेल-अगर आपके होंठ तेजी से फट रहे हैं तो नारियल तेल आपके लिए कारगर तरीके से काम कर सकता है। दरअसल, नारियल तेल में ओमेगा-3 होता है जो कि आपकी स्किन में अंदर से नमी को लॉक करता है। इतना ही नहीं ये तेल एक हीलर की तरह काम करता है और होठों को अंदर से मॉइस्चराइज करता है। इसके अलावा ये होंठों पर नमी की एक परत बनाता है जिससे ये जल्दी-जल्दी फटते नहीं और लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं।
फटे होंठों पर आप रात के समय नारियल तेल लगाकर सोएं। आपको करना ये है कि हल्का सा नारियल तेल लें और इसे अच्छी तरह से अपने होंठों पर लगाएं। ऐसे लगाएं कि होंठ पर ये तेल मोटी परत के रूप में नजर आए। सुबह आप जब उठेंगे इसका फर्क देखेंगे। बता दें कि होंठों पर नारियल तेल लगाना सिर्फ इन्हें मॉइस्चराइज ही नहीं करता बल्कि, ये एंटीबैक्टीरियल भी है जो कि होंठों को किसी भी प्रकार के इंफेक्शन से बचाने में मदद करता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
माता जगतजननी, जगदम्बा भवानी माता दुर्गा देवी के पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता के रूप में जाना जाता है। इन्हें स्कन्द कुमार कार्तिकेय की जननी के वजह से स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है। कार्तिकेय को पुराणों में कुमार, शौर, शक्तिधर आदि के नाम से भी इनके शौर्य का वर्णन किया गया है। इनका वाहन मयूर है अतः इन्हें मयूरवाहन के नाम से भी जाना जाता है। इन्हीं भगवान स्कन्द की माता होने के कारण दुर्गा के इस पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता कहा जाता है।
नवरात्रि के नव दिनों तक व्रत और उपवास करनेवाले साधक का मन इस दिन अर्थात पांचवें दिन विशुद्ध चक्र में होता है। क्योंकि माता स्कन्दमाता की पूजा नवरात्रि में पांचवें दिन की जाती है। इनके विग्रह में स्कन्द जी बालरूप में माता की गोद में बैठे रहते हैं। स्कन्द मातृस्वरूपिणी देवी की चार भुजायें हैं। ये दाहिनी ऊपरी भुजा में भगवान स्कन्द को गोद में पकड़े हैं। और दाहिनी निचली भुजा जो ऊपर को उठी है, उसमें कमल का फुल पकड़ा हुआ है।
माता का वर्ण पूर्णतः शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। इसी वजह से इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। परन्तु मूल रूप में इनका भी वाहन सिंह ही है। स्कन्द माता की पूजा भक्तों को उनके माता के वात्सल्य से भर देता है। एकाग्रभाव से मन को पवित्र करके माँ की स्तुति करने से समस्त दुःखों से मुक्ति मिलती है। तथा व्यक्ति का मोक्ष का मार्ग भी सुलभ हो जाता है।
रूप और सौंदर्य की अद्वितिय आभा लिए हुए माता अभय मुद्रा में कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। पद्मासना देवी, विद्यावाहिनी दुर्गा तथा सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी यही स्कन्दमाता ही हैं। इनकी उपासना से साधक अलौकिक तेज प्राप्त कर लेता है। क्योंकि यही हिमालय की पुत्री पार्वती भी हैं। इन्हें ही माहेश्वरी और गौरी के नाम से जाना जाता है। जो अपने पुत्रों से अत्यधिक प्रेम करती हैं।
इनको अपने पुत्र के नाम के साथ संबोधित किया जाना अच्छा लगता है। जो भक्त माता के इस स्वरूप की पूजा करते है मां उस पर अपने पुत्र के समान ही स्नेह लुटाती हैं। स्कंदमाता की पूजा उसी प्रकार से करना चाहिए जैसे अन्य सभी देवियों का पूजन किया जाता है। शुद्ध चित से देवी का स्मरण करना चाहिए। तथा पंचोपचार, षोडशोपचार या फिर अपने सामर्थ्य के अनुसार स्कन्दमाता की पूजा करने के पश्चात भगवान शिव जी की पूजा करनी चाहिए।
जो भक्त देवी स्कन्द माता की भक्ति-भाव सहित पूजन करते हैं उसे देवी की सम्पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। देवी की कृपा से भक्त की मुराद पूरी होती है और घर में सुख, शांति एवं समृद्धि सदैव बनी रहती है। वात, पित्त, कफ जैसी बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति को स्कंदमाता की पूजा करनी चाहिए। कुमार कार्तिकेय की माता के रूप में इनकी पूजा करने से माता पूर्णत: वात्सल्य लुटाती हुई नज़र आती हैं। और नि:संतानों की गोद भी अनायास ही भर देती हैं।
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।
पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं।

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