ताज की नहीं रखी लाज, अब हैं निराश, मतदाता मौन, सर्दी में प्रत्याशियों का आ रहा पसीना

सिलवानी विधानसभा चुनाव 2023
सिलवानी। जिले की हाई प्रोफाइल सिलवानी विधानसभा सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा के रामपालसिंह राजपूत एवं कांग्रेस देवेन्द्र पटेल में होने से काफी रोचक हो गया है। दोनों का ही चार बार से लगातार आमना सामना हो रहा है। बीते तीन चुनावो में एक बार देवेन्द्र पटेल तो दो बार लगातार रामपालसिंह चुनाव में एक दूसरे को पटकनी दे चुके है। वैसे इस बार रामपाल सिंह की राह भी आसान नहीं है उन्हें भाजपाइयों से खतरा बना हुआ है। उन पर परिवारवाद के आरोपों को कार्यकर्ता पचा नहीं पा रहे है। और रामपालसिंह पर बाहरी प्रत्याशी होने की भी छाप लगी है।
विधानसभा चुनाव 2008 में परिसीमांकन में अस्तित्व में आई सिलवानी विधानसभा दोनों दलों के लिए कड़े परिश्रम वाली सीट बनी हुई है अथवा कहा जा सकता है कि दोनों ही दलों की राह आसान नहीं है ऐसे में कांग्रेस के देवेन्द्र पटेल को इस बार कांग्रेस की एकजुटता ने काफी राहत दी है।
परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई सिलवानी 2008 के प्रथम चुनाव में भारतीय जनषक्ति पार्टी से देवेन्द्र पटेल और भाजपा के रामपालसिंह का आमना सामना हुआ था जिसमंें देवेन्द्र पटेल विजयी हुये और रामपालसिंह को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद 2013 एवं 2018 में कांग्रेस से देवेन्द्र पटेल और भाजपा से रामपालसिंह का मुकाबला हुआ और दोनो ही चुनाव में रामपालसिंह विजयी हुये।
देवेन्द्र पटेल के पहली बार विधायक के कार्यकाल में चंद कार्यकर्ताओं के संपर्क के कारण आम मतदाताओं के बीच नहीं पहुंच पाए थे। उन पर आरोप है कि वह अपनी गाड़ी से कांच भी नही उतरते थे।
2023 के चुनाव में सिलवानी विधानसभा की सीट पर 8 उम्मीदवार मैदान में है। मुख्य मुकाबला कांग्रेस के देवेन्द्र पटेल का भाजपा के रामपालसिंह से है। रामपालसिंह ने प्रदेष की भाजपा सरकार केबिनेट मंत्री रहते क्षेत्र में सड़को का जाल बिछा दिया और अनेक विकास योजनाओं को स्वीकृत कराया है। लेकिन उन पर परिवार वाद के आरोप लगातार लगते रहे है। इस बार भाजपा के कई पुराने कार्यकर्ता अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे है और घर बैठ कर ही चुनाव का मजा ले रहे है और भाजपा के कई कार्यकर्ताओं ने भाजपा का दामन छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली है।
क्षेत्र में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है, क्षेत्र में एक भी उद्योग कारखाने की स्थापना हुई? क्षेत्र के चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र में कुछ खास ध्यान देना मुनासिव नहीं समझा जिस कारण सिलवानी विधानसभा की सिलवानी एवं बेगमगंज तहसील चहुंमुखी विकास से कोसों मील दूर कार्यालय की फाइलों में चल रही है। तो कुछ योजनाएं दलालों के चंगुल में फंसकर रह गई है जिससे अधिकांश योजनाएं कहने को तो जनता के लाभ के लिए चलाई जा रही है। पर क्षेत्र की जनता जर्नादन को शासन की अधिकांश योजना से वंचित रखा जा रहा है और हालात पिछले 35 सालों से लगातार चले आ रहे है। पर क्षेत्र की जनता का दर्द आज तक क्षेत्रीय भाजपा कांग्रेस प्रत्याशी में की दिखाई नहीं देता है। जबकि भाजपा कांग्रेस दोनों ही दलों द्वारा सिर्फ चुनावी मौसम में वोट मांग कर क्षेत्र में अपना परचम पिछले कई सालों से लहरा कर विकास की गंगा बहाते रहते है पर पता ही नहीं चलता कि पांच साल कब पूरे हो गये यह विकास की गंगा कब और कहाँ बहती रहती है। आज भी क्षेत्र के आदिवासी समाज की युवा रोजगार की तलाश में मंडीदीप भोपाल और कई राज्यों में जाकर काम कर रहे है। आज भी प्रतापगढ़ सुल्तानगंज, जैधारी के आदिवासी रोजगार के अभाव में मजदूरी करने के लिए पलायन करते है। क्षेत्र में किसी भी प्रकार का कोई उद्योग धंधे नहीं है। आज भी लोग गरीबी रेखा के जीवन यापन करने का राशनकार्ड बनवाने के लिए परेशान है। आज भी अमीरों के नाम बीपीएल सूची में और सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे है वास्तविक रूप से गरीब अपना जुड़वाने के लिए दर दर की ठोकरे खाने मजबूर है। इस मतदाताओं में उदासी बनी हुई है।
कई ऐसे काम अधूरे पड़े है जो क्षेत्र की जनता को सोचने पर मजबूर कर देते है कि आखिर हमने आज तक जो जनप्रतिनिधि चुने है उन्होंने आखिर अपने कार्यकाल में क्या काम किए है और अगर किए भी है तो ये काम क्यों अधूरे रह गये इन दरकारों से मरहूम रह कर कितने पांच साल और सिलवानी बेगमगंज तहसील की जनता को निकालने होगें। कब वह समय आएगा जो इन कार्य की और ध्यान देकर उन्हें हरी झंडी दिखाएगा इस आस को लेकर क्षेत्र की जनता वर्षों से ताजपोशी की पर उन्होंने जनता की उम्मीदों की नजर अंदाज कर रखा है।
वहीं सिलवानी क्षेत्र में इस बार भी स्थानीय प्रत्याशी का मुद्दा दिमाग में बना हुआ है जिससे रामपाल सिंह की राह भी आसान नहीं नजर आती है। रामपालसिंह दो बार लगातार जीतने के बाद क्षेत्र दौरा कर भाजपा कार्यकर्ताओं से सम्पर्क में है। परंतु भाजपाई बाहरी प्रत्याशी को पचा नहीं पा रहे है।
सिलवानी में नहीं हुई किसी प्रत्याशी की सभा
कहने को सिलवानी विधानसभा मुख्यालय है, लेकिन पहली बार है जब दोनो ही प्रमुख दलों की कोई आमसभा या स्टार प्रचारक सिलवानी आया है। भाजपा का प्रचार में बेगमगंज में मनोज तिवारी और षिवराजसिंह चैहान, बम्होरी में प्रहलादसिंह लोधी, और प्रतापगढ़ में केन्द्रीय मंत्री फगनसिंह कुलस्ते की आमसभा हुई है। वही कांग्रेस पार्टी की से बम्हौरी में साधना भारती की सभा हुई है। दोनों ही दलों ने सिलवानी में आमसभा करना मुनासिव नहीं समझा।
यह है क्षेत्र के मुद्दे
सिलवानी जिला बनाने की मांग, पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज द्वारा स्वीकृत केन्द्रीय विद्यालय को भूमि आवंटन, खेल स्टेडियम, रेल लाइन की घोषणा मात्र सपना बन कर रह गई है। उत्कृष्ट विद्यालय की भूमि अतिक्रमण मुक्त कर षापिंग काम्पलेक्स, पार्क, बेरोजगारो को रोजगार के साधन उद्योग धंधों की स्थापना आदि मुख्य मुद्दे है। मतदाताओं के मन में क्या चल रहा है लाड़ली बहना योजना से भाजपा को कितना फायदा होगा, यह भविष्य के गर्त में है। 17 नबंवर को होने वाले चुनाव के लिए दोनोे ही दल घर घर जाकर वोट मांग रहे है। चुनाव में मतदाता किसे बनाती है सरताज ? यह 17 नवंबर शुक्रवार को ईव्हीएम में कैद हो जायेगा, जिसका परिणाम 3 दिसंबर को आएगा।
विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-143 सिलवानी में 276 मतदान केन्द्र बनाए गए हैं। इनमें 138 क्रिटिकल /50 प्रतिशत मतदान केन्द्रों के भीतर सीसीटीवी लगाए गए हैं। सिलवानी विधानसभा में 86 माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं तथा मतदान प्रक्रिया सम्पन्न कराने हेतु 304 मतदान दल गठित किए गए हैं। इन 304 मतदान दलों में कुल 1216 अधिकारियों, कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सिलवानी विधानसभा में कुल 225373 मतदाता हैं। जिनमें 117996 पुरूष मतदाता, 107375 महिला मतदाता और 2 अन्य मतदाता शामिल हैं।



