ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग शनिवार, 06 जनवरी 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 06 जनवरी 2024

06 जनवरी 2024 दिन शनिवार को पौष मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। आज जैन मतानुसार उनके भगवान पार्श्वनाथ का जन्मकल्याणक व्रत है। आज सर्वार्थसिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनी जैनियों को “पार्श्वनाथ के जन्मकल्याणक व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – पौष मास कृष्ण पक्ष शनिवार दशमी तिथि 12:42 AM तक उपरांत एकादशी
🖍️ तिथि स्वामी : दशमी तिथि के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है। यह सौम्य अर्थात शांत तिथि हैं।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र स्वाति 09:23 PM तक उपरांत विशाखा
🪐 नक्षत्र स्वामी – स्वाति नक्षत्र के देवता वायु हैं,स्वाति नक्षत्र के देवता पवन देव हैं।
🔊 योग – धृति योग 06:10 AM तक, उसके बाद शूल योग
प्रथम करण : वणिज – 12:20 पी एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 12:41 ए एम, जनवरी 07 तक
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:46:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:16:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:26 ए एम से 06:20 ए एम
🌌 प्रातः सन्ध्या : 05:53 ए एम से 07:15 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:06 पी एम से 12:48 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:11 पी एम से 02:52 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:36 पी एम से 06:03 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:39 पी एम से 07:00 पी एम
💧 अमृत काल : 12:01 पी एम से 01:43 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:54 ए एम, जनवरी 07
सर्वार्थ सिद्धि योग : 07:15 ए एम से 09:23 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग, पाश्र्वनाथ जयन्ती (जैन), एआर रहमान जन्मोत्सव, प्रसिद्ध लेखक नरेंद्र कोहली जन्म दिवस, फ़िल्म निर्देशक किशन श्रीकांत जन्म दिवस, प्रसिद्ध अभिनेता ओम पुरी स्मृति दिवस, भारतीय क्रिकेट कप्तान कपिलदेव जन्म दिवस, भारतेन्दु हरिश्चंद्र स्मृति दिवस, अजीत प्रताप सिंह पुण्य तिथि, पत्रकार दिन (महाराष्ट्र), प्रभुप्रकाश’ नामक ईसाई पर्व, विश्व युद्ध अनाथ दिवस, वर्षगांठ: पहला मराठी अखबार दर्पण (1832)
✍🏼 विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात ढंदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🗺️ Vastu tips 🗽
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, कभी भी दवाओं को दक्षिण-पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए। इस दिशा में दवाइयां रखने से बीमारी लंबे समय तक बनी रहती है। इसके अलावा घर-परिवार को शारिरिक कष्ट के साथ आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ता है। दवाईयों को रखने के लिए पश्चिम दिशा भी सही नहीं है। इससे बीमार सदस्य को कई तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है।
दवाइयों को रखने की सही दिशा क्या है? वास्तु शास्त्र के अनुसार, दवाइयों को हमेशा उत्तर दिशा में रखना चाहिए। दवाइयों को रखने के लिए इस दिशा को शुभ माना गया है। वहीं कभी भी दवाओं को अपने सिरहाने या फिर बिस्तर के आसपास नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से राहु-केतु का प्रभाव पड़ता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सर्दी-जुकाम न होने पर भी क्यों लें भाप? सर्दी-जुकाम न होने पर भी आपको भाप इसलिए लेना चाहिए क्योंकि भाप लेने से फेफड़ों तक गर्माहट पहुंचती है और इनकी सिकाई होती है। साथ ही ये फेफड़ों में जमा बलगम को भी पिघलाने में मदद करता है और इसे पिघलाकर बाहर नकालता है। इतना ही नहीं अगर आपकी नाक ब्लॉक है तो भाप लेना चाहिए ताकि आपकी नेसल पैसेज साफ हो जाए और फिर सांस लेने पर आप बेहतर महसूस करें।
फेफड़ों के लिए भाप लेने के फायदे इसके अलावा कंजेशन का ये कारगर उपाय है। ये आपके फेफड़ों में फंसे बलगम को तोड़ता है और इसे बाहर निकालने में मदद करता है। इतना ही नहीं ये फेफड़ों की नलियों में सूजन को कम करता है और फिर बेहतर महसूस करवाता है। तो, पूरी सर्दी तय कर लें कि 2 बाद बस कुछ मिनट निकाल कर भाप जरूर लें। इस तरह आप सर्दी-जुकाम सहित कई वायरल व बैक्टीरियल बीमारियों से बचे रहेंगे।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
फटे होठों के लिए -अक्सर सर्दियों में हमारे होंठ फट जाते हैं ।अगर हम नाभि में थोड़ा सा तेल रोजाना डालते है तो हमारे होंठों के फटने की समस्या दूर हो जाती है और हमारे होंठ गुलाबी और चिकने बने रहते हैं।
ग्रह संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए-नाभि में तेल डालने से जहां हमारी शारीरिक समस्याएं दूर होती हैं वही हमारी ग्रह संबंधी समस्याएं भी नाभि में तेल डालने से समाप्त हो जाती हैं। इससे हमारे ग्रह हमारे अनुकूल हो जाते हैं।
कब्ज दूर करने के लिए-अगर हम नाभि में रात को दो बूंद तेल डालकर सोते हैं तो सुबह हमारा पेट अच्छी प्रकार से साफ हो जाता है।
जोड़ों की समस्या के लिए -अगर हम नाभि में रोजाना सरसों के तेल की कुछ बूंदें डालते हैं तो हमारी जोड़ों की समस्या भी इससे बहुत ही कम हो जाती है।
कब नहीं डालना चाहिए-हमें सप्ताह में सोमवार से लेकर के शनिवार तक नाभि में तेल लगाना चाहिए। लेकिन रविवार को नाभि में तेल कभी नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इससे हमारे ग्रह हमारे विपरीत हो जाते हैं। इसीलिए भूल कर भी कभी भी रविवार को नाभि में तेल नहीं लगाना चाहिए।
📗 गुरु भक्ति योग 🕯️
द्रौपदी ने कुत्तों को कौन सा कटु श्राप दिया था और जिसका परिणाम वो आज भुगत रहे हैं?
जब द्रौपदी पांच पांडवों के साथ विवाह करके आई तो उन्होनें एक शर्त रखी थी कि एक समय पर केवल एक भाई ही द्रौपदी के कक्ष में प्रवेश करेगा। जो भी कोई कमरे में जाएगा वो अपने जूते बाहर दरवाजे पर रख देगा।
इस नियम का उल्लंघन करने पर अपराधी को तुरंत एक वर्ष के लिए वनवास जाना होगा। इसी कथा के आधार पर एक दिन युधिष्ठिर द्रौपदी के कक्ष में था, तभी एक कुत्ता दरवाजे के बाहर से उनके जूते चुरा कर ले गया।
इसके बाद अनजाने में अर्जुन ने कक्ष में प्रवेश कर लिया और अपने बड़े भाई को द्रौपदी के साथ देख लिया और शर्त के अनुसार अर्जुन को निर्वासित होना पड़ा।
द्रौपदी को इस पर बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई और उसने कुत्ते पर क्रोध सारा क्रोध निकाल दिया जिसने युधिष्ठिर के जूते चुराए थे। उसने सभी कुत्तों को शाप दिया कि ‘सारी शर्म भूलकर सम्पूर्ण विश्व तुम्हें सार्वजनिक रुप से सहवास करते हुए देखेगा।
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⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।

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