ज्योतिष

आज का पंचांग आज का पंचांग रविवार, 11 फरवरी 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 11 फरवरी 2024

11 फरवरी 2024 दिन रविवार को माघ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। आज के विषय में लिखा है:- शुभाशुभेत्रय गुण्यकरः त्रिपुष्कर योगः। अर्थात आज शुभ कर्म करेंगे तो उसका तीन गुना करके शुभ फल मिलेगा परन्तु अशुभ करेंगे तो उसका भी तीन गुना करके ही फल मिलेगा। आज विवाह का मुहूर्त नहीं है, परन्तु शुभ कर्म अधिक से अधिक करना चाहिये। अशुभ कार्य किसी भी प्रकार का नहीं करना चाहिये।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – माघ मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – रविवार माघ माह के शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि 09:09 PM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि का स्वामी – द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है । द्वितीया तिथि के स्वामी सृष्टि के रचियता भगवान ‘ब्रह्मा’ जी हैं। इसका विशेष नाम ‘सुमंगला’ है। यह भद्रा संज्ञक तिथि है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र शतभिषा 05:39 PM तक उपरांत पूर्वभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी राहु है। तथा शतभिषा नक्षत्र के देवता वरुणदेव है।
🔊 योग – परिघ योग 10:38 AM तक, उसके बाद शिव योग 06:30 AM तक, उसके बाद सिद्ध योग
प्रथम करण : बालव – 10:57 ए एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 09:09 पी एम तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:34 बजे से 17:56 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:28:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:32:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:20 ए एम से 06:11 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:46 ए एम से 07:03 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:13 पी एम से 12:58 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:26 पी एम से 03:11 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:05 पी एम से 06:31 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:08 पी एम से 07:25 पी एम
💧 अमृत काल : 11:19 ए एम से 12:44 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 12 से 01:01 ए एम, फरवरी 12
🪷 त्रिपुष्कर योग : 05:39 पी एम से 09:09 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-आज सूर्यास्त से पूर्व बिना नमक का भोजन करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – चन्द्र दर्शन/ पंचक/ शुक्र गोचर/लाल बहादुर शास्त्री स्मृति दिवस, पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति दिवस, भारतीय सिद्धांतकार गोपी चंद नारंग जन्म दिवस, भारतीय क्रांतिकारी दामोदर स्वरूप सेठ जयन्ती, राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद स्मृति दिवस, भारतीय फ़िल्म निर्देशक रवि टंडन स्मृति दिवस, स्वतंत्रता सेनानी जमनालाल बजाज पुण्य तिथि, सुपर चिकन विंग दिवस, राष्ट्रीय लाटे दिवस, विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, राष्ट्रीय गिरे हुए दूध पर रोना मत दिवस, राष्ट्रीय गेट आउट योर गिटार दिवस, मित्र दिवस, अखबारों का प्रकाशन दिवस, बीमारों का विश्व दिवस, जार्ज वाशिंगटन जयन्ती (संयुक्त राज्य अमेरिका)।
✍🏼 विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।
🛫 Vastu tips 🗽
आज के युग में वास्तु शास्त्र के बहुत मान्यता है, और व्यापार कारोबार में सफलता चाहिए तो ऑफिस का वास्तु, बहुत सभी होना ही चाहिए।
आजकल कड़ी प्रतिस्पर्धा के ज़माने में लोग अपने व्यापार में आगे बढ़ने के लिए जी जान से प्रयास करते है। इनमें ना केवल उसके मालिक वरन तमाम कर्मचारियों का भविष्य भी दावँ में लगा होता है । किंतु कई बार बहुत परिश्रम के बाद भी बेशुमार धन लगाने के बाद भी सफलता कोसो दूर ही रहती है इसका एक प्रमुख कारण उनके ऑफिस का वास्तु दोष भी हो सकता है ।
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार प्रत्येक दिशा एक विशेष गुण लिए होती है और उन दिशाओं के गुणों के मुताबिक ही कार्य करने से अल्प समय, अल्प व्यय में ही लाभ मिल सकता है ।हम यहाँ पर आपको ऑफिस / कार्यालय से सम्बंधित कुछ आसान से वास्तु के नियम बता रहे है जिन्हे अपनाकर आप अवश्य ही अपने व्यापार को और भी अधिक ऊँचाइयों पर ले जा सकते है।
✳️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
कौन से संकेत बताते हैं कि हम बूढ़े हो रहे हैं?
जब आप जीवन के महत्व को समझने की कोशिश करने लगते हैं।
जब आप बैठ कर सोचने लगते हैं कितना समय बचा है और कौन कौन से काम करने बाकी हैं।
जब आप शोर शराबे से दूर रहने और अपने बगीचे में समय व्यतीत पसंद करने लगते हैं
जब आप चाहते हैं कि सही समय पर सो कर सुबह जल्दी उठने लगते हैं ।
जब आप अपने से बड़े लोगो के लिए की देखभाल और लगातर हॉस्पिटल के चक्कर लगा रहे हैं क्योंकि परिवार/ समाज में आपसे बड़ा कोई न कोई बीमार चल रहा है ।
आप अपने जोड़ो और घुटनों में दर्द मेहसूस करने लगते है।
जब आपको याद करना पढता है कि उस परिचित का क्या नाम है जिसको आप एक हफ्ते पहले मिले थे।
जब आप अपना पर्स और चश्मा रख कर भूलने लगे हैं।
🍿 आरोग्य संजीवनी 🍶
खसखस के क्या फायदे हैं?
पोस्त (अहिफेन या अफीम) के डोडे से निकले हुए बीज या दानों को खसखस कहा जाता है।
आयुर्वेद के अनुसार यह बल्य (ताकद बढ़ानेवाले), वृष्य (वीर्यवर्धक), कफ बढ़ानेवाले और वात शामक होते है।
यह नींद लानेवाले, पोषक होते है।
मिठाइयों के ऊपर या केक, डिजर्ट पर इन को छिड़का जाता है या हलवा बनाकर खाया जाता है।
सुखी खांसी, निद्रानाश, दौर्बल्य आदि में इन्हें पीसकर मिश्री या शहद के साथ खाया जाता है।
बाह्य लेप वेदना को कम करता है। सिरदर्द में इसका लेप किया जाता है।
कण के दर्द में इससे निकलनेवाला तेल डाला जाता है।
इसका उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक के देखरेख में ही करे।
आधुनिक चिकित्सा शास्त्र के अनुसार, इसमें कई दर्द निवारक एल्कलॉइड्स (जैसे मॉर्फिन, कोडीन आदि) होते है।
📒 गुरु भक्ति योग 🕯️
हर नर नारी का हृदय कामवासना से भरा हुआ है। आज व्यक्ति सोचता है जिस प्रकार स्वांस जरूरी है, जिस प्रकार भोजन और पानी जरूरी है, इसी प्रकार कामवासना की प्यास बुझाना भी जरूरी है । जबकि यह एकदम गलत धारणा है। हमारे बहुत से साधु सन्यासी एवं अन्य लोग भी है जो की आजीवन ब्रह्मचारी रहते हैं । यदि कामवासना की प्यास बुझाना इतना ही जरूरी होता तो वे लोग आज कैसे जीवित है?
आज हर इंसान में नैनों में रूहानियत की जगह कामवासना की झलक नजर आती है । कामवासना ने सच्चे प्यार को गायब कर दिया है ।
आजकल कोरा पर बहुत ही आश्चर्यजनक लेख पढ़ने को मिलते हैं । वह है बहन भाई, मां बेटे, पिता पुत्री, देवर भाभी, बहू ससुर के पवित्र रिश्ता को कलंकित करने वाले लेख, जिन्हें लोग अपनी शान समझकर साजा करते हैं| वे लोग नर्क गामी है, उनसे गंदा इंसान इस दुनिया में कोई हो नहीं सकता।
शास्त्रों में हिंसा दो प्रकार की बताई है |
एक हिंसा है क्रोध की हिंसा, किसी को मारना, किसी का खून करना। दूसरे प्रकार की हिंसा है काम कटारी चलाना। इस हिंसा की आग में आत्मा जल जाती है ।आत्मा उड़ नहीं सकती। आत्मा के कर्मों के बंधन बहुत ही भारी हो जाते हैं ।
भारत देश के अंदर ही कहा-कहा पवित्रता का प्रकाश देखने को मिलता है। लेकिन अधिकांश जगह कामुकता का अंधकार छाया हुआ है । सबवे अधिक आधुनिक चलने वाले देश में तो सर्वत्र कामुकता का अंधियारा ही अंधियारा है । लोग बाग इसी को अपने सभ्यता समझते हैं, इसी को चरम सुख मानते हैं जो की इन लोगों का भ्रम है।
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।
शास्त्र कहता है, द्वितीया तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है, उस व्यक्ति का हृदय साफ नहीं होता है। इस द्वितीया तिथि में जन्मे जातक का मन किसी की खुशी को देखकर आमतौर पर खुश नहीं होता, बल्कि उनके प्रति ग़लत विचार रखता है। इनके मन में कपट और छल का घर होता है, ये अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए किसी को भी धोखा दे सकते हैं। इनकी बातें बनावटी और सत्य से बहुत दूर होती हैं। इनके हृदय में दया की भावना बहुत ही कम होती है तथा यह किसी की भलाई भी तभी करते हैं, जबकि उससे अपना भी कुछ लाभ हो। ये परायी स्त्री से अत्यधिक लगाव रखने वाले होते हैं जिसके वजह से कई बार इन्हें अपमानित भी होना पड़ता है।

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