धार्मिक

सर्वार्थ सिद्ध योग में होगा होलिका दहन : पं. मोहनलाल

होली एक सांस्कृतिक, धार्मिक और पारंपरिक त्योहार है। पूरे भारत में इसका अलग ही जश्न और उत्साह देखने को मिलता है। होली भाईचारे, आपसी प्रेम और सद्भावना का त्योहार है। इस दिन लोग एक दूसरे को रंगों में सराबोर करते हैं।
मां शारदा देवी धाम मैहर के प्रख्यात वास्तु एवं ज्योतिर्विद पंडित मोहनलाल द्विवेदी ने बताया कि होलिका दहन के दिन प्रातः 07 बजकर 40 मिनिट से सर्वार्थ सिद्ध योग बन रहा है जो रात्रि अंत तक रहेगा । इस प्रकार का योग होलिका दहन हेतु सर्वत्र शुभ फलदाई है । होली हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है। बसंत का महीना लगने के बाद से ही इसका इंतजार शुरू हो जाता है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा की रात होलिका दहन किया जाता है और इसके अगले दिन होली मनाई जाती है। हिंदू धर्म के अनुसार होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। होली एक सांस्कृतिक, धार्मिक और पारंपरिक त्योहार है। पूरे भारत में इसका अलग ही जश्न और उत्साह देखने को मिलता है। होली भाईचारे, आपसी प्रेम और सद्भावना का त्योहार है। इस दिन लोग एक दूसरे को रंगों में सराबोर करते हैं। घरों में गुझिया और पकवान बनते हैं। लोग एक दूसरे के घर जाकर रंग-गुलाल लगाते हैं और होली की शुभकामनाएं देते हैं।
शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि
फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन और इसके अगले दिन होली मनाई जाती है। इस साल फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 24 मार्च को सुबह 09 बजकर 23 मिनट से शुरू होगी। वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 25 मार्च को दोपहर 11 बजकर 31 मिनट पर होगा।
होलिका दहन
पंडित द्विवेदी बताते है कि होलिका दहन के तीन नियम है पूर्णिमा तिथि हो, रात्रि का समय हो और भद्रा न हो । इस प्रकार का समय होलिका दहन की रात्रि 10 बजकर 28 मिनिट के बाद है । होली के दिन रात्रि 10 बजकर 28 मिनिट तक भद्रा है अतः होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त देर रात 10 बजकर 28 मिनट के बाद ही शास्त्र सम्मत है ।
होलिका के अगले दिन होली मनाई जाती है, इसलिए इस साल 25 मार्च को होली है। इस दिन देशभर में धूमधाम से होली मनाई जाएगी।
होलिका दहन पर हवा की दिशा से फलकथन
पंडित द्विवेदी ने बताया कि सनातन हिंदू धर्म शास्त्रों में होलिका दहन के समय हवा किस दिशा की और गतिशील है सिर्फ इतना देखकर शुभ अशुभ का निर्णय किया जा सकता है । होलिका दहन के समय यदि वायु का वेग पूर्व दिशा की ओर हो तो सर्वत्र खुशहाली आती है । यही वेग यदि दक्षिण दिशा की ओर हो तो इसे अपशकुन माना गया है जिसके अशुभ प्रभाव से फसलों को नुकसान, महामारी, विद्रोह एवं राज्य की सत्ता भंग होने की संभावना बनती है । वायु का वेग यदि पश्चिम दिशा की ओर हो तो कृषि को नुकसान तथा उत्तर की ओर होने से अत्यंत शुभ माना गया है क्योंकि उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर की दिशा होने से सर्वत्र धन धान्य से पूर्णता रहेगी तथा आर्थिक क्षेत्र में उन्नति होती है । वायु का वेग अथवा होली का धुंआ यदि आकाश की ओर जाता है तो इसे राजनीति में बदलाव का सूचक माना गया है ।
होलिका दहन पूजा की विधि
होलिका दहन की पूजा करने के लिए सबसे पहले स्नान करना जरूरी है।
स्नान के बाद होलिका की पूजा वाले स्थान पर उत्तर या पूरब दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं।
पूजा करने के लिए गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमा बनाएं।
वहीं पूजा की सामग्री के लिए रोली, फूल, फूलों की माला, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी,.मूंग, बताशे, गुलाल नारियल, 5 से 7 तरह के अनाज और एक लोटे में पानी रख लें।
इसके बाद इन सभी पूजन सामग्री के साथ पूरे विधि-विधान से पूजा करें। मिठाइयां और फल चढ़ाएं।
होलिका की पूजा के साथ ही भगवान नरसिंह की भी विधि-विधान से पूजा करें और फिर होलिका के चारों ओर सात बार परिक्रमा करें।

पं. मोहनलाल द्विवेदी ( हस्तरेखा, जन्मकुंडली एवं वास्तु विशेषज्ञ ) माँ शारदा देवीधाम, मैहर म.प्र. मोबाइल 9424000090, 7000081787

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