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30 मई 2024 : ज्येष्ठ कालाष्टमी, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 30 मई 2024 : ज्येष्ठ कालाष्टमी, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
▪️प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। कालाष्टमी के दिन भगवान शंकर के भैरव स्वरूप की उपासना की जाती है। कहते हैं कि इस दिन भोलेनाथ के काल भैरव स्वरूप की पूजा करने से जीवन की सारी परेशानियां दूर होंगी और आपकी मनचाही मुरादें पूरी होंगी। ज्येष्ठ माह का पहला मासिक कालाष्टमी का व्रत 30 मई 2024 को मनाया जाएगा। तो आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से कि मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किस मुहूर्त में कालाष्टमी की पूजा करें।_
⚛️ कालाष्टमी व्रत 2024 शुभ मुहूर्त
आचार्य श्री गोपी राम ने बताया है कि ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 30 मई सुबह 11:40 पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन 31 मई सुबह 9:38 पर होगा. ऐसे में कालाष्टमी व्रत 30 मई 2024 गुरुवार के दिन रखा जाएगा. इस विशेष दिन पर धनिष्ठा नक्षत्र का निर्माण हो रहा है, जो सुबह 07:31 तक रहेगा. इसके साथ इस दिन रवि योग का भी निर्माण हो रहा है जो सुबह 05:24 से सुबह 07:31 तक रहेगा. वहीं संध्याकाल में पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 07:14 से रात्रि 08:15 के बीच रहेगा और निशिता काल में पूजा के लिए शुभ मुहूर्त रात्रि 11:55 से रात्रि 12:35 के बीच रहेगा.
🤷🏼‍♀️ कालाष्टमी पूजा का महत्व
कालाष्टमी के दिन काल भैरव की उपासना करने से हर के भय और पीड़ा से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही इस दिन महादेव की पूजा करने से भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कालाष्टमी के दिन व्रत, पूजा और दान करने से ग्रहों के दुष्प्रभाव से भी छुटकारा मिलता है।
📖 कालाष्टमी व्रत पूजा विधि
शास्त्रों में बताया गया है की कालाष्टमी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करें और सूर्य देव को जल प्रदान करें. इसके बाद पूजा स्थल पर बैठकर व्रत का संकल्प लें.
ऐसा करने के बाद भगवान शिव अथवा काल भैरव मंदिर में विधि विधान से पूजा-पाठ करें और शाम के समय भगवान शिव माता पार्वती और भैरव भगवान की उपासना करें.
भगवान काल भैरव तांत्रिक सिद्धियों के देवता हैं. इसलिए उनकी उपासना निशिता काल में की जाती है. काल भैरव की उपासना के दौरान भगवान को गंध, पुष्प, धूप, दीप इत्यादि अर्पित करें और पूजा में काला तिल, उड़द और सरसों का तेल जरूर रखें.
✍🏼 इन बातों का रखें खास ध्यान
कालाष्टमी के दिन स्वच्छ और पवित्र हृदय से दान करना शुभ माना जाता है. दान करने से पहले भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें. दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को करना चाहिए. दान में दी जाने वाली वस्तुएं अच्छी गुणवत्ता की होनी चाहिए. यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि दान मात्र एक उपाय है. लव लाइफ में सुधार के लिए अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी आवश्यक है. कालाष्टमी के दिन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और शिवरात्रि और महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर व्रत रखें. इसके अलावा जरूरतमंदों की सहायता करें.
💁🏻 कालाष्टमी पर जरूर करें ये दान
👉🏽 काला तिल
काले तिल को शनि ग्रह से जुड़ा हुआ माना जाता है. शनि प्रेम और विवाह का कारक ग्रह है. काले तिल का दान करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं, जिससे प्रेम संबंध की बाधाएं दूर होती हैं.
👉🏽 उड़द दाल
उड़द की दाल को शनि ग्रह से संबंधित माना गया है. कालाष्टमी के दिन इसका दान करने से शनि देव खुश होते हैं और उनकी कृपा से प्रेम संबंध बेहतर हो जाते हैं.
👉🏽 चावल
कालाष्टमी का व्रत रखने के बाद चावल का दान करना बहुत शुभ माना जाता है इससे प्रेम संबंधों में स्थिरता आती है.
👉🏽 काले वस्त्र
काला रंग भगवान शनिदेव को समर्पित है. कालाष्टमी के दिन काले रंग के कपड़े दान करने से शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और लव लाइफ में आने वाली परेशानियां दूर हो जाती हैं.
👉🏽 जूते
जूता दान करने से राहु दोष कम करने में मदद मिलती है. राहु दोष के कारण अक्सर लव लाइफ में बाधाएं आती हैं.
👉🏽 नारियल
नारियल का फल भोलेनाथ और माता पार्वती का प्रतीक माना जाता है. कालाष्टमी का व्रत रखकर नारियल का दान करने से प्रेम संबंधो में मजबूती आती है.
👉🏽 इस मंत्र का करें जाप
. कालाष्टमी के दिन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें

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