ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 29 जून 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 29 जून 2024
29 जून 2024 दिन शनिवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष कि अष्टमी तिथि है। आज पचखा आरम्भ हो जाएगा। आज भद्रा भी है लेकिन यह भद्रा पाताल लोक में है जो शुभ और धनदायक माना जाता है। आज दोषसंघ का नाश करनेवाला रवियोग भी है, जो अत्यन्त ही शुभ होता है।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – आषाढ़ मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शनिवार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 02:20 PM तक उपरांत नवमी
✏️ तिथि स्वामी – अष्टमी तिथि के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 08:49 AM तक उपरांत रेवती
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं और राशि मीन है, जिसके स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति देव हैं।
⚜️ योग – शोभन योग 06:53 PM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग
प्रथम करण : कौलव – 02:19 पी एम तक
द्वितीय करण : तैतिल – 01:18 ए एम, जून 30 तक गर
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:26:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 07:23:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:06 ए एम से 04:46 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:26 ए एम से 05:26 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:57 ए एम से 12:53 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:44 पी एम से 03:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:22 पी एम से 07:42 पी एम
🎑 सायाह्न सन्ध्या : 07:23 पी एम से 08:23 पी एम
💧 अमृत काल : 05:17 ए एम, जून 30 से 06:48 ए एम, जून 30
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:05 ए एम, जून 30 से 12:45 ए एम, जून 30
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻 आज का उपाय-शनि मंदिर में सात बादाम चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – मूल प्रारम्भ/शीतलाष्टमी, पंचक जारी/ पचखा आरम्भ/ राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस, राष्ट्रीय कैमरा दिवस, प्रथम तिलिस्मी लेखक देवकीनन्दन खत्री जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी सरदार बलदेव सिंह स्मृति दिवस, अंतरराष्ट्रीय उष्णकटिंबधीय दिवस, वैज्ञानिक .के. आयंगर स्मृति दिवस, भारत के अमर शहीद प्रसिद्ध क्रांतिकारी राजेंद्र नाथ लाहिड़ी जन्म दिवस, अभिनेत्री उपासना सिंह जन्म दिवस, अवसर सांख्यिकी दिवस (भारत), (पी॰ सी॰ महालनोबिस के जन्म दिन के उपलक्ष्य में
✍🏼 विशेष:- अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🔮 29 जून 2024 : शनि की उल्टी चाल पलट देगी इन राशियों की किस्मत
भगवान शनि की पूजा बहुत शुभ मानी गई है। उन्हें इन्साफ और कर्म का स्वामी ग्रह भी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि वे लोगों को उनके कर्मों के मुताबिक ही फल प्रदान करते हैं। शनिवार के दिन ईश्वर शनि की पूजा होती है। बोला जाता है कि इस पवित्र दिन में जो भी भक्त ईश्वर शनि की पूजा करते हैं और उनके लिए उपवास रखते हैं उन्हें कर्मफल दाता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। लेकिन शनि देव जब किसी राशि में वक्री हालत में होते हैं, तो उसके जीवन में उथल-पुथल मच जाती है। बता दें कि अभी शनि देव अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विराजमान हैं और जल्द ही शनि देव इसी राशि में वक्री होंगे।
👺 इन राशियों पर होगा शनि का दुष्प्रभाव
लोकल 18 के साथ खास वार्ता में आचार्य श्री गोपी राम ने कहा कि 29 जून 2024 को शनि कुंभ राशि में वक्री होंगे। 29 जून को रात करीब 12 बजकर 35 मिनट पर शनि देव वक्री हालत में आए जाएंगे और 15 नवंबर 2024 तक वक्री हालत में ही रहेंगे। ऐसे में शनि की उल्टी चाल कई राशियों पर भारी पड़ सकती है और लगभग 5 महीने का समय कुछ राशियों के लिए दुखदाई रह सकता है।शनि की उल्टी चाल मेष राशि वालों के लिए कष्टकारी साबित हो सकती है। आपके कार्यों में इस दौरान रुकावटें पैदा होगी और धन नुकसान की भी आसार है। वृषभ राशि वाले जातकों पर भी शनि की उल्टी चाल नकारात्मक असर डालेगी। शनि वक्री होकर मकर राशि वालों की भी कठिनाई बढ़ाने वाले हैं। शनि वक्री का अशुभ असर मीन राशि के जातकों पर भी पड़ेगा। वाद-विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
👉🏽 शनि के दुष्प्रभाव से बचने के उपाय
आचार्य श्री गोपी राम ने कहा कि शनि की वक्री दृष्टि से होने वाले दुष्प्रभाव से बचने के लिए शनि देव के साथ हनुमानजी और ईश्वर भैरव की भी पूजा करनी चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।शनिवार के दिन काली तिल, काली उड़द, लोहा, सरसों तेल, काला वस्त्र, काला जूता आदि दान करना चाहिए।शनि की वक्री हालत जिस राशि के लिए अशुभ होती है, उन्हें रोजाना काले कौवे और काले कुत्ते को रोटी खिलानी चाहिए।
🍵 आरोग्य संजीवनी 🍶
सफेद मूसली जोड़ों के दर्द में
सफ़ेद मूसली को अक्सर लोग शरीर में दर्द के लिए लेते आये हैं। इसका सेवन दर्द में, विशेषकर जोड़ों के दर्द में, बहुत लाभदायक होता है।
यदि आपको लगातार जोड़ों में दर्द है, तो आपको आर्थराइटिस हो सकता है। इसके लिए एक प्राकृतिक इलाज सफ़ेद मूसली है।
आपको बस रोजाना दूध के साथ आधा चम्मच सफेद मूसली लेना है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
वस्तुएँ देव पूजा के योग्य नहीं रहती हैं
घर में पूजा करने वाला एक ही मूर्ति की पूजा नहीं करें। अनेक देवी-देवताओं की पूजा करें। घर में दो शिवलिंग की पूजा ना करें तथा पूजा स्थान पर तीन गणेश नहीं रखें।
शालिग्राम की मूर्ति जितनी छोटी हो वह ज्यादा फलदायक है।
कुशा पवित्री के अभाव में स्वर्ण की अंगूठी धारण करके भी देव कार्य सम्पन्न किया जा सकता है।
मंगल कार्यो में कुमकुम का तिलक प्रशस्त माना जाता हैं। पूजा में टूटे हुए अक्षत के टूकड़े नहीं चढ़ाना चाहिए।
पानी, दूध, दही, घी आदि में अंगुली नही डालना चाहिए। इन्हें लोटा, चम्मच आदि से लेना चाहिए क्योंकि नख स्पर्श से वस्तु अपवित्र हो जाती है अतः यह वस्तुएँ देव पूजा के योग्य नहीं रहती हैं।
तांबे के बरतन में दूध, दही या पंचामृत आदि नहीं डालना चाहिए क्योंकि वह मदिरा समान हो जाते हैं।
आचमन तीन बार करने का विधान हैं। इससे त्रिदेव ब्रह्मा-विष्णु-महेश प्रसन्न होते हैं। दाहिने कान का स्पर्श करने पर भी आचमन के तुल्य माना जाता है।
कुशा के अग्रभाग से दवताओं पर जल नहीं छिड़के।
देवताओं को अंगूठे से नहीं मले। चकले पर से चंदन कभी नहीं लगावें। उसे छोटी कटोरी या बांयी हथेली पर रखकर लगावें।
पुष्पों को बाल्टी, लोटा, जल में डालकर फिर निकालकर नहीं चढ़ाना चाहिए।
भगवान के चरणों की चार बार, नाभि की दो बार, मुख की एक बार या तीन बार आरती उतारकर समस्त अंगों की सात बार आरती उतारें।
भगवान की आरती समयानुसार जो घंटा, नगारा, झांझर, थाली, घड़ावल, शंख इत्यादि बजते हैं उनकी ध्वनि से आसपास के वायुमण्डल के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। नाद ब्रह्मा होता हैं। नाद के समय एक स्वर से जो प्रतिध्वनि होती हैं उसमे असीम शक्ति होती हैं।
शेष कल
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।

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