आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 30 जून 2024
30 जून 2024 दिन रविवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है। आज दोषसंघ का नाश करनेवाला रवियोग भी है, जो अत्यन्त ही शुभ होता है।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – आषाढ़ मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – रविवार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष नवमी तिथि 12:19 PM तक उपरांत दशमी
✏️ तिथि स्वामी : नवमी तिथि की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र रेवती 07:34 AM तक उपरांत अश्विनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – रेवती नक्षत्र के स्वामी ग्रह बुध हैं। रेवती नक्षत्र के देवता पूषा हैं।
⚜️ योग – अतिगण्ड योग 04:14 PM तक, उसके बाद सुकर्मा योग
⚡ प्रथम करण : गर – 12:19 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – 11:21 पी एम तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:34 बजे से 17:56 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:27:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 07:22:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:06 ए एम से 04:46 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:26 ए एम से 05:27 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:57 ए एम से 12:53 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:44 पी एम से 03:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:22 पी एम से 07:42 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:23 पी एम से 08:24 पी एम
💧 अमृत काल : 11:34 पी एम से 01:06 ए एम, जुलाई 01
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:05 ए एम, जुलाई 01 से 12:45 ए एम, जुलाई 01
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 07:34 ए एम से 05:27 ए एम, जुलाई 01
🚓 यात्रा शकुन-ईलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻 आज का उपाय-विष्णु मंदिर में आठ बादाम चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/सर्वार्थसिद्धि योग/पंचक समाप्त, अग्नि पंचक प्रारंभ, उल्का दिवस, कवि बाल कोल्हाटकर स्मृति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस, विश्व सोशल मीडिया दिवस, भारतीय रसायनज्ञ चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव पुण्य तिथि, महान स्वतंत्रता सेनानी दादाभाई नौरोजी स्मृति दिवस, संसदवाद का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, हूल क्रान्ति दिवस, भारतीय रसायनज्ञ चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव पुण्य तिथि, उल्का दिवस, अंतर्राष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस, विश्व सोशल मीडिया दिवस ✍🏼 विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है। 🛕 *Vastu tips* 🗼
यदि पश्चिम दिशा में रसोई हो तो रसोई घर की मालकिन के आधीन होती है, उसको बहु बेटियों का अच्छा सुख मिलता है। अन्नपूर्णा माता की कृपा घर पर होती है, और खाना इतना बनता है कि हमेशा बच जाता है।
यदि इस दिशा में बेडरूम होगा तो घर के मुखिया को उसके कामकाज में बाधा आती है। कामकाज में पैसा अटकता है जिस से आर्थिक समस्या होती है।
यदि इस दिशा में कबाड़ रखा हो, दीवारें खराब हो, सीलन हो तो परिवार के सदस्य आलसी और सुस्त होते हैं। कारोबार और आर्थिक लेन देन में धोखा होता है। परिवार के सदस्यों में मनमुटाव और झगड़े होते हैं।
यदि इस दिशा में रसोई का राशन जमा करके रखा हो तो परिवार के सदस्य बुद्धिमान होते हैं। यातायात के साधनों से जुड़े कारोबार से लाभ कमाते हैं।
यदि इस दिशा में तिजोरी हो, आभूषण और शिंगार का सामान रखा हो तो उस घर की आर्थिक तरक्की धीरे धीरे होती है।
यदि इस दिशा में पूजा का स्थान हो तो मुखिया लालची होता है, पेट गैस के रोग से पीड़ित होता है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
क्या न करें : दिन में बिल्कुल न सोयें । आरामप्रियता, सुखशीलता, एक स्थान पर सतत बैठे रहना, स्वादलोलुपता इनसे बचें । सुबह देर तक न सोयें ।
🔹 1गिलास गुनगुने पानी में 1 नींबू व 25 तुलसी पत्तों का रस अथवा 15-20 मि.ली. तुलसी अर्क व 1 चम्मच शहद मिलाकर सप्ताह में 2-3 दिन (रविवार को छोड़कर) सुबह खाली पेट लें ।
🔹 वजन घटाने हेतु सहायक औषधियाँ : त्रिफला रसायन कल्प, शोधनकल्प चूर्ण, पंचरस, हरड़ चूर्ण या टेबलेट, त्रिफला चूर्ण या टेबलेट, गोमूत्र या गोमूत्र अर्क, गोझरण वटी, गिलोयादि अर्क । (ये आश्रम के सत्साहित्य सेवा केन्द्रों पर उपलब्ध हैं ।) आयुर्वेद के अनुसार तिल के शुद्ध तेल का सेवन दुबले शरीर में चरबी बढ़ाता है व मोटे शरीर से चरबी घटाता है अर्थात् यह वजन बढ़ाने तथा घटाने दोनों में सहायक है ।
🍻 आरोग्य संजीवनी 🍶
जोड़ों के दर्द की दवा
एक चम्मच मेथी दाना, आधा चम्मच हल्दी और आधा चम्मच पीपरामूल चूर्ण रात को एक गिलास पानी में भिगो दिया | सुबह उबलने रख दिया, आधा हो जाय तो छान के खाली पेट पी लिया | 20 से 30 दिन तक यह प्रयोग करें, जोड़ों के दर्द में लाभ स्पष्ट महसूस होगा | दर्द अधिक हो तो ज्यादा दिन भी कर सकते हैं |
🌷 गुरु भक्ति योग 🌸
कल का शेष_
वस्तुएँ देव पूजा के योग्य नहीं रहती हैं लोहे के पात्र से भगवान को नैवेद्य अपर्ण नहीं करें।
हवन में अग्नि प्रज्वलित होने पर ही आहुति दें। समिधा अंगुठे से अधिक मोटी नहीं होनी चाहिए तथा दस अंगुल लम्बी होनी चाहिए। छाल रहित या कीड़े लगी हुई समिधा यज्ञ-कार्य में वर्जित हैं। पंखे आदि से कभी हवन की अग्नि प्रज्वलित नहीं करें।
मेरूहीन माला या मेरू का लंघन करके माला नहीं जपनी चाहिए। माला, रूद्राक्ष, तुलसी एवं चंदन की उत्तम मानी गई हैं। माला को अनामिका (तीसरी अंगुली) पर रखकर मध्यमा (दूसरी अंगुली) से चलाना चाहिए।
जप करते समय सिर पर हाथ या वस्त्र नहीं रखें। तिलक कराते समय सिर पर हाथ या वस्त्र रखना चाहिए। माला का पूजन करके ही जप करना चाहिए। ब्राह्मण को या द्विजाती को स्नान करके तिलक अवश्य लगाना चाहिए।
जप करते हुए जल में स्थित व्यक्ति, दौड़ते हुए, शमशान से लौटते हुए व्यक्ति को नमस्कार करना वर्जित हैं। बिना नमस्कार किए आशीर्वाद देना वर्जित हैं।
एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए। सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए। बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छूकर प्रणाम करें।
जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं। इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं।
जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए। जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए।
संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषिद्ध हैं।
दीपक से दीपक को नही जलाना चाहिए।
यज्ञ, श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए, सफेद तिल का नहीं।
समाप्ति
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⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।
आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।



