ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 09 जुलाई 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 lआज का पंचाग 🧾
मंगलवार 09 जुलाई 2024
09 जुलाई 2024 दिन मंगलवार को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष कि तृतीया उपरान्त चतुर्थी तिथि है। आज भौमवती वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत है। आज रवियोग, स्थायीजययोग एवं परंसर्वार्थसिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “भौमवती वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🌐 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351_

☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – आषाढ़ मास
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि 06:09 AM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी : चतुर्थी तिथि के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र आश्लेषा 07:52 AM तक उपरांत मघा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्लेशा नक्षत्र के देवता सर्प देव एवं नक्षत्र के स्वामी बुध देव जी है।
⚜️ योग – सिद्धि योग 02:26 AM तक, उसके बाद व्यातीपात योग
प्रथम करण : गर – 06:08 ए एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 06:56 पी एम तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:13 बजे से 16:35 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:16:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:44:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:09 ए एम से 04:50 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:30 ए एम से 05:30 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:59 ए एम से 12:54 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:45 पी एम से 03:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:21 पी एम से 07:41 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:22 पी एम से 08:23 पी एम
💧 अमृत काल : 06:09 ए एम से 07:52 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, जुलाई 10 से 12:47 ए एम, जुलाई 10
सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:30 ए एम से 07:52 ए एम
❄️ रवि योग : 07:52 ए एम से 05:31 ए एम, जुलाई 10
🚓 यात्रा शकुन – दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकले।
👉🏽 आज का मंत्र – ॐ अं अंगारकाय नमः।
🤷🏻 आज का उपाय – हनुमान मंदिर में सिन्दुर का चोला चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय – खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – विनायक चतुर्थी (अंगारक योग)/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ रवि योग/ भारतीय क्रिकेटर सौरव गांगुली जन्म दिवस, अभिनेत्री और मॉडल संगीता बिजलानी जन्म दिवस, भारतीय अभिनेता संजीव कुमार जन्म दिवस, भूतपूर्व राज्यपाल सत्य नारायण सिन्हा जन्म दिवस, राष्ट्रीय डिम्पल दिवस, फैशन दिवस है, गाय प्रशंसा दिवस है, राष्ट्रीय डिम्पल दिवस है, राष्ट्रीय चीनी कुकी दिवस है, राष्ट्रीय NAIDOC सप्ताह
✍🏼 विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
वास्तु अनुसार इस जगह लगाएं घड़ी
*घर की दीवार पर पेंडुलम वाली घड़ी लगाने से लाभ होता है। दीवार पर पेंडुलम वाली घड़ी लगाने से समय अच्छा बना रहता है और जीवन से तकलीफें दूर होती हैं। पेंडुलम वाली घड़ी को घर के ड्राइंग रूम में लगाना चाहिए। इसके साथ ही घड़ी का सही आकार होना भी जरूरी है।
इस आकार की लगानी चाहिए घड़ी
वास्तु शास्त्र के अनुसार गोल, चौकोर, अंडाकार या आठ व छः भुजाओं वाली घड़ी लगानी चाहिए। इससे सकारात्मकता बढ़ती है। इसलिए घड़ी खरीदते समय घड़ी के आकार का पूरा ध्यान रखें।
🔏 *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
त्रिफला: त्रिफला कब्ज़ के विश्वसनीय और प्रभावी उपचारों में से एक है। त्रिफला में ग्लाइकोसाइड होता है जिसमें लैक्सटिव गुण होते हैं जो मल त्याग को आसान बनाते हैं।
भुनी हुई सौंफ: एक चम्मच भुनी हुई सौंफ एक गिलास गर्म पानी के साथ रात को सोते समय लेने से हल्का जुलाब हो सकता है। सौंफ़ के बीजों में पाए जाने वाले वोलेटाइल तेल गैस्ट्रिक एन्ज़ाइम्स के उत्पादन को बढ़ावा देकर पाचन बेहतर करने में मदद कर सकते हैं।
कब्ज़ रोकने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है वात संतुलन आहार का पालन करना। ठंडे खाद्य पदार्थ और पेय, सूखे फल, सलाद और अधिकांश बीन्स से दूर रहें। गर्म खाद्य पदार्थ, गर्म पेय और अच्छी तरह से पकी हुई सब्जियाँ का सेवन बढ़ाएं।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
बदन के दर्द में कपूर और सरसों का तेल:-10 ग्राम कपूर, 200 ग्राम सरसों का तेल- दोनों को शीशी में भरकर मजबूत ठक्कन लगा दें तथा शीशी धूप में रख दें। जब दोनों वस्तुएँ मिलकर एक रस होकर घुल जाए तब इस तेल की मालिश से नसों का दर्द, पीठ और कमर का दर्द और, माँसपेशियों के दर्द शीघ्र ही ठीक हो जाते हैं।
जोड़ों के दर्द के लिये बथुए का रस:- बथुआ के ताजा पत्तों का रस पन्द्रह ग्राम प्रतिदिन पीने से गठिया दूर होता है। इस रस में नमक-चीनी आदि कुछ न मिलाएँ। नित्य प्रातः खाली पेट लें या फिर शाम चार बजे। इसके लेने के आगे पीछे दो-दो घंटे कुछ न लें। दो तीन माह तक लें।
सर्दी बुखार और साँस के पुराने रोगों के लिये तुलसी:- तुलसी की 21 पत्तियाँ स्वच्छ खरल या सिल बट्टे (जिस पर मसाला न पीसा गया हो) पर चटनी की भाँति पीस लें और 10 से 30 ग्राम मीठे दही में मिलाकर नित्य प्रातः खाली पेट तीन मास तक खाएँ। दही खट्टा न हो। यदि दही माफिक न आये तो एक-दो चम्मच शहद मिलाकर लें। छोटे बच्चों को आधा ग्राम तुलसी की चटनी शहद में मिलाकर दें। दूध के साथ भूलकर भी न दें। औषधि प्रातः खाली पेट लें। आधा एक घंटे पश्चात नाश्ता ले सकते हैं।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌸
आज विनायक चतुर्थी है । प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी कहते है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना, विनायक चतुर्थी का व्रत सभी प्रकार के मनोरथ पूर्ण करता है।
अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी तो पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।
विनायक चतुर्थी की पूजा अमूमन दोपहर काल में की जाती है।
आज गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, लड्डुओं या गुड़ का भोग लगाकर “ॐ गण गणपतये नम:” मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।
गणेश जी को मोदक / लड्डू, लाल रंग के फूल, दुर्वा (दूब), शमी-पत्र, और केला अति प्रिय है, बुधवार और चतुर्थी को गजानन को यह वस्तुएं अर्पित करने से जीवन में शुभ समय आता है ।
चतुर्थी को गणेश जी की आराधना से किसी भी कार्य में विघ्न नहीं आते है ।
चतुर्थी तिथि को रिक्ता तिथि कहते है इस दिन शुभ कार्यो का प्रारम्भ शुभ नहीं समझा जाता है ।
किसी भी पक्ष की चतुर्थी तिथि में मूली और बैंगन का सेवन करना मना है। चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है, और चतुर्थी को बैगन खाने से रोग बढ़ते है ।
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।
शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।

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