14 जुलाई 2024: दुर्गाष्टमी के दिन बन रहे 3 विशेष योग, व्रत रखने से घर में आएगी खुशहाली; जानें इसका महत्व और शुभ मुहूर्त एवं पूजा विधि
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
. ◈〣• जय माता दी •❥
👣 14 जुलाई 2024: दुर्गाष्टमी के दिन बन रहे 3 विशेष योग, व्रत रखने से घर में आएगी खुशहाली; जानें इसका महत्व और शुभ मुहूर्त एवं पूजा विधि
🔘 HIGHLIGHTS
🔸 यह पर्व हर माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।
🔸 इस दिन जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा की पूजा की जाती है।
🔸 मां दुर्गा के शरणागत रहने से सभी मनोकामना अवश्य ही पूर्ण होती हैं।
👉🏽 धार्मिक मान्यता के अनुसार, हर एक माह की प्रत्येक तिथि किसी न किसी देवी-देवताओं को समर्पित होती है, जिस दिन खासतौर पर उनकी उपासना की जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, प्रत्येक मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाता है। मासिक दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूजा की जाती है। इसी के साथ व्रत भी रखा जाता है। चलिए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से मासिक दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूजा विधि और माता को प्रसन्न करने के उपायों के बारे में।
⚛️ मां दुर्गा की पूजा का शुभ मुहूर्त
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, इस बार शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 13 जुलाई को दोपहर 03 बजकर 06 मिनट पर होगा, जिसका समापन अगले दिन 14 जुलाई 2024 को शाम 05 बजकर 26 मिनट पर होगा। ऐसे में मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत 14 जुलाई 2024 को रखा जाएगा। 14 जुलाई को विजय मुहूर्त दोपहर 02:45 से लेकर 03:40 मिनट तक है। इस दौरान आप मां दुर्गा की आराधना कर सकते हैं।
🪐 शुभ योग
आषाढ़ गुप्त नवरात्र की अष्टमी तिथि पर सिद्धि और शिववास का योग बन रहा है। इस दिन सिद्धि योग का निर्माण सुबह 06 बजकर 16 मिनट से हो रहा है। वहीं, शिववास योग संध्याकाल 05 बजकर 25 मिनट से हो रहा है। जबकि, रवि योग देर रात 10 बजकर 06 मिनट से हो रहा है, जो पूर्ण रात्रि तक है। इन योग में मां दुर्गा की पूजा करने से हर मनोकामना अवश्य ही पूर्ण होगी।
🍱 दुर्गा अष्टमी व्रत के दौरान अनुष्ठान:
दुर्गा अष्टमी के दिन, भक्त देवी दुर्गा की पूजा करते हैं। वे सुबह जल्दी उठते हैं और देवी को फूल, चंदन और धूप के रूप में कई तरह के प्रसाद चढ़ाते हैं। कुछ स्थानों पर, दुर्गा अष्टमी व्रत के दिन कुमारी पूजा भी की जाती है। हिंदू 6-12 वर्ष की आयु की लड़कियों को देवी दुर्गा के कन्या (कुंवारी) रूप के रूप में पूजते हैं। देवी को चढ़ाने के लिए विशेष ‘नैवेद्यम’ तैयार किया जाता है।
उपवास इस दिन का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। दुर्गा अष्टमी व्रत का पालन करने वाला व्यक्ति पूरे दिन कुछ भी खाने या पीने से परहेज़ करता है। यह व्रत पुरुष और महिला दोनों द्वारा समान रूप से रखा जाता है। दुर्गा अष्टमी व्रत आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने और देवी दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए रखा जाता है। कुछ भक्त केवल दूध पीकर या फल खाकर व्रत रखते हैं। इस दिन मांसाहारी भोजन और शराब का सेवन सख्त वर्जित है। दुर्गा अष्टमी व्रत का पालन करने वाले को फर्श पर सोना चाहिए और आराम और विलासिता से दूर रहना चाहिए।
पश्चिमी भारत के कुछ क्षेत्रों में जौ के बीज बोने की भी प्रथा है। जब बीज 3-5 इंच की ऊंचाई तक पहुंच जाते हैं तो उन्हें देवी को चढ़ाया जाता है और बाद में परिवार के सभी सदस्यों में वितरित किया जाता है।
इस दिन भक्त विभिन्न देवी मंत्रों का जाप करते हैं। इस दिन दुर्गा चालीसा का पाठ करना भी फलदायी माना जाता है। पूजा के अंत में, भक्त दुर्गा अष्टमी व्रत कथा भी पढ़ते हैं।
हिंदू भक्त पूजा अनुष्ठान पूरा करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा प्रदान करते हैं।
दुर्गा अष्टमी व्रत के पालनकर्ता शाम को शक्ति मंदिरों में जाते हैं। महाष्टमी के दिन विशेष पूजा की जाती है, जिसमें हजारों भक्त शामिल होते हैं।
🧾 माँ दुर्गा पूजा-विधि
➡️ स्नान आदि कर मंदिर की साफ सफाई करें
➡️ माता दुर्गा का जलाभिषेक करें
➡️ माँ दुर्गा का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें_
➡️ अब माता को लाल चंदन, सिंदूर, शृंगार का समान और लाल पुष्प अर्पित करें
➡️ मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
➡️ पूरी श्रद्धा के साथ माता दुर्गा की आरती करें
➡️ माता को भोग लगाएं
➡️ अंत में क्षमा प्रार्थना करें
👸🏻 माता दुर्गा को प्रसन्न करने के उपाय
माता दुर्गा का लाल रंग अति प्रिय है। इसलिए मासिक दुर्गाष्टमी के दिन लाल रंग के कपड़े धारण करें। इससे आपको मां की विशेष कृपा प्राप्त होगी।
मासिक दुर्गाष्टमी के दिन माता दुर्गा को बर्फी, पूरी, चने और हलवे का भोग लगाना शुभ होता है। इससे मां प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूरा करती हैं।
दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा को एक चांदी का सिक्का जरूर अर्पित करें। व्रत का पारण करने के बाद उस सिक्के को घर की तिजोरी में छुपाकर रख दें। इस उपाय को करने से आपको व आपके परिवारवालों को माता दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होगी, जिससे आर्थिक तंगी धीरे-धीरे दूर होने लगेगी।
माता दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए मासिक दुर्गाष्टमी के दिन मिट्टी से बना घर खरीदकर घर लाएं। इससे घर में सुख-शांति, समृद्धि, धन-धान्य और खुशहाली का वास होगा।
🗣️ पूजा के समय सुनें ये व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार देवी दुर्गा के भक्त राजा इंद्र को ऋषि विश्वामित्र ने श्राप दे दिया था. श्राप के कारण इंद्र अपना राज्य और शक्ति खो बैठे थे. इंद्र देव ने देवी दुर्गा की पूरी श्रृद्धा के साथ आराधना की. इससे देवी दुर्गा प्रसन्न हुईं और इंद्र को श्राप से मुक्ति दिलाई. इंद्र ने देवी दुर्गा का आभार व्यक्त करते हुए उनसे वरदान मांगा. देवी दुर्गा ने इंद्र को वरदान दिया कि प्रत्येक वर्ष वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को उनकी पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी. तभी से वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी का त्योहार मनाया जाने लगा.
🫵🏼 दुर्गा अष्टमी व्रत का महत्व:
संस्कृत भाषा में ‘दुर्गा’ शब्द का अर्थ है ‘अपराजेय’ और ‘अष्टमी’ का अर्थ है ‘आठ दिन’। हिंदू किंवदंतियों के अनुसार देवी दुर्गा के उग्र और शक्तिशाली रूप, जिन्हें ‘देवी भद्रकाली’ के रूप में जाना जाता है, का अवतार हुआ था। दुर्गा अष्टमी का दिन ‘महिषासुर’ नामक राक्षस पर देवी दुर्गा की जीत के रूप में मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति पूरी निष्ठा के साथ दुर्गा अष्टमी व्रत का पालन करता है, उसके जीवन में खुशियाँ और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।


