नाला बांध निर्माण कार्य जल संसाधन विभाग ने फर्जी बिल लगाकर लाख रुपए किया भ्रष्टाचार

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
जबेरा । जनपद पंचायत जबेरा अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत भाट खमरिया नाला बांध निर्माण कार्य लाखों रुपए का घोटाला तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की जन्म दर्शनी यात्रा दिनांक 28 जुलाई 2007 को ग्राम पंचायत भाट खमरिया से निकली जिसमें ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री जी ज्ञापन सौंपा कर भाट खमरिया के गंगा पारा नाला पर बांध की मांग रखी जिसे मुख्यमंत्री जी आवेदन क्रमांक 1912 पर अपनी स्वीकृति प्रदान की इस निर्माण कार्य को मध्य प्रदेश शासन के रोजगार गारंटी कार्यक्रम के अंतर्गत दिनांक 6 फरवरी 2008 को स्वीकृति प्रदान की गई जिसकी लागत 47.86 लाख स्वीकृत हुई इस कार्य को 2010 तक पूर्ण करना था निर्माण एजेंसी मुख्य कार्य पर अधिकारी जल संसाधन विभाग दमोह के द्वारा कार्य किया गया जल संसाधन विभाग द्वारा इस कार्य पर मजदूरी पर 25 लाख 29406 व्यय हुआ की राशि एवं सामग्री पर 21 लाख 3412 का ब्यय हुआ इस प्रकार कुल व्यय 46 लाख 32818 रुपए हुआ एस्टीमेट के अनुसार बांध की लंबाई 490 मीटर होना थी लेकिन मुश्किल से ढाई सौ मीटर लंबा बांध बना गया है ग्रामीण प्रत्यक्षदर्शी ज्ञानी यादव जिन्होंने बांध पर काम किया बताया कि इस बांध को मजदूरों के द्वारा मिट्टी डालकर बांध की मेड को बनाया गया है सामग्री के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ है ना पिचिंग भरी गई ना पत्थर ना सीमेंट ना रेत् ना मिट्टी सामग्री के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ लेकिन 21 लाख 3412 की राशि निकाली गई सामग्री पर गबन कर लिया गया बांध पूर्ण नहीं हो पाया था अधूरा ही काम रहा बांध टूटा पड़ा है।
जनशक्ति चेतन जिला अध्यक्ष सुजान सिंह लोधी ने बताया हमें ने बांध की मेड़ टूटी है जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने 21 लाख 3 हजार 412 रुपए का भ्रष्टाचार किया गया जिसकी जांच होना चाहिए उसे समय के बिल वाउचर क्रमांक देखा कर खरीदा कहा कि फर्जी बिल बनाने वाले पर भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएं। बांध बनाने का उद्देश्य 100 एकड़ की सिंचाई मवेशी एवं जानवरों को पानी लोगों को निस्तार के लिए पानी बांध निर्माण कार्य हुआ था लेकिन भ्रष्टाचार की भैट चढ़ गया 2012 में पुनरीक्षित एस्टीमेट बनाया गया जिसमें 92 लाख की राशि स्वीकृत हुई और यह कार्य कर आरईएस विभाग को दे दिया गया लेकिन आरईएस विभाग ने कार्य नहीं किया इस तरह कार्य आज भी अपूर्ण है।



