खेल स्टेडियम की दुर्दशा, उद्घाटन के पूर्व खंडहर में तब्दील, खेल प्रतिभाओ में भारी निराशा
रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । खेल एक ऐसी विधा है जिसके बिना जीवन की कल्पना करना बेकार है यदि हमे स्वस्थ चुस्त दुरुस्त चेतन्य रहकर जीना है तो खेल व्यायाम को अपनाना ही होगा, यह सब माहौल और सुविधाओं में निहित है, बडे ही खेद व गहन चिंता का विषय है की लोकतन्त्र की इस मजलिस में सब कुछ सामान्य होते हुए कुछ असामान्य परिस्थितियां हमारी नजरो से ओझल क्यों है यह यक्ष प्रश्न सभी के हृदय को सूल की तरह चुभ रहा हैं प्रश्न गम्भीर इसलिये है की यह सभी से जुडा हुआ है बात हम गौरझामर के खेल स्टेडियम की कर रहे है जो आज भी उदृघाटन के इन्तजार मे खडा हैं मजेदार बात तो यह है की इसके उद्घाटन की जल्दबाजी किसी ने नही दिखलाई, वरना होता यह है की काम भले ही शेष रह जाय लेकिन श्रेय लेने के चक्कर में उसका उद्घाटन जरुर करेंगे पूर्व विधायक डा भानुराणा के कार्यकाल मे बनाया गया करोडो की लागत का यह खेल स्टेडियम आज भी उदृघाटन के इंतजार मे जस का तस आधा अधूरा प्राचीन किले की भांति खंडहर स्वरुप मे खडा है इसके विकास उन्नयन व वैभवशाली बनाने के लिये आज तक कोई भी आगे नही आ रहा है देवरी क्षेत्र का दुर्भाग्य है की यहां पर रहली विधान सभा की तरह एक भी सर्वसुविधाजनक व आकर्षक स्टेडियम नही है गौरझामर मे टुर्नामेंट की दृष्टि से यह खेल मेंदान बनाया जा रहा था जिस पर युवा पीढी नाज कर रही थी लेकिन उनकी खुशी इंतजार मे ही काफूर हो गई बतादे कि खेल मेंदान के अभाव में यहां तमामखेल विधाये शून्य स्थिति में है यह तभी संभव है जब यहां के स्टेडियम को आधुनिक स्वरुप मिलेगा लोगो का कहना है की गौरझामर में दो शासकीय हायर सेकेण्डयर स्कूल व दर्जन भर से ज्यादा हाई स्कूल संचालित हैं। इनमे अध्ययनरत छात्रछात्राओ को खेलगतिविधियां का होना बहुत जरुरी है मप्र के मुख्यमंत्री डा मोहन यादव व खेल मंत्री शासन प्रशासन इस ओर शीघ्र ध्यान देगे।



