ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 16 सितम्बर 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 16 सितम्बर 2024
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – भाद्रपद मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – सोमवार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि 03:10 PM तक उपरांत चतुर्दशी
🖍️ तिथि स्वामी – त्रयोदशी तिथि के देवता हैं त्रयोदशी और शिव। त्रयोदशी में कामदेव की पूजा करने से मनुष्य उत्तम भार्या प्राप्त करता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र धनिष्ठा 04:33 PM तक उपरांत शतभिषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल हैं और देवता वसु हैं। इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देव अष्ट वसवाल हैं और राशि स्वामी शनि हैं।
⚜️ योग – सुकर्मा योग 11:41 AM तक, उसके बाद धृति योग
प्रथम करण : तैतिल – 03:10 पी एम तक
द्वितीय करण : गर – 01:29 ए एम, सितम्बर 17 तक वणिज
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:31:00 A.M से 09:49:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:54:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:06:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:33 ए एम से 05:20 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:57 ए एम से 06:07 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:51 ए एम से 12:40 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:19 पी एम से 03:08 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:25 पी एम से 06:48 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:25 पी एम से 07:35 पी एम
💧 अमृत काल : 07:08 ए एम से 08:35 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:52 पी एम से 12:39 ए एम, सितम्बर 17
💮 रवि योग : 04:33 पी एम से 06:07 ए एम, सितम्बर 17
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
🤷🏻 आज का उपाय-किसी विप्र को चांदी भेंट करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
❄️ पर्व एवं त्यौहार – श्री विश्वकर्मा पूजा/ पंचक/ ईद-ए-मिलाद-उन-नबी/ दरौंदा में पैगंबर मोहम्मद साहब जयन्ती, मैक्सिकन स्वतंत्रता दिवस, ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ लिखने वाले श्यामलाल गुप्त पार्षद जन्म दिवस, भारत रत्न एमएस सुब्बालक्ष्मी जन्म दिवस, विश्व ओजोन दिवस, क्रिकेट अंपायर रामचंद्र राव, जन्म दिवस, राष्ट्रीय कामकाजी माता-पिता दिवस, कार्मिक शिक्षा दिवस, अंतरराष्ट्रीय तटीय स्वच्छता दिवस, मलेशिया स्थापना दिवस, राष्ट्रीय हिन्दी दिवस (सप्ताह)
✍🏼 विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🏜️ Vastu tips 🗽
कमरे को दें ये रंग बच्चे जिस कमरे में पढाई करते हैं उसका कलर भी आपको सोच-समझकर रखना चाहिए। बच्चों के कमरे को कभी भी डार्क कलर से न रंगें, वास्तु में इसे सही नहीं माना जाता। इसलिए गलती से भी आपको बच्चों के कमरे को कभी काले, नीले या लाल रंग से नहीं रंगना चाहिए। इससे शिक्षा के क्षेत्र में बच्चे को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
पढ़ाई के कमरे के लिए ये दिशा सबसे शुभ बच्चों के पढ़ाई के कमरे की दिशा उत्तर-पूर्व होगी तो इससे बच्चे का मन पढ़ाई में लगेगा। इसके साथ ही उसकी बुद्धि भी तेज होगी। अगर आप गलत दिशा में बच्चों के पढ़ने का कमरा बनाते हैं तो इससे भी उनकी एकाग्रता भंग हो सकती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए नुकसानदायक सहजन की पत्तियां प्रेग्नेंट महिलाओं की सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक पीरियड्स के दौरान भी मोरिंगा की पत्तियों को खाने से बचना चाहिए।
पैदा हो सकती है उल्टी की समस्या कुछ लोगों को सहजन की पत्तियां सूट नहीं करती हैं। इस तरह के लोग अगर सहजन की पत्तियों को कंज्यूम करते हैं, तो उन्हें उल्टी या फिर मतली की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
गट हेल्थ पर पड़ सकता है बुरा असर अगर आपको अक्सर पेट से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है तो आपको सहजन की पत्तियों का सेवन नहीं करना चाहिए। दरअसल, मोरिंगा के पत्ते आपके डाइजेशन को खराब कर सकते हैं। जरूरत से ज्यादा सहजन की पत्तियों को कंज्यूम करना आपकी गट हेल्थ के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। इतना ही नहीं सहजन की पत्तियां लूज मोशन की समस्या का कारण भी बन सकती हैं।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
पुराना देशी गाय का घी या पंचगव्य नस्यधृत सुबह व रात को दोनो नाक में हल्का गर्म कर 2-2 बून्द डालकर धीरे से खीचने व इसके सेवन के बाद 1 घण्टे तक कुछ भी न सेवन करने से जड़मूल से नष्ट होता है।
जब भी नजला जुकाम सर्दी खाँसी सिरदर्द व माइग्रेन के दर्द का आभास हो उसी पल नाक में सरसोतेल की 2- 2 बूंद डालकर खिंचे व अजवायन को भूनकर भीमसेनी कपूर मिलाकर रुमाल की पोटली बनाकर सूंघते रहे इस प्रयोग से हर प्रकार के एलर्जी व वायरस के आक्रमण से बचते हैं।
केसर और चीनी को घी में भूनकर सूंघने से आधे सिर का दर्द ठीक होता है।
अदरक सूखी हो अथवा गीली, माइग्रेन के रोग में बहुत लाभ करती है । दिन भर में चार पाँच बार अदरक की गाँठ को चूसने से अथवा अदरक के चूर्ण का गरम पानी के साथ सेवन करने से दर्द की तीव्रता में बहुत आराम मिलता है ।
कनेर के पेड़ की पत्तियॉ छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें । इस चूर्ण को नाक में गहरी साँस के साथ सूँघने से खूब सारी छींके आती हैं और नाक से बहुत सारा पानी गिरता है । ऐसा होने से माइग्रेन के दर्द में तुरन्त आराम मिलता है । (माइग्रेन): दर्द सूर्य के निकलने तथा अस्त होने के साथ घटे-बढे़ उसे दूर करने के लिए 12 ग्राम गुड़ को 6 ग्राम घी के साथ मिलाकर सुबह सूर्योदय से पहले तथा रात को सोते समय खाएं।
📗 गुरु भक्ति योग
🕯️
जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि का सृजन कर यमराज को मृत्युदेव नियुक्त किया – प्रजा बढ़ने लगी तो यमराज ने ब्रह्मा जी से प्रार्थना की कि वो बिना किसी सहायक के ये कार्य नहीं कर सकते। तब ब्रहमदेव ने अपनी काया से एक सुंदर पुरूष उत्पन्न किया जो खड़ग, कलम ,दवात लिए हुए था। इनका नाम चित्रगुप्त रखा गया- चूँकि ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न हुए तो कायस्थ आदिपुरुष भी कहलाये।
गरुण पुराण के अनुसार ब्रह्मा जी से वायु उत्पन्न हुई- वायु से सूर्य और सूर्य से यमराज और चित्रगुप्त महाराज। तो इस क़ायदे से चित्रगुप्त महाराज यमराज के सहोदर भी है- असिस्टेंट भी है। गरुण पुराण चित्रगुप्तनगर का भी विवरण देती है।
चित्रगुप्त महाराज के दो विवाह हुए- पहली स्त्री सुशर्मा ऋषि की पुत्री थी- दूसरी मनु महाराज की पुत्री थी।
पहली स्त्री सुशर्मा पुत्री इड़ावती से आठ पुत्र हुए जिनके जातीय नाम थे- दूरध्वज, अंबस्थ, गौड़, निगम,कर्ण, अस्थाना, वाल्मीकि और कुलश्रेष्ठ।
दूसरी स्त्री मनुपुत्री नंदिनी से चार पुत्र हुए जिनके जातीय नाम थे- माथुर, भटनागर, सक्सेना (सुखसेन), श्रीवास्तव।
इन बारह पुत्रों को चित्रगुप्त महाराज ने विभिन्न ऋषियों का यजमान बना अलग अलग स्थानों में भेजा। श्रीनगर में वास करने वाली शाखा श्रीवास अर्थात् श्रीवास्तव कहलाई। मथुरा में वास करती वाली शाखा माथुर। सरयू तट पर निगम ग्राम में वास करने वाले निगम कहलाये। गौड़ देश में रहने वाले गौड़ कहलाये।
चित्रगुप्त महाराज की पूजा करने का फल भीष्मपितामह को मिला। राजा सौदास को भी इनकी पूजा का फल मिला। ऐसे अनेक विवरण पुराणो में है। ब्रिटिश काल में गोवा आदि में कुछ प्राचीन मंदिर भी थे जहां केवल चित्रगुप्त महाराज की पूजा होती थी।
महाभारत के अनुसार मांडव्य ऋषि के शाप के कारण यमराज को विदुर के रूप के जन्म लेना पड़ा था। इसी शाप की घटना पर मांडव्य ऋषि चित्रगुप्त महाराज पर भी कुपित हुए थे। लेकिन उनके क्षमा याचना करने पर ऋषि ने उन्हें शाप दिया कि उनके वंशज कलियुग व्यवस्न के अभ्यस्त होंगे। कदाचित् इसी चक्कर में मधुशाला का सृजन हुआ होगा।
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⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।

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