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Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 18 सितम्बर 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 18 सितम्बर 2024
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🌐 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351_

☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – भाद्रपद मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – बुधवार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि 08:04 AM तक उपरांत प्रतिपदा तिथि 04:19 AM तक उपरांत द्वितीया
✏️ तिथि स्वामी – पूर्णिमा तिथि के देवता हैं चंद्रमा। इस तिथि में चंद्रदेव की पूजा करने से मनुष्‍य का सभी जगह आधिपत्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वभाद्रपदा 11:00 AM तक उपरांत उत्तरभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वभाद्रपदा नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं।पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के देवता हैं, अज एकपाद। एक पैर वाला अजन्मा।
⚜️ योग – गण्ड योग 11:28 PM तक, उसके बाद वृद्धि योग
प्रथम करण : बव – 08:04 ए एम तक बालव – 06:11 पी एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 04:19 ए एम, सितम्बर 19 तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:56:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:04:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:34 ए एम से 05:21 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:57 ए एम से 06:08 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 02:17 पी एम से 03:06 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:22 पी एम से 06:46 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:22 पी एम से 07:33 पी एम
💧 अमृत काल : 03:51 ए एम, सितम्बर 19 से 05:15 ए एम, सितम्बर 19
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:52 पी एम से 12:39 ए एम, सितम्बर 19
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को हरे फल भेंट करें।
🌳 *वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ❄️ पर्व एवं त्यौहार – स्नान दान पूर्णिमा/ प्रतिपदा श्राद्ध/ आश्विन मास आरंभ/ महालयारंभ/ भागवत सप्ताह समाप्ति/ संन्यासी जनों का चतुर्मास्य समाप्त/ ईद-ए-मिलाद/ अन्तरराष्ट्रीय समान वेतन दिवस,भारत रत्न’ सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी भगवान दास स्मृति दिवस, प्रसिद्ध अभिनेत्री शबाना आज़मी जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी सारंगधर दास, स्मृति दिवस, राष्ट्रीय सीलिंग फैन दिवस, राष्ट्रीय चीज़बर्गर दिवस, राष्ट्रीय एचआईवी, एड्स और वृद्धावस्था जागरूकता दिवस, विश्व बांस दिवस ✍🏼 विशेष – पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है। पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है। इस पूर्णिमा तिथि के देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णिमा तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है। 🌷 *_Vastu tips* 🌸
मुरझा रहे हों घर में रखे पौधे अगर आपके घर में रखे पौधे मुरझा रहे हैं, खाद-पानी देने के बाद भी वो पनप नहीं पा रहे हैं तो इसका मतलब है कि आपके घर में वास्तु दोष हो सकता है। वास्तु दोष होने पर आप पौधों की कितनी भी देख रेख क्यों न करें वो फल-फूल नहीं पाते।
वास्तु दोष के कारण होती है सेहत खराब अगर आपकी या आपके घर के सदस्यों की तबीयत बार-बार खराब होती है, और बीमारियों के कारण आपका पैसा खर्च होता रहता है, तो समझ जाइए वास्तु दोष आपके घर में मौजूद है। इसके साथ ही वास्तु दोष के कारण सिर, जोड़ों या कमर का दर्द भी आपको सता सकता है।
दुर्घटनाएं होना अगर आपके साथ अचानक दुर्घटना होती है, आपको बार-बार बुरी खबरें सुनाई देती है तो ये भी वास्तु दोष होने का संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में आपको शारीरिक, मानसिक कष्ट झेलने पड़ सकते हैं और आपके साथ ही घर वालों के साथ भी अनहोनी हो सकती है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
गौर करने वाले लक्षण चिकनगुनिया के नए म्यूटेटिड वायरस की वजह से आपको अपने शरीर के अंदर अजीबोगरीब लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर आपकी नाक के आसपास कालापन नजर आ रहा है तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। आपको बता दें कि इस वैरिएंट का शिकार पेशेंट्स को डेंगू की तरह ही कम प्लेटलेट काउंट की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ये वायरस पक्षाघात का कारण भी बन सकता है।
जरूरी है डॉक्टर से कंसल्ट करना चिकनगुनिया में बुखार, जोड़ों में दर्द, सिर में दर्द, थकान और मतली जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं। अगर आपको अपने शरीर के अंदर इस तरह के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो आपको बिना देरी किए जल्द से जल्द किसी डॉक्टर से कंसल्ट कर लेना चाहिए। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिर्फ पुणे में ही नहीं बल्कि भारत के कई शहरों में चिकनगुनिया वायरस अपने पैर पसार रहा है।
🩹 आरोग्य संजीवनी
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विटामिन बी12 की कमी होने पर पेशाब में दिखने वाले संकेत?
शरीर में विटामिन बी12 की कमी होने पर ब्लैडर को सही संकेत मिलने में परेशानी होने लगती है, जिसकी वजह से मरीजों का पेशाब लीक हो सकता है। इस दौरान पेशाब को कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है। मुख्य रूप से खांसी या फिर किसी तरह का तनाव होने पर पेशाब लीक हो जाती है।
शरीर में विटामिन बी12 की कमी के कारण मरीजों को यूरिनरी रिटेंशन की परेशानी हो सकती है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति का ब्लैडर पूरी तरह से खाली नहीं हो पाता है। ऐसी स्थिति में मरीजों को बार-बार पेशाब करने की इच्छा होती है। ऐसी स्थिति में मरीजों को डॉक्टर की सही सलाह लेने की जरूरत हो सकती है।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
एक बार राजा अज जंगल में भ्रमण करने के लिए गए थे तो उन्हें एक बहुत ही सुंदर सरोवर दिखाई दिया उस सरोवर में एक कमल का फूल था जो अति सुंदर प्रतीत हो रहा था !
उस कमल को प्राप्त करने के लिए राजा अज सरोवर में चले गए किंतु यह क्या राजा अज जितना भी उस कमल के पास जाते वह कमल उनसे उतना ही दूर हो जाता और राजा अज उस कमल को नहीं पकड़ पाया !
अंततः आकाशवाणी हुई कि हे राजन आप नि:संतान है आप इस कमल के योग्य नहीं है इस भविष्यवाणी ने राजा अज के हृदय में एक भयंकर घात किया था ! राजा अज अपने महल में लौट आए और चिंता ग्रस्त रहने लगे क्योंकि उन्हें संतान नही थी जबकि वह भगवान शिव के परम भक्त थे !
भगवान शिव ने उनकी इस चिंता को ध्यान में लिया और उन्होंने धर्मराज को बुलाया और कहा तुम किसी ब्राह्मण को अयोध्या नगरी पहुँचाओ जिससे राजा अज को संतान की प्राप्ति के आसार हो !
दूर पार एक गरीब ब्राह्मण और ब्राह्मणी सरयू नदी के किनारे कुटिया बनाकर रहते थे ! एक दिन वे ब्राह्मण राजा अज के दरबार में गए और उनसे अपनी दुर्दशा का जिक्र कर भिक्षा मांगने लगे !
राजा अज ने अपने खजाने में से उन्हें सोने की अशर्फियां देनी चाही लेकिन ब्राह्मण नहीं कहते हुए मना कर दिया कि यह प्रजा का है आप अपने पास जो है उसे दीजिए तब राजा अज ने अपने गले का हार उतारा और ब्राह्मण को देने लगे किंतु ब्राह्मण ने मना कर दिया कि यह भी प्रजा की ही संपत्ति है !
इस प्रकार राजा अज को बड़ा दुख हुआ कि आज एक गरीब ब्राह्मण उनके दरबार से खाली हाथ जा रहा है तब राजा अज शाम को एक मजदूर का बेश बनाते हैं और नगर में किसी काम के लिए निकल जाते है !
चलते -चलते वह एक लौहार के यहाँ पहुंचते है और अपना परिचय बिना बताए ही वहां विनय कर काम करने लग जाते हैं पूरी रात को हथौड़े से लोहे का काम करते हैं जिसके बदले में उन्हें सुबह एक टका मिलता है !
राजा एक टका लेकर ब्राह्मण के घर पहुंचते हैं लेकिन वहां ब्राह्मण नहीं था उन्होंने वह एक टका ब्राह्मण की पत्नी को दे दिया और कहा कि इसे ब्राह्मण को दे देना !
जब ब्राह्मण आया तो ब्राह्मण की पत्नी ने वह टका ब्राह्मण को दिया और ब्राह्मण ने उस टका को जमीन पर फेंक दिया तभी एक आश्चर्यजनक घटना हुई ब्राह्मण ने जहां टका फेंका था वहां गड्ढा हो गया ब्राह्मण ने उस गढ्ढे को और खोदा तो उसमें से सोने का एक रथ निकला तथा आसमान में चला गया
इसके पश्चात ब्राह्मण ने और खोदा तो दूसरा सोने का रथ निकला और आसमान की तरफ चला गया इसी प्रकार से नौ सोने के रथ निकले और आसमान की तरफ चले गए और जब दसवाँ रथ निकला तो उस पर एक बालक था और वह रथ जमीन पर आकर ठहर गया !
ब्राह्मण उस बालक को लेकर राजा अज के दरबार में पहुंचे और कहा राजन – इस पुत्र को स्वीकार कीजिए यह आपका ही पुत्र है जो एक टका से उत्पन्न हुआ है तथा इसके साथ में सोने के नौ रथ निकले जो आसमान में चले गए जबकि यह बालक दसवें रथ पर निकला इसलिए यह रथ तथा पुत्र आपका है इस प्रकार से दशरथ जी का जन्म हुआ था !
महाराज दशरथ का असली नाम मनु था और ये दसों दिशाओं में अपना रथ लेकर जा सकते थे इसीलिए दशरथ नाम से प्रसिद्ध हुये !!
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⚜️ हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है। आज शरद पूर्णिमा है और आज ही के दिन सांसारिक जीवन एवं आध्यात्मिक जीवन का अंतर भगवान श्रीकृष्ण ने वृन्दावन में गोपियों के साथ रास रचाकर बताया था। इसीलिये आज के दिन देश के बहुधा क्षेत्रों में रात्रि में लोग नृत्य-गीतादि के आयोजनों के साथ खुले आसमान के तले खीर बनाकर भगवान को समर्पित कर उसे प्रसाद की तरह मिल-बाँटकर खाते हैं। ऐसी मान्यता है, कि इस रात्रि आसमान से चन्द्रमा अपनी किरणों के साथ अमृत की वर्षा करता है। जिनकी कुण्डली में चन्द्रमा की दशा चल रही हो उसे पूर्णिमा तिथि में उपवास रखना अर्थात व्रत करना चाहिये। जिनके बच्चे कफ रोगी हों अर्थात सर्दी, जुकाम, खाँसी और निमोनियाँ समय-समय पर होती रहती हो उनकी माँ को वर्षपर्यन्त पूर्णिमा का व्रत करना और चन्द्रोदय के बाद चंद्रार्घ्य देकर व्रत तोड़ना चाहिये।

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