कब है साल की आखिरी एकादशी, जानिए सफला एकादशी की पूजा विधि और महत्व

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🔮 कब है साल की आखिरी एकादशी, जानिए सफला एकादशी की पूजा विधि और महत्व
👉🏼 भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के लिए वर्ष में 24 एकादशी के व्रत रखे जाते हैं. यह व्रत हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर रखा जाता है. इस वर्ष की अंतिम एकादशी सफला एकादशी है. माना जाता है कि इस व्रत को रखने से हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है. पूरे वर्ष रखे जाने वाले एकादशी व्रतों का अपना-अपना महत्व है. इनमें सफला एकादशी के व्रत को बहुत शुभ माना गया है. सफला एकादशी का व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है. इस व्रत से लंबे समय से रुके हुए काम भी पूरे हो जाते हैं. शास्त्रों में सफला एकादशी को सफलता प्रदान करने वाला व्रत बताया गया है. आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से कब रखा जाएगा सफला एकादशी का व्रत और कैसे की जाती है एकादशी की पूजा.
⚛️ कब है सफला एकादशी
पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को सफला एकादशी का व्रत रखा जाता है. इस बार की पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 25 दिसंबर, बुधवार को रात 10 बजकर 29 मिनट पर शुरू होगी और 27 दिसंबर, शुक्रवार को रात 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगी. ऐसे में सफला एकादशी का व्रत 26 दिसंबर गुरुवार को रखा जाएगा.
💮 सफला एकादशी का शुभ योग
26 दिसंबर गुरुवार को सफला एकादशी के दिन सुकर्मा योग का निर्माण होने वाला है. यह रात्रि 10 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. सफला एकादशी व्रत के दिन शाम 6 बजकर 9 मिनट तक स्वाती नक्षत्र रहेगा. इसके साथ ही दोपहर 12 बजकर 1 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक अभिजित मुहूर्त रहेगा. सफला एकादशी व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 12 मिनट से सुबह 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. इस समय भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा पूरे विधि-विधान से की जा सकती है.
💁🏻 सफला एकादशी की पूजा विधि
सफला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से प्रभु की कृपा से हर कार्य मे सफलता प्राप्त की जा सकती है. इस दिन प्रात: काल उठकर भगवान विष्णु का स्मरण कर व्रत का संकल्प करें. स्नान आदि के बाद पूजा की तैयारी करें. इसके लिए चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. भगवान को गंगा जल से स्नान करवनाकर नए वस्त्र और तिलक लगाएं. भगवान विष्णु को पीले रंग के फूल, फल, धूप, दीप और चंदन अर्पित करें. उन्हें दूध, दही, घी, शहद और चीनी से तैयार पंचामृत का भोग लगाएं. पंचामृत तैयार करते समय उसमें तुलसी के पत्ते जरूर डालें. विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और सफला एकादशी व्रत कथा का पाठ करें. भगवान विष्णु की आरती करें और पूजा के दौरान हुई भूलों के लिए क्षमा मांग लें. लोगों को प्रसाद बांटें और स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें.
💁🏻♀️ नियम-
एकादशी पर ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, इस दिन स्त्रीसंग वर्जित है।
अपने स्वार्थ के लिए किसी भी दूसरे व्यक्ति को जानबूझ कर दुख देने से श्री विष्णु नाराज होते हैं। इसका अंत दुखद होता है।
एकादशी के दिन पान खाना भी वर्जित माना गया है।
इस दिन सात्विक आचार-विचार रख प्रभु भक्ति में मन लगाना चाहिए।
परनिंदा यानी दूसरों की बुराई नहीं करना चाहिए।
एकादशी पर पूरी रात जागकर भगवान विष्णु की भक्ति करनी चाहिए, सोना नहीं चाहिए।
इस दिन चोरी तथा हिंसा करना पाप कर्म माना गया है।
🤷🏻 फायदे-
इस दिन भगवान श्री विष्णु तथा धन की देवी माता लक्ष्मी का पूजन विधि-विधान से करने से जीवन में खुशियां, सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य का वरदान मिलता है।
इस एकादशी का व्रत करने से जीवन के सभी मनोरथ सफल होते हैं।
सफला एकादशी के व्रत कथा पढ़ने या सुनने अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है तथा जाने-अनजाने में हुए पाप दूर होकर वैकुंठ मिलता है।
रात्रि जागरण करने से पाप, संकट से मुक्ति तथा जीवन में खुशियों का संचार होता है
सफला एकादशी व्रत से कई वर्षों की तपस्या से ज्यादा फल मिलता है तथा सभी सभी दुखों का नाश होता है।
🗣️ सफला एकादशी कथा
प्राचीन काल में चंपावती नगर में राजा महिष्मत राज करते थे. राजा के 4 पुत्र थे, उनमें लुम्पक बड़ा दुष्ट और पापी था. वह पिता के धन को कुकर्मों में नष्ट करता रहता था. एक दिन दुःखी होकर राजा ने उसे देश निकाला दे दिया, लेकिन फिर भी उसकी लूटपाट की आदत नहीं छूटी. एक समय उसे 3 दिन तक भोजन नहीं मिला. इस दौरान वह भटकता हुआ एक साधु की कुटिया पर पहुंच गया. सौभाग्य से उस दिन सफला एकादशी थी.
महात्मा ने उसका सत्कार किया और उसे भोजन दिया. महात्मा के इस व्यवहार से उसकी बुद्धि परिवर्तित हो गई. वह साधु के चरणों में गिर पड़ा. साधु ने उसे अपना शिष्य बना लिया और धीरे-धीरे ल्युक का चरित्र निर्मल हो गया. वह महात्मा की आज्ञा से एकादशी का व्रत रखने लगा. जब वह बिल्कुल बदल गया तो महात्मा ने उसके सामने अपना असली रूप प्रकट किया. महात्मा के वेश में स्वयं उसके पिता सामने खड़े थे. इसके बाद लुम्पक ने राज-काज संभालकर आदर्श प्रस्तुत किया और वह आजीवन सफला एकादशी का व्रत रखने लगा.


