धार्मिक

जैन चैत्यालय में मंत्रोच्चार के साथ की वेदी शुद्वी

भव्य घटयात्रा निकाल कर कार्यक्रम स्थल पर विराजमान की गई
3 दिनी वेदीे प्रतिष्ठा कार्यक्रम के पूर्व बताया भावो के अनुसार कर्म का बंध होता हैं

सिलवानी । नगर में तारण तरण दिगंबर जैन समाज के द्वारा तीन दिनी श्री जिनवाणी जी अस्थाप, कलषा रोहण, वेदी प्रतिष्ठा, तिलक महा महोत्सव का आयो जन किया जा रहा है। कार्यक्रम के आरंभ होने से पूर्व गुरुवार को बाल ब्रम्हचारी आत्मानंद जी महाराज, शांतानंद जी महाराज, बाल ब्रम्हचारिणी दीदियों व साधक संघ के सानिध्य में भव्य घटयात्रा निकाली गई।
नगर में दोपहर के समय विषाल घटयात्रा व निकाली गई। जो कि तारण तरण जैन चैत्यालय से प्रारंभ हुई। तथा होली चौक, बुधवारा बाजार, आजाद मार्केट, गांधी चौक, बजरंग चौराहा होती हुई कार्यक्रम स्थल मॉ कर्मा मैदान पहुंची। घटयात्रा में महिला सिर पर मंगल कलश रखे हुई शामिल हुई। इसके अतिरिक्त गाजे बाजे के साथ निकाली गई यात्रा में समाजजन सिर पर श्रद्धा श्रीमद् जिन तारण तरण मंडला चार्य महाराज के द्वारा लिखित ग्रंथ मॉ जिनवाणी को रखे हुए जयकारा लगाते हुए चल रहे थे। कार्यक्रम स्थल पर स्वर्ण जड़ित वेंदी पर मंत्रोच्चार के बीच मॉ जिनवाणी को विराजमान किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहें। यहां पर प्रतिष्ठाचार्य पंडित नीलेश कुमार सोहागपुर तथा अनिल जैन के द्वारा अनुष्ठान संपन्न कराया गया।
सुबह के समय तारण तरण जैन चैत्यालय में प्रवचनों की कड़ी में बाल ब्रम्हचारी आत्मानंद जी महाराज तथा बाल ब्रम्हचारी शांतानंद जी महाराज ने बताया कि भावो के अनुसार ही व्यक्ति के कर्म का बंध होता है। भाव निर्मल होगें तो जीवन में विषुद्वी रहेगी यदि भाव गलत दिशा में जाते है तो जीवन में अंधकार प्रधान होता है। उन्होने बताया कि अज्ञानी जीव विषय भोगो में रत रह करा दुखी होता है बल्कि ज्ञानी जीव वैराग्य भावना का चिंतन कर सुखी रहते है। निमित्त एक ही होता है लेकिन भावो को संभालना होना चाहिए। भावो को उत्कृष्ट बनाओं। तभी भावना मंगल बनती है। व्यक्ति के तीन कर्तव्य होते है जो कि सामाजिक, धार्मिक, पारिवारिक होतेे है। संयम नियम का पालन करने वाले के जीवन में सदैव चमक बनी रहती है। व्यक्ति के मन में धर्म के प्रति वात्सल्य का भाव होना चाहिए। उन्होने बताया कि जिनवाणी को मात्र सुनो ही नही बल्कि उसमें वर्णित सूत्रों को आत्म भी करो। जिस समय जिस जीव का जैसा होना है वह उसकी योग्यता अनुसार हो रहा है। धर्म की साधना करो भावना भावो। लोक में सबसे सुंदर आत्मा ही हैं।
आज होगें विभिन्न कार्यक्रम-
तीन दिनी कार्यक्रम का आगाज विधिवत रुप में शुक्रवार से होगा आयोजन समिति के अध्यक्ष सवाई सेठ प्रवीण समैया मल्लाजी तथा कार्याध्यक्ष अषोक कुमार जैन मल्लू भाई ने बताया कि प्रथम दिवस शुक्रवार को प्रातः से देर रात तक विभिन्न कार्यक्रम संपन्न किए गए। जिसके तहत दसामायिक घ्यान, प्रभाती, मंत्रजप, तारण त्रिवेणी पाठ, मंदिर विधि, प्रवचन, ध्वज दान प्रभावना, आरती, मुख्य ध्वजारोहण, जिनवाणी अस्थाप, महाआरती, सांस्कृति कार्यक्रम आयोजित किए जाएगें।

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