जया एकादशी कब है, देखें शुभ मुहूर्त, तिथि और व्रत के नियम

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 जया एकादशी कब है, देखें शुभ मुहूर्त, तिथि और व्रत के नियम
🔘 HEADLINES
🔹 माघ महीने में गुप्त नवरात्र मनाया जाता है।
🔹 मां दुर्गा की पूजा करने से सुखों में वृद्धि होती है।
🔹 एकादशी तिथि पर लक्ष्मी नारायण की उपासना की जाती है
👉🏼 जया एकादशी का व्रत 8 फरवरी को रखा जाएगा और इस दिन भगवान विष्णु के साथ ही मां लक्ष्मी की भी पूरे विधि-विधान से पूजा की जाएगी। माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जया एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि जया एकादशी पर विष्णुजी की पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी कार्यों में आपकी जय होती है। यानी कि आपको सफलता प्राप्त होती है। इस व्रत में खानपान के नियमों का पालन बहुत जरूरी है। नियम न मानने से पूजा सफल नहीं होती और व्रत भी टूट सकता है। आइए आपको बताते हैं जया एकादशी की तिथि कब से कब तक है और साथ ही महत्व और व्रत के नियम भी जानिए।
🚩 जया एकादशी का व्रत कब है_
जया एकादशी का व्रत 8 फरवरी 2025, शनिवार को है। यह माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। एकादशी तिथि 7 फरवरी रात 9 बजकर 26 मिनट से शुरू होगी। 8 फरवरी रात 8 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए व्रत 8 फरवरी को रखा जाएगा। व्रत का पारण 9 फरवरी को किया जाएगा।
📖 जया एकादशी पूजा विधि
▪️ 08 फरवरी, शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और एकादशी व्रत-पूजा का संकल्प लें। जैसा व्रत करना चाहें, उसी के अनुसार संकल्प लें।
▪️ शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की तैयारी कर लें। घर का कोई हिस्सा अच्छी तरह साफ करें और गंगाजल छिड़ककर इसे पवित्र कर लें।
▪️ शुभ मुहूर्त में यहां लकड़ी का पटिया रखकर इसके ऊपर भगवान विष्णु का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। भगवान के चित्र पर हार चढ़ाएं।
▪️ शुद्ध घी का दीपक जलाएं और कुमकुम से तिलक भी करें। इसके बाद अबीर, गुलाल, फूल, चावल आदि एक-एक करके चढ़ाएं।
▪️ इस दिन भगवान को तिल विशेष रूप से चढ़ाएं। पूजा के दौरान ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप भी निरंतर करते रहें।
▪️ अपनी इच्छा अनुसार भगवान को भोग लगाएं, इसमें तुलसी के पत्ते जरूर रखें। पूजा के बाद आरती करें। प्रसाद भक्तों में बांट दें।
▪️ रात में सोए नहीं, भगवान का भजन या मंत्रों का जाप करते रहें। अगले दिन सुबह ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और व्रत का पारणा करें।
▪️ पारणा के बाद स्वयं भोजन करें। इस तरह जया एकादशी का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
🤷🏻♀️ जया एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं
जया एकादशी व्रत में खानेपीने को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन जरूरी है। पूरा लाभ पाने के लिए इन नियमों का पालन करें। व्रत के दौरान शकरकंद, कुट्टू के आटे से बनी रोटी खा सकते हैं। दूध, दही और फल भी खा सकते हैं। भगवान विष्णु को पंचामृत का भोग लगाएं। फिर उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करें। इस व्रत में बाहर की बनी मिठाइयों का प्रयोग न करें और न ही बाहर की बनी चीजें खाएं।
💁🏻♀️ जया एकादशी व्रत में क्या न खाएं जया एकादशी व्रत रखने वाले लोगों को इस दिन सिर्फ फलाहार का प्रयोग करना चाहिए। जो लोग व्रत नहीं रखते हैं उन्हें भी इस पवित्र दिन पर कुछ खाने-पीने की चीजों का परहेज रखना चाहिए। इस दिन चावल खाना मना है। अनाज और नमक भी नहीं खाना चाहिए। लहसुन, प्याज और मसूर दाल भी वर्जित हैं। इस दिन इन चीजों को खाने से बचेंगे और आपको श्रीहरि की कृपा प्राप्त होगी।
📑 जया एकादशी व्रत कथा
जया एकादशी की कथा का कथन और श्रवण भगवान श्री कृष्ण और पांडवों के मध्य हुए संवाद के माध्यम से हमें प्राप्त होता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार पांडव भगवान श्री कृष्ण से जया एकादशी व्रत की महिमा के बारे में जानकारी पाने की जिज्ञासा हेतु प्रश्न करते हैं कि हे मधुसूदन कृपा करके आप हमें जया एकादशी की कथा और उसके महत्व के बारे में बताने की कृपा करें जिसके महात्म्य को प्राप्त करके हम भी इस दुर्लभ कथा का अमृत पान कर पाएं।
तब भगवान श्री कृष्ण पांडवों की जिज्ञासा को शांत करने हेतु जया एकादशी कथा के बारे में विस्तार पूर्वक उनसे कहते हैं कि ” माघ माह जो अमृत के समान फल देने वाला समय है इस माह के कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी के पश्चात जया एकादशी का आगमन होता है। माघ माह में आने वाले शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी के नाम से पुकारा जाता है। जया एकादशी का व्रत एवं कथा का श्रवण करने से व्यक्ति पिशाच योनि से मुक्ति पाता है और पापों का शमन होता है।



