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12 फ़रवरी 2025 कब है कुम्भ संक्रांति, इस तरह प्राप्त करें सूर्य देव की कृपा

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🔮 12 फ़रवरी 2025 कब है कुम्भ संक्रांति, इस तरह प्राप्त करें सूर्य देव की कृपा
HIGHLIGHTS
◼️ सूर्य देव के राशि में प्रवेश करने पर मनाई जाती है संक्रांति।
◼️ कुम्भ संक्रांति पर दान करने से प्रसन्न होते हैं सूर्य देव।
◼️ संक्रांति पर पवित्र नदी में स्नान से मिलता है विशेष फल।
🌎 हिंदू धर्म के शास्त्रों में कुम्भ संक्रांति को एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण दिन माना गया है। यह दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। इस दिन भगवान सूर्य कुम्भ राशि में प्रवेश करते हैं । इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। कुम्भ संक्रांति के अवसर पर भगवान सूर्य की पूजा और उपासना का विशेष महत्व है, और इस दिन व्रत भी रखा जाता है।
🧾 धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुम्भ संक्रांति के दिन भगवान सूर्य की पूजा करने और उन्हें अर्घ्य अर्पित करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। भगवान सूर्य की कृपा से व्यक्ति को स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है, जिससे जीवन में खुशहाली और करियर में सफलता बनी रहती है। इस दिन भगवान सूर्य को अर्घ्य देते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है।
⚛️ कुम्भ संक्रांति शुभ मुहूर्त
इस साल कुम्भ संक्रांति का पर्व बुधवार, 12 फरवरी 2025 यानी माघ पूर्णिमा के दिन मनाया जा रहा है। साथ ही इस दिन पर महाकुंभ में पांचवा अमृत स्नान भी किया जाएगा। इस दौरान शुभ मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहेंगे –
कुम्भ संक्रांति पुण्य काल – दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से शाम 06 बजकर 09 मिनट तक
कुम्भ संक्रांति महा पुण्य काल – दोपहर 04 बजकर 18 मिनट से शाम 06 बजकर 09 मिनट तक
कुम्भ संक्रांति का क्षण – रात 11 बजकर 04 मिनट पर
📖 कुम्भ संक्रांति पूजा विधि

👉🏼 इस दिन भक्त सुबह जल्दी उठें और पवित्र नदियों में स्नान करने जाएं।
👉🏼 जो लोग गंगा नदी में स्नान करने में असमर्थ हैं, वे घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल डालकर स्नान कर सकते हैं।
👉🏼 भगवान सूर्य को अर्घ्य दें और उनके मंत्रों का जाप करें।
👉🏼 इस दिन धार्मिक कार्य जैसे – मंत्र जाप, पवित्र पुस्तकों व ग्रंथों का पाठ और यज्ञ करें।
👉🏼 इस दिन दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है, इसलिए इस प्रकार के कार्यों में अवश्य शामिल हों।
👉🏼 इस दिन तामसिक चीजों से परहेज करें।
👉🏼 इस तिथि पर सात्विकता का पालन करें।
👉🏼 इस दिन अपने पितरों और बड़ों का आशीर्वाद लें।
🗣️ कुम्भ संक्रांति पूजा मंत्र
ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ।।
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर।।
💰 कुम्भ संक्रांति पर इन चीजों का न करें दान
🔹 इस दिन भूलकर भी फटे पुराने वस्त्रों का दान नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि फटे पुराने वस्त्रों का दान करने से शनिदेव रुष्ठ हो जाते हैं.
🔹 इस दिन तेल का दान करना बहुत ही अशुभ माना जाता है. इसलिए इस दिन तेल का दान करने से बचना चाहिए.
🔹 इस दिन लोहे की चीजों का दान नहीं करना चाहिए. लोहे की चीजों का दान इन दिन शुभ नहीं होता.
👉🏼 इन चीजों का करें दान
▪️ इस दिन गुड़ का दान करना चाहिए. इससे कुंडली में भगवान सूर्य मजबूत होते हैं.
▪️ इस दिन तिल का दान करना बहुत ही शुभ माना गया है. इससे शनिदेव के बुरे प्रभाव खत्म होते हैं.
▪️ इस दिन अन्न, धन, खिचड़ी और सुहाग सामग्री का दान करना चाहिए. इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
🤷🏻‍♀️ कुम्भ संक्रांति का महत्व
सनातन धर्म में संक्रांति तिथियों का आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। इस दिन स्नान, दान और पूजा-पाठ करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। तिल दान, सूर्य देव की पूजा और ब्राह्मणों को भोजन कराने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह दिन मकर और सिंह राशि वालों के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

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