क्राइम

खेत की फेंसिंग में फंसे दो तेंदुआ, एक की मौत, एक घायल, दो गिरफ्तार

ब्यूरो चीफ : संजय द्विवेदी

रायसेन । दिनांक 1 मार्च 25 में रायसेन वनमण्डल अंतर्गत परिक्षेत्र पश्चिम रायसेन के ग्राम गुलगांव के निकट सुबह 7 बजे के लगभग वन सीमा पर रामभरोसे आत्मज मूलचंद अहिरवार निवासी गुलगांव उम्र 58 वर्ष के खेत की फेंसिंग में लगे फंदे पर नर तेंदुआ उम्र लगभग 2 वर्ष फंस गया जिसकी सूचना मिलने पर उपवन मंडल अधिकारी रायसेन सुधीर पटले के नेतृत्व में समस्त स्टाफ पहुंचा। मामले की सघन छानबीन की गई। रेस्क्यू के दौरान चूंकि तेंदुए के कमर में फंदा का बहुत कसाव हो गया था इस दौरान तेंदुए की मृत्यु हो गई। तेंदुआ वन्य प्राणी अधिनियम 1972 की अनुसूची एक का प्राणी है जिसकी मृत्यु पर विधिवत पशु चिकित्सक की देखरेख में एव उपवन मंडल अधिकारी सुधीर पटले की उपस्थिति में पोस्टमार्टम किया गया प्रकरण की विवेचना में खेत मालिक रामभरोसे आत्मज मूलचंद अहिरवार निवासी गुलगांव को गिरफ्तार किया गया, अन्वेषण के दौरान एक अन्य आरोपी अनिल बेड़ियां पिता कैलाश उम्र 40 वर्ष निवासी सुखा करार को भी गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया , और वन्य प्राणी जंगली सुअर के शिकार की नियत से फंदा का लगाना स्वीकार किया। पूरी घटना का मुख्य वन संरक्षक राजेश खरे एवं वन मंडल अधिकारी विजय कुमार द्वारा संज्ञान लिया गया और उन्हीं की उपस्थिति में तेंदुए का विधिवत दाह किया गया।
इसी प्रकार का घटना क्रम परिक्षेत्र गढ़ी के ग्राम किटोरी में भी हुआ जिसमें भी फंदे में नर तेंदुआ उम्र लगभग 5 वर्ष फंदे में फंसा मिला, स्टाफ की सूचना पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की टीम, वन विहार की टीम और रायसेन वनमण्डल के स्टाफ द्वारा सुरक्षित तेंदुए को रेस्क्यू किया गया , जिसके अग्रिम उपचार के लिए वनविहार नेशनल पार्क भोपाल में ले जाया गया जहां पर इलाज प्रारंभ है। वन मंडल अधिकारी विजय कुमार द्वारा पूरे मामले की बारीकी से जांच के लिए धीरेंद्र पांडे वन परिक्षेत्र अधिकारी गढ़ी को निर्देशित किया और निर्देश दिए की अपनी टीम के साथ पूरे मामले की विस्तृत जांच कर शीघ्र ही दोषियों का पता लगाए।
सामान्य वन मण्डल रायसेन सभी ग्रामीण और कृषकों से अपील करता है कि फंदे लगाना, करेंट लगाना भी शिकार की परिभाषा में आता है, कोई भी इस तरह का प्रयास न करे, अगर फंदे , करेंट वायर खेतों या अन्य स्थलों में पाए जाते है, तब भी वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धाराओं के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया जाएगा जिसमें 3 से 7 वर्ष का कारावास है।

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