Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 27 मार्च 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 27 मार्च 2025
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 पिंगल संवत्सर विक्रम : 1946 क्रोधी
🌐 संवत्सर नाम पिंगल
🔯 शक सम्वत : 1946 (पिंगल संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5125
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – चैत्र मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – गुरुवार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 11:03 PM तक उपरांत चतुर्दशी
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र शतभिषा 12:33 AM तक उपरांत पूर्वभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु हैं।शतभिषा नक्षत्र के देवता वरुण हैं. वरुण वर्षा, ब्रह्मांडीय और स्थलीय जल, आकाश और पृथ्वी के देवता हैं
⚜️ योग – साध्य योग 09:24 AM तक, उसके बाद शुभ योग 05:56 AM तक, उसके बाद शुक्ल योग
⚡ प्रथम करण : गर – 12:27 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – 11:03 पी एम तक विष्टि
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:56:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:04:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:43 ए एम से 05:30 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:07 ए एम से 06:17 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:02 पी एम से 12:51 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:35 पी एम से 06:58 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:36 पी एम से 07:46 पी एम
💧 अमृत काल : 05:56 पी एम से 07:25 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:03 ए एम, मार्च 28 से 12:49 ए एम, मार्च 28
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शिवजी का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : भद्रा/प्रदोष व्रत/ शिवरात्रि/ मधुकृष्ण त्रयोदशी/ पंचक/ स्वतंत्रता सेनानी विमल प्रसाद चालिहा जयन्ती, विश्व थियेटर (रंगमंच) दिवस, राष्ट्रीय स्क्रिबल दिवस, अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान संपर्क दिवस, सर सैयद अहमद खान की पुण्यतिथि, अभिनेत्री प्रिया राजवंश स्मृति दिवस, प्रमुख नेता पंडित कांशीराम स्मृति दिवस, खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर जन्म दिवस, भारतीय राजनीतिज्ञ बनवारी लाल जोशी जयन्ती, स्वतंत्रता सेनानी पुष्पलता दास जयन्ती
✍🏼 तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🗺️ Vastu tips_ 🗽
वास्तु शास्त्र के अनुसार पानी से भरी एक सुराही घर में जरूर रखनी चाहिए। घर में पानी से भरी सुराही रखने से धन की कभी कमी नहीं होती। सुराही न मिले तो मिट्टी का छोटा घड़ा रखना भी लाभदायक होता है। वहीं ध्यान रखें कि इसमें हमेशा पानी भरा होना चाहिए तभी परिवार में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहेगी। वास्तु के मुताबिक, सुराही या मिट्टी का घड़ा रखने के लिए उत्तर दिशा का चुनाव करना चाहिए, क्योंकि उत्तर दिशा को जल के देवता की दिशा माना जाता है।
वास्तु के अनुसार, मिट्टी का घड़ा कभी खाली नहीं रखना चाहिए। उसमें हमेशा पानी भरकर ही रखें। वहीं अगर आप अपने करियर में सफलता चाहते हैं तो रोजाना शाम के समय मिट्टी के घड़े के पास दीपक और कपूर जलाएं। इसके अलावा मिट्टी का घड़ा कभी भी गैस के पास नहीं रखना चाहिए वरना इससे घर में आर्थिक समस्या आती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
दिन में सोने का सही तरीका क्या होना चाहिए?
शांत और अंधेरे वातावरण में सोएं: दिन में सोने के लिए एक आरामदायक और कम रोशनी वाला स्थान चुनें। बहुत अधिक रोशनी और शोरगुल झपकी की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।
सोने की मुद्रा सही रखें: यदि संभव हो तो बिस्तर पर लेटकर न सोएं, बल्कि आरामदायक कुर्सी या सोफे पर हल्की झपकी लें। बिस्तर पर सोने से गहरी नींद आने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे जागने के बाद सुस्ती महसूस हो सकती है।
खाली पेट या ज्यादा भरे पेट न सोएं: भोजन के तुरंत बाद सोने से पाचन तंत्र पर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे अपच और एसिडिटी की समस्या हो सकती है। हल्का खाना खाने के बाद ही झपकी लें।
कैफीन से बचें: दिन में सोने से पहले चाय, कॉफी या अन्य कैफीन युक्त चीजों का सेवन करने से बचें, क्योंकि इससे नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
शारीरिक ऊर्जा बढ़ाए इसमें मौजूद कई पोषक तत्वों के कारण सफेद मूसली शारीरिक शिथिलता को दूर करती है। शारीरिक ऊर्जा बढ़ाने में यह बेहद लाभकारी है l
बढ़ाये रोग प्रतिकार शक्ति यह एक शक्तिशाली ऊर्जावर्धक है जो शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली के कोशिकाओं को बढ़ाती है और क्रियाशील बनाने में मदत करती है l यह समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है और सामान्य कमजोरी को दूर करती है। जिससे रोगों से लड़ने में सहायता मिलती है l
इन्फेक्शन में है फायदेमंद आयुर्वेद ने मौखिक संक्रमणों के इलाज में सफेद मूसली के बारे में बताया है। इसकी जड़ का पाउडर घी में भूनकर, गले और मुंह के संक्रमण को कम करने के लिए सेवन किया जाता है।
पेशाब में जलन होने पर तो सफेद मूसली की जड़ को पीसकर इलायची के साथ दूध में उबालकर पीना बेहद फायदेमंद होता है। दिन में दो बार इसे पीने से बहुत आराम होता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
महर्षि वशिष्ठ का श्राप क्यों मिला? एक दिन वसुओं की पत्नियाँ और परिवार पृथ्वी पर भ्रमण कर रहे थे। उसी समय, वसु प्रभास की पत्नी को महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में स्थित एक दिव्य कामधेनु गाय नंदिनी को देखकर उसकी इच्छा हुई कि वह उसे ले जाए।
प्रभास ने अपनी पत्नी की इच्छा पूरी करने के लिए अन्य वसुओं के साथ मिलकर उस गाय को चोरी कर लिया। जब महर्षि वशिष्ठ को यह पता चला, तो उन्होंने क्रोधित होकर सभी वसुओं को श्राप दे दिया। उन्होंने कहा-
तुम सबको पृथ्वी पर मनुष्य योनि में जन्म लेना होगा और वहाँ अपने कर्मों का फल भोगना होगा। यह सुनकर वसुओं को बहुत पछतावा हुआ, और वे वशिष्ठ के चरणों में गिरकर क्षमा माँगने लगे।
वसुओं की प्रार्थना और गंगा का अवतार महर्षि वशिष्ठ को दया आई, लेकिन वे अपने श्राप को वापस नहीं ले सकते थे। उन्होंने कहा कि सभी वसुओं को पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ेगा, लेकिन सात वसु जल्दी ही मुक्त हो जाएँगे। केवल द्यौ वसु को लंबी आयु तक मनुष्य के रूप में रहना होगा, क्योंकि वही इस अपराध का मुख्य कारण था।
वसुओं ने देवी गंगा से प्रार्थना की कि वह उनकी माता बनें और जन्म लेते ही उन्हें मुक्ति दिला दें। गंगा ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और पृथ्वी पर अवतार लेने का निश्चय किया।
गंगा का पृथ्वी पर आगमन और राजा शांतनु से विवाह गंगा ने पृथ्वी पर आने के लिए महाभिषा नामक राजा के साथ विवाह करने का संकल्प लिया, जो अपने पूर्व जन्म में स्वर्ग में इंद्र की सभा में एक देवता थे। एक बार महाभिषा और गंगा दोनों ब्रह्मा जी की सभा में उपस्थित थे। तभी अचानक वायु के प्रभाव से गंगा के वस्त्र हट गए। महाभिषा उन्हें टकटकी लगाकर देखने लगे।
ब्रह्मा जी ने यह देखकर कहा महाभिषा, तुम इतने लोभ में पड़ चुके हो कि अब तुम्हें पृथ्वी पर जन्म लेना होगा।
इस प्रकार महाभिषा ने पृथ्वी पर राजा शांतनु के रूप में जन्म लिया। जब गंगा पृथ्वी पर आईं, तो राजा शांतनु ने उनसे विवाह का प्रस्ताव रखा।
गंगा ने कहा—मैं तुमसे विवाह करूँगी, लेकिन एक शर्त है—तुम कभी भी मेरे किसी कार्य में हस्तक्षेप नहीं करोगे। यदि तुमने मुझसे कोई प्रश्न किया या मेरे कार्यों को रोकने की कोशिश की, तो मैं तुरंत तुम्हें छोड़कर चली जाऊँगी।” राजा शांतनु ने प्रेम में पड़कर यह शर्त स्वीकार कर ली।
गंगा द्वारा सात पुत्रों का जल में बहाना गंगा और शांतनु के विवाह के बाद उनके आठ पुत्र हुए। लेकिन जैसे ही कोई संतान जन्म लेती, गंगा उसे नदी में बहा देतीं। राजा शांतनु यह देखकर बहुत दुखी होते, लेकिन अपनी शर्त के कारण कुछ कह नहीं सकते थे।
जब आठवें पुत्र का जन्म हुआ और गंगा उसे भी नदी में प्रवाहित करने लगीं, तो राजा शांतनु से रहा नहीं गया और उन्होंने गंगा को रोकते हुए पूछा—तुम मेरे पुत्रों को नदी में क्यों बहा रही हो? यह तुम किस कारण कर रही हो?
गंगा ने तुरंत उत्तर दिया—हे राजन! तुमने मुझे रोककर अपना वचन तोड़ा है। अब मुझे तुम्हें छोड़कर जाना होगा।
गंगा का रहस्य बताना गंगा ने जाने से पहले राजा शांतनु को पूरी कथा सुनाई कि वे आठों पुत्र वास्तव में शापित वसु थे। उन्होंने कहा— मैंने पहले सात पुत्रों को जल में बहाकर उन्हें उनके दिव्य स्वरूप में लौटा दिया, लेकिन यह आठवाँ पुत्र (द्यौ वसु) अपने कर्मों के कारण पृथ्वी पर रहेगा और एक महान योद्धा बनेगा।
यह कहकर गंगा अपने आठवें पुत्र को लेकर अंतर्ध्यान हो गईं।
भीष्म पितामह का जन्म और गंगा द्वारा उन्हें लौटाना वर्षों बाद गंगा पुनः प्रकट हुईं और अपने पुत्र को राजा शांतनु को सौंप दिया। यह पुत्र आगे चलकर गंगापुत्र देवव्रत (भीष्म पितामह) बना, जिसने महाभारत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कथा का सार वसुओं को महर्षि वशिष्ठ के श्राप के कारण मनुष्य योनि में जन्म लेना पड़ा।
देवी गंगा ने उनकी माता बनकर उन्हें जन्म के तुरंत बाद मुक्ति दिलाई।
राजा शांतनु ने गंगा को विवाह के समय जो वचन दिया था, उसे तोड़ने पर गंगा उन्हें छोड़कर चली गईं।
आठवें पुत्र, द्यौ वसु (भीष्म पितामह), को अपने कर्मों के कारण लंबे समय तक पृथ्वी पर रहना पड़ा।
शिक्षा : यह कथा हमें सिखाती है कि कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है, चाहे वे स्वर्गीय देवता ही क्यों न हों। साथ ही, यह भी दर्शाता है कि माता गंगा केवल प्रेम और करुणा की प्रतीक ही नहीं, बल्कि मोक्ष देने वाली भी हैं।
ॐ❀ೋ═══ 👣 ═══ೋ❀ॐ
⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।



