धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 14 अप्रैल 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 14 अप्रैल 2025
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – बैशाख मास
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार बैशाख माह के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि 08:25 AM तक उपरांत द्वितीया
💫 नक्षत्र – नक्षत्र स्वाति 12:13 AM तक उपरांत विशाखा
🪐 नक्षत्र स्वामी – स्वाति नक्षत्र के स्वामी राहु हैं। स्वाति नक्षत्र के देवता वायु और सरस्वती हैं।
⚜️ योग – वज्र योग 10:38 PM तक, उसके बाद सिद्धि योग
प्रथम करण : कौलव – 08:25 ए एम तक
द्वितीय करण : तैतिल – 09:40 पी एम तक गर
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:42:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:18:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:27 ए एम से 05:12 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:50 ए एम से 05:57 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:56 ए एम से 12:47 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:21 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:45 पी एम से 07:07 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:46 पी एम से 07:53 पी एम
💧 अमृत काल : 02:18 पी एम से 04:07 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:59 पी एम से 12:43 ए एम, अप्रैल 15
🚓 यात्रा शकुन – मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र – ॐ सौ सौभाग्य नमः।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय – शिवजी को दुग्धाभिषेक करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय – पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – बैसाखी पर्व, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जयन्ती, सिख पंथ के 10वें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी खालसा पंथ की स्थापना दिवस, लेखक के. सरस्वती अम्मा जन्म दिवस, विश्व एयरोनॉटिक्स और ब्रह्माण्ड विज्ञान दिवस, विश्व चगास रोग दिवस, सत्यशोधक समाज के प्रथम अध्यक्ष डॉ. विश्राम रामजी घोले जन्म दिवस,पार्श्व गायिका शमशाद बेगम जन्म दिवस, भारतीय दार्शनिक श्री रमन महर्षि स्मृति दिवस, अग्निशमन दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।।
⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।।
🏘️ Vastu tips 🏚️
दहलीज के सामने न करें भोजन
आजकल बनाये गए घरों में आपको भले ही चौखट या फिर दहलीज देखने को न मिले लेकिन, आपको कभी भी दरवाजे की बीच वाली जगह पर बैठकर भोजन नहीं करना चाहिए. माना जाता है कि इस जगह पर भगवान का वास होता है. मान्यताओं के अनुसार आपको घर की दहलीज पर भोजन करने के अलावा न ही वहां पर खड़ा रहना चाहिए और न ही बैठना चाहिए. जब आप ऐसा करते हैं तो भगवान आपसे नाराज हो जाते हैं आपकी यह गलती दरिद्रता को आपके घर और जीवन में आमंत्रित करती है. पैसों का आना कम हो जाता है और खर्चे बढ़ जाते हैं. कई बार परिवार के सदस्य बीमारियों से भी जूझने लग जाते है.
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाली आदतें फिजिकल इनएक्टिविटी आजकल की बिजी लाइफस्टाइल में ज्यादातर लोग घंटों एक ही जगह बैठकर काम करते हैं। फिजिकल एक्टविटी की कमी से मोटापा, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है। नियमित एक्सरसाइज न करने से आर्टरीज की फ्लेक्सिबिलिटी कम होती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन में दबाव बढ़ जाता है।
क्या करें?
रोजाना कम से कम 30 मिनट ब्रिस्क वॉक, योग या एरोबिक्स करें।
लंबे समय तक बैठने से बचें और हर घंटे 5 मिनट का ब्रेक लें।
तनाव लेना स्ट्रेस और एंग्जायटी का सीधा असर ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। जब आप तनाव में होते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल औरएड्रेनालिन हार्मोन बढ़ जाते हैं, जो हार्ट रेड और ब्लड प्रेशर को बढ़ा देते हैं। लंबे समय तक तनाव में रहने से हाई बीपी की समस्या पैदा हो सकती है।
क्या करें?
मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग और 7-8 घंटे की नींद लें।
अपनी पसंद का कोई हॉबी जैसे म्युजिक, पेंटिंग या गार्डनिंग करें।
नींद की कमी कम सोना या नींद पूरी न होना भी हाई ब्लड प्रेशर का कारण बन सकता है। नींद की कमी से शरीर का तनाव बढ़ता है और हार्मोनल असंतुलन होता है, जिससे ब्लड प्रेशर प्रभावित होता है।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
रक्तचाप के आदर्श स्तर और उनकी व्याख्या
सामान्य रक्तचाप (120/80 mmHg या उससे कम) – यदि 65 वर्ष की आयु में आपका रक्तचाप इस सीमा में है, तो यह हृदय और धमनियों के लिए आदर्श माना जाता है। इसका मतलब है कि रक्त संचार सुचारू रूप से हो रहा है और हृदय को अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ रही है।
➤ मजबूत हृदय, स्वस्थ धमनियां, बेहतर ऑक्सीजन आपूर्ति
सामान्य से अधिक (130/85 mmHg – 140/90 mmHg) यदि रक्तचाप इस सीमा में है, तो यह एक संकेत हो सकता है कि हृदय पर हल्का दबाव बढ़ रहा है। यह उम्र के साथ होने वाले स्वाभाविक परिवर्तनों के कारण हो सकता है, लेकिन इस पर नजर रखना जरूरी है।
➤ स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत, आहार व व्यायाम में सुधार करें
उच्च रक्तचाप (140/90 mmHg से अधिक) – यदि किसी 65 वर्षीय व्यक्ति का रक्तचाप इस स्तर से ऊपर जाता है, तो यह हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) का संकेत हो सकता है, जो हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी की समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकता है।
🪔 गुरु भक्ति योग 🕯️
शिव-पार्वती का सौम्य प्रेम
मित्रों! एक बार की बात है कैलाश पर्वत पर भगवान शिव ध्यानमग्न थे। उनके चारों ओर दिव्य ऊर्जा का प्रवाह था। माता पार्वती उनके साथ थीं, और प्रेमपूर्वक उनकी सेवा में लगी हुई थीं। एक दिन माता पार्वती ने सोचा कि क्यों न भगवान शिव को थोड़ा सा हँसाया जाए।
हँसी-मजाक में उन्होंने भगवान शिव की आंखें पीछे से आकर अपनी हथेलियों से बंद कर दीं।
सृष्टि में छा गया अंधकार जैसे ही माता ने भगवान शिव की आंखें ढँकीं, पूरा ब्रह्मांड अंधकार से भर गया।
क्योंकि शिव के तीन नेत्र हैं —
बायां नेत्र चंद्रमा के समान है,
दायां नेत्र सूर्य के समान,
और तीसरा नेत्र अग्नि का प्रतीक है।
इन नेत्रों से ही प्रकाश, समय और चेतना का प्रवाह होता है। लेकिन जब सभी नेत्र बंद हो गए, तो दिन रात में बदल गयी। सृष्टि रुक गई, तापमान गिर गया, और चारों ओर भय छा गया।
अंधकार से उत्पन्न हुआ असुर — अंधकासुर इसी अंधकार में, भगवान शिव के पसीने कि एक बूंद शरीर से धरती पर गिरी। वह बूंद तपकर एक भयंकर असुर में बदल गई, जिसे अंधक कहा गया — जिसका अर्थ है “अंधकार से जन्मा”।
अंधकासुर बहुत ही बलशाली, घमंडी और अहंकारी था। वह बड़ा होकर संपूर्ण ब्रह्मांड को जीतना चाहता था। ब्रह्मा जी से उसने वरदान प्राप्त किया कि उसे कोई भी नहीं मार सकता जब तक कि उसके माता-पिता उसे स्वयं न मारें।
अंधकासुर का आतंक;बड़े होते ही अंधकासुर ने देवताओं पर चढ़ाई की, साधुओं को सताया, और सृष्टि का संतुलन बिगाड़ दिया। उसने माता पार्वती को भी अपनी पत्नी बनाने की इच्छा जताई और कैलाश पर चढ़ाई की।तब भगवान शिव ने उससे युद्ध किया।
महायुद्ध और अंत अंधकासुर ने कई रूपों में आकर भगवान शिव से युद्ध किया। कई वर्षों तक यह युद्ध चला। अंततः भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से उसका वध किया। जब वह मरणासन्न हुआ, तब उसे यह ज्ञान हुआ कि जिसे वह जीतना चाहता था, वे ही उसके माता-पिता हैं।
उसने रोते हुए कहा- हे प्रभु! आप ही मेरे जनक हैं, और माता पार्वती मेरी जननी। मैं अज्ञान में था, क्षमा करें।
भगवान शिव ने उसे क्षमा कर दिया और उसे अपने गणों में स्थान दिया। वह आगे चलकर भक्त बन गया।
शिक्षा प्रेम में की गई लापरवाही भी सृष्टि को प्रभावित कर सकती है।
शिव की दृष्टि ही सृष्टि है — उनका चेतना में रहना आवश्यक है।
अज्ञानता (अंधक) का अंत ज्ञान (शिव) से ही होता है।
ईश्वर क्षमाशील हैं — पश्चाताप करने वाले को वे स्वीकार करते हैं।
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।।

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